
बिच्छू डॉट कॉम। एक ओर जहां सरकार न्याय की राह सुलभ करने में लगी है। तो मप्र पुलिस सरकार की योजनाओं से आमजन को दूर रखना चाहती है। इसका खुलासा ई-एफआइआर व्यवस्था से हुआ। दरअसल, नए कानून में ई-एफआइआर व्यवस्था में बगैर थाने गए ऑनलाइन या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अपराध की सूचना दर्ज कराने की सुविधा दी गई। लेकिन प्रदेश में सालाना आने वाली 8 हजार ई-एफआइआर में 5त्न भी औपचारिक एफआइआर में नहीं बदल रही है। सबसे अच्छी जबलपुर और रेल पुलिस की है जहां 18 से 20 प्रतिशत ई-एफआइआर मूल एफआइआर में बदल रही है। बता दें प्रदेशभर में करीब 8 हजार से ज्यादा सालाना ई-एफआइआर होती है। ई-एफआइआर को लेकर पुलिस द्वारा इस प्रकार से लापरवाही की जा रही है। उसको लेकर डीजीपी कैलाश मकवाना सहित पीएचक्यू के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने चिंता व्यक्त की है। क्योंकि जो सुविधा सरकार द्वारा आम जनता को दी जा रही है। उसका असल में लाभ ही आम जनता को नहीं मिल रहा है। इसको लेकर सभी रेंज आईजी और जिलों को अगले तीन माह में परफॉर्मेंस सुधारने के निर्देश दिए गए हैं।
