
- 15 मिनट तक असामान्य स्थिति रही तो सिस्टम होगा सक्रिय
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। प्रदेश में बिजली की मांग अचानक बढऩे या ग्रिड पर दबाव आने की स्थिति में अब बिजली कटौती का फैसला मैनुअल तरीके से लेने की जरूरत कम होगी। नई स्वचालित मांग प्रबंधन व्यवस्था वास्तविक समय में ग्रिड की स्थिति की निगरानी करेगी और जरूरत पडऩे पर खुद तय करेगी कि किस वितरण कंपनी का कितना बिजली भार कम करना है। इसके बाद संबंधित क्षेत्रों की बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद की जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य किसी एक इलाके में लंबे समय तक बिजली काटना नहीं, बल्कि पूरे बिजली ग्रिड को असंतुलित होने से बचाना है। खास बात यह है कि ग्रिड की स्थिति सामान्य होते ही जिन क्षेत्रों की बिजली बंद की गई थी, वहां आपूर्ति भी तय प्रक्रिया के तहत अपने आप बहाल हो सकेगी।
नई व्यवस्था तब सक्रिय होगी, जब बिजली ग्रिड की आवृत्ति 50 हट्र्ज से नीचे चली जाए और वितरण कंपनियां अपने निर्धारित कार्यक्रम से 12 प्रतिशत से ज्यादा या 150 मेगावाट तक अतिरिक्त बिजली लेने लगें। ऐसी स्थिति लगातार 15 मिनट तक बनी रहने पर स्वचालित मांग प्रबंधन व्यवस्था सक्रिय होगी। इसके बाद कंप्यूटर आधारित प्रणाली यह तय करेगी कि प्रत्येक वितरण कंपनी से कितना बिजली भार कम करना है। यानी ग्रिड पर दबाव बढऩे की स्थिति में कटौती का फैसला केवल तत्काल मानवीय हस्तक्षेप पर निर्भर नहीं रहेगा।
कटौती भी जरूरत के हिसाब से होगी
व्यवस्था सक्रिय होने के बाद सभी क्षेत्रों में एक जैसी बिजली कटौती नहीं की जाएगी। प्रत्येक वितरण कंपनी के लिए अलग-अलग बिजली भार कम करने का लक्ष्य तय होगा। इसके बाद संबंधित नियंत्रण केंद्रों को उन समूहों या क्षेत्रों की जानकारी दी जाएगी, जहां अस्थायी रूप से आपूर्ति रोकनी है। इससे बिजली की मांग को तेजी से नियंत्रित किया जा सकेगा और ग्रिड पर बढ़ रहे दबाव को कम किया जा सकेगा।
राहत यह कि स्थिति सुधरते ही बिजली लौटेगी
नई व्यवस्था का सबसे अहम पहलू ऑटोमैटिक रिस्टोरेशन है। ग्रिड की स्थिति सामान्य होने के बाद पहले बंद किए गए बिजली समूहों को तय नियमों के अनुसार दोबारा आपूर्ति से जोड़ा जाएगा। इससे आवश्यकता खत्म होने के बाद भी उपभोक्ताओं को अनावश्यक रूप से बिजली कटौती झेलने की स्थिति नहीं बनेगी।
अचानक बढ़ी मांग से निपटने में मिलेगी मदद
बिजली की मांग और उपलब्धता में अचानक अंतर आने पर ग्रिड की आवृत्ति प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में समय पर मांग कम नहीं की गई तो पूरे सिस्टम पर असर पडऩे का खतरा रहता है। अभी ऐसी परिस्थितियों में अधिकारियों को स्थिति का आकलन कर तत्काल कार्रवाई करनी पड़ती है। नई व्यवस्था में कंप्यूटर आधारित प्रणाली लगातार ग्रिड की निगरानी करेगी। तय सीमा पार होते ही यह बिजली भार कम करने की प्रक्रिया शुरू कर देगी।
लक्ष्य बिजली काटना नहीं, ग्रिड बचाना
स्वचालित मांग प्रबंधन व्यवस्था को सामान्य बिजली कटौती की व्यवस्था के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसका प्राथमिक उद्देश्य ग्रिड को सुरक्षित रखना और बड़े स्तर की बिजली व्यवस्था प्रभावित होने से रोकना है। जरूरत पडऩे पर सीमित क्षेत्रों में अस्थायी कटौती कर पूरे सिस्टम को स्थिर रखने की कोशिश होगी।
