गरीब बच्चों की पढ़ाई पर संकट

  • आरटीई की फीस प्रतिपूर्ति अटकी, टीसी के लिए स्कूल मांग रहे पैसे

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में पढ़ रहे आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के हजारों विद्यार्थियों के सामने नई परेशानी खड़ी हो गई है। राज्य सरकार द्वारा पिछले दो शैक्षणिक सत्रों 2024-25 और 2025-26 की फीस प्रतिपूर्ति राशि निजी स्कूलों को अब तक जारी नहीं की गई है। इसका असर अब बच्चों की पढ़ाई और स्कूल बदलने की प्रक्रिया पर पड़ रहा है। कई निजी स्कूल प्रबंधन फीस प्रतिपूर्ति नहीं मिलने का हवाला देते हुए विद्यार्थियों को स्थानांतरण प्रमाण पत्र (टीसी) देने से इनकार कर रहे हैं। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूलों द्वारा टीसी जारी करने के लिए लंबित फीस और अन्य शुल्क जमा करने का दबाव बनाया जा रहा है।
आरटीई के तहत निजी स्कूलों में कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित होती हैं। इन सीटों पर बच्चों को निशुल्क प्रवेश दिया जाता है और इसके बदले राज्य सरकार स्कूलों को निर्धारित फीस की प्रतिपूर्ति करती है। प्रदेश में इस मद में हर साल करीब 400 करोड़ रुपये की राशि निजी स्कूलों को दी जाती है, लेकिन पिछले दो वर्षों से भुगतान लंबित होने के कारण स्कूल संचालकों और अभिभावकों के बीच विवाद की स्थिति बन रही है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार जल्द भुगतान नहीं करती है तो आरटीई के तहत गरीब बच्चों के प्रवेश और उनकी निरंतर शिक्षा पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
 बिना भुगतान के खर्च उठाना मुश्किल
निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि सरकार से फीस प्रतिपूर्ति नहीं मिलने के कारण आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। उनका कहना है कि आरटीई के बच्चों की शिक्षा, स्टाफ और अन्य व्यवस्थाओं का खर्च स्कूलों को उठाना पड़ रहा है। स्कूल संचालकों की मांग है कि या तो सरकार जल्द लंबित भुगतान करे या फिर स्कूल छोडऩे वाले विद्यार्थियों की सीट पर नए प्रवेश की अनुमति दी जाए, ताकि आर्थिक नुकसान कम हो सके।
छह साल में घटे आरटीई प्रवेश
गौरतलब है कि आरटीई के तहत प्रवेश प्रक्रिया में भी गिरावट देखने को मिली है। 2021-22 में 1,99,741 पात्र आवेदनों में से 1,29,690 बच्चों को प्रवेश मिला था। करीब 70 हजार बच्चे प्रवेश से वंचित रह गए थे। 2026-27 में 2,10,422 आवेदन आए, जिनमें 1.78 लाख आवेदन पात्र पाए गए। पहले चरण में केवल करीब 97 हजार विद्यार्थियों को प्रवेश मिल सका। आंकड़े बताते हैं कि आवेदन बढऩे के बावजूद प्रवेश पाने वाले बच्चों की संख्या में कमी आई है।
टीसी के लिए अभिभावक परेशान
मिली जानकारी के अनुसार, कई छात्रों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पुष्पा नगर स्थित एमपी विकास कान्वेंट स्कूल में आरटीई के तहत पढऩे वाली छात्रा गरिमा यादव ने पांचवीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद दूसरे स्कूल में प्रवेश ले लिया। लेकिन पुराने स्कूल ने फीस प्रतिपूर्ति लंबित होने का हवाला देते हुए टीसी देने से इनकार कर दिया। छात्रा के पिता राजकुमार यादव ने इसकी शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी से की है। रातीबड़ स्थित आईएएस स्कूल में आरटीई के तहत पढ़ रही छात्रा के अभिभावक दीपक बाथम ने कलेक्टर की जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराई है।
स्कूल एसोसिएशन आंदोलन की तैयारी में
प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष अजीत सिंह ने कहा कि दो सत्रों की फीस प्रतिपूर्ति नहीं मिलने से कई स्कूल संचालक आरटीई विद्यार्थियों को पढ़ाने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लंबित भुगतान की मांग को लेकर आने वाले दिनों में प्रदर्शन किया जाएगा। वहीं एमपी विकास कान्वेंट के संचालक प्रेम ठाकुर का कहना है कि दो साल से शासन से फीस नहीं मिली है। यदि विद्यार्थी बीच सत्र में स्कूल छोड़ते हैं तो स्कूल को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि कुछ गतिविधियों की फीस बकाया होने के बाद ही टीसी जारी की जाएगी।
सरकार के भुगतान पर टिकी आरटीई व्यवस्था
आरटीई का उद्देश्य गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में बेहतर शिक्षा का अवसर देना है, लेकिन फीस प्रतिपूर्ति में देरी से अब वही विद्यार्थी सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं, जिनके लिए यह व्यवस्था बनाई गई थी। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो प्रदेश में आरटीई व्यवस्था पर भरोसे का संकट खड़ा हो सकता है।

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