- सीएजी रिपोर्ट के बावजूद धीमी कार्रवाई, जांच की रफ्तार पर सवाल

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्यप्रदेश के चर्चित पोषण आहार (टेक होम राशन) घोटाले की जांच चार साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। वर्ष 2022 की नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में उजागर हुई अनियमितताओं पर सरकार ने 62 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस तो जारी किए हैं, लेकिन अब तक विभागीय जांच केवल 37 अधिकारियों के खिलाफ ही शुरू हो पाई है। शेष अधिकारियों के जवाबों का परीक्षण किया जा रहा है, जिसके बाद आगे की कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा।
यह जानकारी पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने विधानसभा में कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल के लिखित प्रश्न के उत्तर में दी। सरकार के जवाब से स्पष्ट है कि सीएजी की गंभीर आपत्तियों के बावजूद कार्रवाई की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी बनी हुई है।
73 अधिकारियों पर कार्रवाई, कई मामलों में फैसला बाकी
मंत्री ने बताया कि टेक होम राशन योजना से संबंधित सीएजी रिपोर्ट के आधार पर अब तक 73 अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है। इनमें 11 प्रथम श्रेणी के जिला कार्यक्रम अधिकारी भी शामिल हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 10 प्रकरणों का निस्तारण किया जा चुका है। 6 मामलों में जांच पूरी हो चुकी है, लेकिन अंतिम निर्णय अभी लंबित है। 8 अधिकारियों की फाइलें शासन को भेजी गई हैं। 13 मामलों में विभागीय जांच अभी भी जारी है। सरकार का कहना है कि जिन अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है, उनके जवाबों की जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
लोकायुक्त की जांच भी जारी
मामले की जांच केवल विभागीय स्तर तक सीमित नहीं है। सीएजी रिपोर्ट के आधार पर पूर्व विधायक पारस सखलेचा की शिकायत पर लोकायुक्त संगठन भी इस मामले की जांच कर रहा है। सरकार ने विधानसभा में बताया कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव दीपाली रस्तोगी 31 अगस्त को लोकायुक्त कार्यालय में उपस्थित होंगी। उन्होंने पूर्व में व्यस्तता के कारण उपस्थित नहीं हो पाने की सूचना दी थी। उल्लेखनीय है कि लोकायुक्त संगठन उन्हें पहले भी कई बार नोटिस जारी कर चुका है।
सीएजी रिपोर्ट के बाद भी धीमी कार्रवाई पर सवाल
विधानसभा में दिए गए जवाब से यह साफ है कि वर्ष 2022 में सामने आए इस बहुचर्चित मामले में कार्रवाई अभी भी अधूरी है। बड़ी संख्या में अधिकारियों के खिलाफ जांच लंबित है और कई मामलों में अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। ऐसे में विपक्ष ने जांच की धीमी गति और जवाबदेही तय करने में हो रही देरी पर सवाल उठाए हैं। अब नजर 31 अगस्त को लोकायुक्त के समक्ष होने वाली सुनवाई और विभागीय जांच के लंबित मामलों पर सरकार के अगले कदम पर रहेगी।
