प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की भारी कमी

  • मरीजों को नहीं मिल पा रहा उपचार

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञ डॉक्टरों और शिक्षकों के बड़ी संख्या में खाली पद चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए गंभीर चुनौती बन गए हैं। डॉक्टरों की कमी का असर केवल मेडिकल छात्रों की पढ़ाई पर ही नहीं पड़ रहा, बल्कि मरीजों को समय पर विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराने में भी मुश्किलें आ रही हैं। प्रदेश के चार प्रमुख सरकारी मेडिकल कॉलेजों के आंकड़े बताते हैं कि सबसे अधिक रिक्तियां नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज, जबलपुर में हैं। यहां स्वीकृत 342 पदों में से 91 पद खाली हैं। इसके बाद गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय (जीआरएमसी), ग्वालियर में लगभग 22 प्रतिशत पद रिक्त हैं। वहीं महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज, इंदौर में स्वीकृत 405 पदों में से 74 पद खाली हैं, जबकि गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल में 431 स्वीकृत पदों में से 66 पद रिक्त हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई की गुणवत्ता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है। हाल के वर्षों में एमबीबीएस और पीजी की सीटों में लगातार बढ़ोतरी हुई है, लेकिन उसके अनुरूप फैकल्टी की नियुक्तियां नहीं हो सकी हैं। इसका सीधा असर छात्रों के प्रशिक्षण, क्लिनिकल एक्सपोजर और शोध गतिविधियों पर पड़ रहा है। दूसरी ओर, मेडिकल कॉलेजों से जुड़े अस्पतालों में मरीजों को कई विभागों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उपचार में देरी और डॉक्टरों पर कार्यभार बढ़ रहा है।

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