एसीएस-पीएस स्तर पर व्यापक फेरबदल तय

  • बर्णवाल युग की शुरुआत: नए मुख्य सचिव के साथ होगी बड़ी प्रशासनिक सर्जरी

गौरव चौहान
मध्यप्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में एक नए दौर की शुरुआत हो गई। 1991 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अशोक बर्णवाल ने प्रदेश के 35 वें मुख्य सचिव (सीएस) के रूप में कार्यभार संभाल लिया। मंत्रालय में निवर्तमान मुख्य सचिव अनुराग जैन ने उन्हें औपचारिक रूप से पदभार सौंपा। लेकिन यह केवल पदभार ग्रहण करने का औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि इसके साथ ही प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव की उलटी गिनती भी शुरू हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, नए मुख्य सचिव के कार्यभार संभालते ही एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (एसीएस) और प्रमुख सचिव (पीएस) स्तर पर बड़े पैमाने पर विभागीय फेरबदल की तैयारी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ चर्चा के बाद एक-दो दिन में तबादला सूची जारी होने की संभावना जताई जा रही है।
मुख्य सचिव बनने से पहले अशोक बर्णवाल के पास स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, भोपाल गैस राहत एवं पुनर्वास तथा आयुक्त खाद्य सुरक्षा का अतिरिक्त प्रभार था। उनके मुख्य सचिव बनने के बाद ये विभाग खाली हो गए हैं और अब सरकार इन्हें किसी अनुभवी वरिष्ठ अधिकारी को सौंपने की तैयारी में है। प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों के विस्तार, स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण और नई स्वास्थ्य योजनाओं के चलते यह विभाग सरकार की प्राथमिकता में है। इसलिए इन विभागों पर नियुक्ति को प्रशासनिक फेरबदल का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
सबसे ज्यादा नजर डॉ. राजेश राजौरा पर
प्रशासनिक हलकों में सबसे अधिक चर्चा 1990 बैच के आईएएस एवं अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा को लेकर है। मुख्य सचिव की दौड़ में सबसे वरिष्ठ होने के बावजूद उन्हें सुपरसीड कर अशोक बर्णवाल को यह जिम्मेदारी दी गई। वर्तमान में डॉ. राजौरा के पास जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास विभाग जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विभाग हैं। सूत्रों का कहना है कि उन्हें मंत्रालय से बाहर किसी महत्वपूर्ण संस्थान की जिम्मेदारी दी जा सकती है। संभावित विकल्पों में शामिल हैं-प्रशासन अकादमी के महानिदेशक, माध्यमिक शिक्षा मंडल के अध्यक्ष और मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल के अध्यक्ष यदि ऐसा होता है तो प्रदेश की सिंचाई परियोजनाओं और नर्मदा घाटी विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी किसी अन्य वरिष्ठ अधिकारी को सौंपी जाएगी।
अतिरिक्त प्रभार खत्म करने की भी तैयारी
सूत्र बताते हैं कि इस बार का फेरबदल केवल अधिकारियों के तबादलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कई अधिकारियों के पास मौजूद अतिरिक्त प्रभार भी वापस लिए जा सकते हैं। सरकार विभागों का संतुलन बनाने और जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण कर सकती है।यह भी माना जा रहा है कि अशोक बर्णवाल के साथ पहले विभिन्न विभागों में काम कर चुके और उनकी कार्यशैली से परिचित अधिकारियों को महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी मिल सकती है। हालांकि अंतिम फैसला मुख्यमंत्री स्तर पर ही होगा।
अनुराग जैन जाएंगे नीति आयोग
इधर, निवर्तमान मुख्य सचिव अनुराग जैन शुक्रवार को नई दिल्ली रवाना होंगे और संभावना है कि सोमवार को नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) का पदभार ग्रहण करेंगे। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले ही उन्हें इस नियुक्ति की जानकारी दे दी गई थी, हालांकि इतनी जल्दी आदेश जारी होने की उन्हें उम्मीद नहीं थी।
इन विभागों में बदलाव की सबसे अधिक संभावना
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार आगामी सूची में जिन क्षेत्रों पर सबसे अधिक नजर रहेगी, उनमें शामिल हैं- स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, भोपाल गैस राहत एवं पुनर्वास, खाद्य सुरक्षा, जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास और  अतिरिक्त प्रभार वाले अन्य महत्वपूर्ण विभाग।
सरकार का उद्देश्य
सरकार प्रशासनिक मशीनरी को अधिक प्रभावी बनाते हुए आगामी महीनों में विकास परियोजनाओं, निवेश, स्वास्थ्य, सिंचाई और बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्यों में तेजी लाना चाहती है। ऐसे में नए मुख्य सचिव के नेतृत्व में होने वाला यह फेरबदल केवल अधिकारियों की अदला-बदली नहीं, बल्कि सरकार की प्रशासनिक प्राथमिकताओं का संकेत भी माना जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि नए मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल अपनी पहली प्रशासनिक सर्जरी में किन अधिकारियों पर भरोसा जताते हैं और प्रदेश के सबसे अहम विभागों की कमान किसे सौंपते हैं।

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