बजट 2027-28 में अब हर रुपए का हिसाब

बजट 2027-28
  • बेअसर योजनाओं पर चलेगी कैंची, नई स्कीम के लिए देना होगा पूरा औचित्य

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश के अगले बजट में विभागों के लिए मनमाने तरीके से नई योजनाएं जोडऩा आसान नहीं होगा। वित्त विभाग ने बजट 2027-28 की तैयारी शुरू करते हुए साफ कर दिया है कि नई योजना के प्रस्ताव के साथ उसका उद्देश्य, वित्तीय जरूरत, अपेक्षित परिणाम और राशि जुटाने के स्रोत का पूरा ब्योरा देना होगा। वहीं वर्षों से चल रही लेकिन अब उपयोगिता खो चुकी योजनाओं को बंद करने और समान उद्देश्य वाली योजनाओं को मर्ज करने पर भी विचार होगा। यानी इस बार बजट निर्माण का फोकस केवल राशि बढ़ाने पर नहीं, बल्कि कहां कितना पैसा खर्च हो रहा है और उसका नतीजा क्या मिल रहा है, इस पर रहेगा। विभागों को वित्तीय वर्ष 2026-27 के पुनरीक्षित अनुमान, 2027-28 के बजट अनुमान तथा 2028-29 और 2029-30 के रोलिंग बजट के प्रस्ताव 7 सितंबर तक आईएफएमआईएस में दर्ज कर भेजने हैं। समय सीमा के बाद प्रस्तावों की ऑनलाइन प्रविष्टि स्वीकार नहीं की जाएगी।
पुरानी योजनाओं की भी होगी परीक्षा
बजट चर्चा में केवल नई योजनाओं पर ही सवाल नहीं होंगे। विभागों को अपनी मौजूदा योजनाओं की उपयोगिता भी देखनी होगी। ऐसी योजनाएं जिनका प्रभाव कम हो गया है या जिनका उद्देश्य दूसरी योजना से पूरा हो रहा है, उन्हें बंद करने या मर्ज करने पर विचार किया जाएगा। इसका उद्देश्य बजट में अनावश्यक दोहराव रोकना और सीमित संसाधनों को ज्यादा प्रभावी योजनाओं में लगाने की कोशिश है। मध्य प्रदेश का बजट 2025-26 में करीब 4.21 लाख करोड़ रुपये था, जो 2026-27 में बढकऱ 4.38 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। सरकार ने 2028 तक बजट का आकार 7 लाख करोड़ रुपये से अधिक करने का लक्ष्य रखा है। ऐसे में आने वाला बजट केवल आकार बढ़ाने की कवायद नहीं होगा। सरकार के सामने बढ़ते बजट आकार के साथ योजनाओं पर खर्च की गुणवत्ता और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की चुनौती भी रहेगी।
एक महीने तक होगी पहली छंटनी
8 सितंबर से 8 अक्टूबर तक विभागवार पहली बजट चर्चा होगी। इसमें वित्त विभाग के उप सचिव स्तर के अधिकारी संबंधित विभागों के उप सचिव स्तर के अधिकारियों के साथ प्रस्तावों की समीक्षा करेंगे। इस चरण में विभागों को अपने प्रस्तावों का विस्तृत औचित्य बताना होगा। खासकर नई योजनाओं पर वित्त विभाग की नजर रहेगी। बिना सक्षम प्रशासनिक स्वीकृति के नई योजनाओं के प्रस्ताव स्वीकार नहीं किए जाएंगे। इसके बाद 12 अक्टूबर से 13 नवंबर तक दूसरे चरण की चर्चा होगी। जरूरत पडऩे पर 16 नवंबर से 14 दिसंबर के बीच तीसरे चरण की चर्चा भी की जा सकेगी।
रोलिंग बजट से अगले दो साल की भी तैयारी
2027-28 का बजट सिर्फ एक साल के खर्च का दस्तावेज नहीं होगा। रोलिंग बजट व्यवस्था के तहत इसके साथ अगले दो वित्तीय वर्षों की जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाएगा। यानी किसी योजना को शुरू करने से पहले उसका आने वाले वर्षों में वित्तीय बोझ भी देखा जाएगा। वित्त विभाग के अनुसार 2026-27 का बजट भी इसी आधार पर तैयार किया गया था। अब 2027-28 का बजट 2028-29 और 2029-30 की वित्तीय योजना का आधार बनेगा।
ग्रीन बजट में पर्यावरण खर्च अलग दिखेगा
सरकार बजट में पर्यावरण से जुड़े खर्च को अलग पहचान देने की तैयारी भी कर रही है। विभिन्न विभागों में पर्यावरण संरक्षण से संबंधित योजनाओं और बजट प्रावधानों को एक जगह लाकर ग्रीन बजट के लिए अलग हेड बनाने पर काम चल रहा है। 2027-28 के बजट में इस हेड के तहत अलग से राशि निर्धारित करने पर विचार किया जा रहा है। इससे पर्यावरण से जुड़े खर्च की निगरानी और उसका आकलन अलग से किया जा सकेगा।

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