
बिच्छू डॉट कॉम। मप्र में 16 साल बाद राज्य प्रशासनिक सेवा न्यायाधिकरण (सेट) के गठन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसे लेकर कर्मचारियों का कहना है कि सेट को हाईकोर्ट के समकक्ष दर्जा मिले, ताकि बेवजह अपील में सालों बर्बाद नहीं होकर सके। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सेट के पुनर्गठन का भरोसा कर्मचारियों को दिलाया था, जिसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग में सेट का खाका तैयार किया जा रहा है। इधर, कर्मचारी संगठनों ने एनजीटी की तर्ज पर हाईकोर्ट का दर्जा दिए जाने की मांग की है। कर्मचारियों के अनुसार सेट के निर्णय के खिलाफ सरकार अपील में हाईकोर्ट जाएगी, जिससे फाइनल ऑर्डर में औसत 5 से 6 साल लगेंगे। ऐसे में अधिकतर कर्मचारी न्याय मिलने से पहले ही रिटायर हो जाएंगे। इसीलिए सेट को कोर्ट में ही हो सकेगी और जिसके लिए बेहद ठोस आधार होना जरूरी होगा। इससे अपीलें कम होंगी। अन्यथा सेट त्वरित न्याय के बजाय विलंबित न्याय का माध्यम बनकर रह जाएगा। सेट से राज्य के कर्मचारियों को त्वरित राहत मिल जाती थी। वहीं हाईकोर्ट जाने में होने वाला खर्च भी बचता था। बावजूद 2001 में सेट को तत्कालीन सरकार ने मध्यप्रदेश के विभाजन को कारण बताते बंद कर दिया था।
