सिर्फ साढ़े तीन लाख घरों तक पहुंची पीएनजी

पीएनजी
  • गैस संकट में भी मप्र के 90त्न से ज्यादा घर पाइप्ड नेचुरल गैस से बाहर

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई में आई हालिया दिक्कत ने मध्य प्रदेश में वैकल्पिक घरेलू गैस व्यवस्था की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदेश में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के विस्तार के लिए एक दर्जन से ज्यादा कंपनियों को मंजूरी मिलने के बावजूद पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) अभी सिर्फ 3.37 लाख घरों तक पहुंच सकी है। यानी एलपीजी सप्लाई बाधित होने की स्थिति में प्रदेश के अधिकांश घरेलू उपभोक्ताओं के पास पीएनजी का विकल्प उपलब्ध नहीं है।
पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस रेगुलेटरी बोर्ड (पीएनजीआरबी) के 31 मई तक के आंकड़ों के मुताबिक मप्र में कुल 3,36,953 घरेलू पीएनजी कनेक्शन हैं। कनेक्शन संख्या के लिहाज से प्रदेश देश में आठवें स्थान पर है। हालांकि आबादी और घरेलू गैस उपभोक्ताओं के बड़े आधार को देखते हुए पीएनजी की पहुंच अभी सीमित बनी हुई है।
कनेक्शन की रफ्तार धीमी
मप्र में अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में सिटी गैस नेटवर्क विकसित करने के लिए कई कंपनियों को अनुमति दी गई है। इसके बावजूद पाइपलाइन नेटवर्क को बड़ी संख्या में घरेलू उपभोक्ताओं से जोडऩे की रफ्तार अपेक्षित नहीं दिख रही है। सबसे ज्यादा कनेक्शन इंदौर भौगोलिक क्षेत्र में हैं, जिसमें उज्जैन भी शामिल है। यहां 1,35,095 घरेलू कनेक्शन हैं। ग्वालियर क्षेत्र 66,629 कनेक्शन के साथ दूसरे और देवास 40,503 कनेक्शन के साथ तीसरे स्थान पर है। राजधानी भोपाल में राजगढ़ को मिलाकर 39,432 घरेलू पीएनजी कनेक्शन हैं। प्रदेश के प्रमुख शहरी क्षेत्रों में शामिल होने के बावजूद यहां भी पीएनजी की पहुंच सीमित है। इसके अलावा सीधी-सिंगरौली में 11,993, रायसेन-शाजापुर-सीहोर में 11,769 और सतना-शहडोल में 10,903 कनेक्शन हैं। मुरैना में 4,145, शिवपुरी में 3,126 और रीवा में 2,830 घरेलू कनेक्शन दर्ज हैं। गुना, अशोकनगर और धार में यह संख्या करीब 1800-1800 के आसपास है।
महाराष्ट्र से बड़ा अंतर
पीएनजी के विस्तार में मप्र की स्थिति देश के अग्रणी राज्यों की तुलना में काफी पीछे है। महाराष्ट्र में 47.42 लाख घरेलू कनेक्शन हैं और वह देश में सबसे आगे है। गुजरात में 39.08 लाख, उत्तर प्रदेश में 23.06 लाख और दिल्ली में 19.60 लाख कनेक्शन हैं। कर्नाटक में 6.11 लाख, हरियाणा में 6.03 लाख और राजस्थान में 5.44 लाख घरेलू पीएनजी कनेक्शन हैं। इन राज्यों की तुलना में मप्र के 3.37 लाख कनेक्शन यह बताते हैं कि प्रदेश में सिटी गैस नेटवर्क का विस्तार अभी शुरुआती स्तर से आगे नहीं बढ़ पाया है।
सिलेंडर संकट में सामने आई पीएनजी की उपयोगिता
एलपीजी व्यवस्था बॉटलिंग प्लांट, सिलेंडर परिवहन और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क पर निर्भर है। मांग बढऩे या परिवहन प्रभावित होने पर इसकी सप्लाई प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर पीएनजी पाइपलाइन के जरिए सीधे घरों तक पहुंचती है। इसमें सिलेंडर बुकिंग और डिलीवरी की जरूरत नहीं होती। यही वजह है कि हालिया एलपीजी सप्लाई संकट के बीच पीएनजी को वैकल्पिक ईंधन के तौर पर देखा जा रहा है। लेकिन मप्र में इसकी सीमित पहुंच के कारण यह विकल्प अभी प्रदेश के छोटे हिस्से तक ही सिमटा हुआ है।
चुनौती सिर्फ पाइपलाइन बिछाने की नहीं
मप्र में पीएनजी विस्तार की मौजूदा स्थिति यह भी बताती है कि सिर्फ सीजीडी नेटवर्क को मंजूरी देना पर्याप्त नहीं है। असली चुनौती पाइपलाइन को ज्यादा से ज्यादा घरों तक पहुंचाने, कनेक्शन देने और उपभोक्ताओं को पीएनजी अपनाने के लिए तैयार करने की है। एलपीजी संकट ने इसी गैप को उजागर किया है। जब तक घरेलू पीएनजी कनेक्शन का दायरा तेजी से नहीं बढ़ता, तब तक प्रदेश के अधिकांश परिवार खाना पकाने के लिए सिलेंडर आधारित एलपीजी पर ही निर्भर रहेंगे।

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