ई-ऑफिस ठप तो थम गया मंत्रालय का कामकाज

  • मैनुअल फाइलों के सहारे चला मंत्रालय, फाइलें लेकर अधिकारियों के चक्कर काटते रहे कर्मचारी

गौरव चौहान
राज्य मंत्रालय वल्लभ भवन में गुरुवार को ई-ऑफिस सिस्टम ठप होने से सरकारी कामकाज की रफ्तार थम गई। सिस्टम बंद रहने के कारण विभागों में फाइलों का ऑनलाइन मूवमेंट पूरी तरह रुक गया। जरूरी और रुटीन फाइलों को अधिकारियों तक मैनुअली पहुंचाकर आगे बढ़ाना पड़ा। इसका असर न केवल काम की गति पर पड़ा, बल्कि कर्मचारियों को एक ही फाइल के लिए अतिरिक्त समय और मशक्कत भी करनी पड़ी। इसका अंदाजा पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की एक फाइल से लगाया जा सकता है। विभाग में सोशल इम्पैक्ट बॉन्ड लागू करने संबंधी फाइल को गुरुवार को मंजूरी मिलनी थी। इस पर चार वरिष्ठ अधिकारियों के हस्ताक्षर जरूरी थे। ई-ऑफिस बंद होने के कारण फाइल ऑनलाइन आगे नहीं बढ़ सकी। वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा के बाद इसे मैनुअल तरीके से चलाने का निर्णय लिया गया। कर्मचारी ने फाइल तैयार की और उसे लेकर एक-एक कर अधिकारियों के पास पहुंचा। हस्ताक्षर कराने और फाइल को आगे बढ़ाने की पूरी प्रक्रिया में करीब तीन घंटे लग गए।
मंत्रालय में अधिकारी-कर्मचारी रोज की तरह सुबह कार्यालय पहुंचे और कंप्यूटर पर काम शुरू किया। ई-ऑफिस खोलने की कोशिश की गई तो सिस्टम काम नहीं कर रहा था। कर्मचारियों ने राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) से संपर्क किया। वहां से तकनीकी खराबी की जानकारी देते हुए बताया गया कि सिस्टम एक-दो घंटे में चालू हो जाएगा। इस उम्मीद में कर्मचारी लगातार कंप्यूटर स्क्रीन रिफ्रेश करते रहे, लेकिन लंबे समय तक ई-ऑफिस शुरू नहीं हुआ। इस दौरान फाइलों की ऑनलाइन ट्रैकिंग और अधिकारियों से डिजिटल अनुमोदन की प्रक्रिया भी प्रभावित रही। एनआईसी की ओर से कर्मचारियों को सिस्टम जल्द शुरू होने की जानकारी दी जाती रही।
दोपहर तीन बजे के बाद शुरू हुआ सिस्टम
ई-ऑफिस सिस्टम करीब दोपहर तीन बजे काम करने लगा। इसके बाद कर्मचारियों ने लंबित जरूरी और रूटीन फाइलों को ऑनलाइन आगे बढ़ाना शुरू किया। सुबह से रुकी फाइलों का दबाव भी एक साथ सिस्टम पर आया, जिससे कर्मचारियों को लंबित काम निपटाने में अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ी। मंत्रालय में ई-ऑफिस के माध्यम से रोजाना करीब 500 से अधिक फाइलों का ऑनलाइन मूवमेंट होता है। ऐसे में कुछ घंटे सिस्टम बंद रहने का असर बड़ी संख्या में विभागीय कामकाज पर पड़ता है। जरूरी फाइलों के मामले में अधिकारियों को वैकल्पिक तौर पर मैनुअल प्रक्रिया अपनानी पड़ी।
ई-ऑफिस ने बदली मंत्रालय की कार्यप्रणाली
मंत्रालय में ई-ऑफिस सिस्टम 1 जनवरी 2025 से लागू है। इसका उद्देश्य सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और गति बढ़ाने के साथ फाइलों के मूवमेंट को ऑनलाइन और व्यवस्थित करना था। सिस्टम लागू होने के बाद अधिकांश विभागों में फाइलों को एक अधिकारी से दूसरे अधिकारी तक भेजने के लिए मैनुअल प्रक्रिया पर निर्भरता काफी कम हुई है। ऑनलाइन व्यवस्था से फाइल किस अधिकारी के पास है, उसकी स्थिति क्या है और वह कब आगे बढ़ी—इसकी जानकारी डिजिटल माध्यम से मिल जाती है। इससे फाइलों की निगरानी और समयबद्ध स्वीकृति की प्रक्रिया भी आसान हुई है।
शुरुआत में हुई थी परेशानी, अब ऑनलाइन सिस्टम पर निर्भरता
ई-ऑफिस लागू होने के शुरुआती दौर में अधिकारी-कर्मचारियों को नई व्यवस्था समझने और ऑनलाइन फाइल संचालन में दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। धीरे-धीरे कर्मचारियों ने सिस्टम के अनुरूप काम करना सीख लिया और अब मंत्रालय की कार्यप्रणाली का बड़ा हिस्सा इसी व्यवस्था पर निर्भर है। मंत्रालय के बाद ई-ऑफिस व्यवस्था को विभागाध्यक्ष कार्यालयों और फिर प्रदेश के जिलों में भी लागू किया गया। हालांकि जिलों में अभी भी कई अधिकारी-कर्मचारी इस व्यवस्था के साथ पूरी तरह सहज नहीं हुए हैं।
सिस्टम फेल होने ने दिखाई डिजिटल निर्भरता
गुरुवार की तकनीकी खराबी ने यह भी दिखा दिया कि मंत्रालय का कामकाज अब डिजिटल फाइल सिस्टम पर कितना निर्भर हो चुका है। सामान्य स्थिति में कुछ मिनटों में ऑनलाइन आगे बढऩे वाली फाइल को सिस्टम बंद होने पर कर्मचारियों को भौतिक रूप से लेकर अधिकारियों के कमरों तक जाना पड़ा। एक फाइल में ही करीब तीन घंटे लगने का उदाहरण बताता है कि तकनीकी बाधा की स्थिति में पुरानी मैनुअल व्यवस्था कितनी समय लेने वाली साबित हो सकती है। ई-ऑफिस का उद्देश्य ही फाइलों को तेज, पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना है। ऐसे में सिस्टम के कई घंटे बंद रहने से विभागों में वैकल्पिक व्यवस्था और तकनीकी बैकअप की जरूरत भी सामने आई है।

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