2025 के प्रस्तावों में से 33 प्रतिशत जमीन पर उतरे

  • 50 लाख करोड़ के नए निवेश लक्ष्य से पहले पुराने प्रस्तावों की परीक्षा

    गौरव चौहान/भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश सरकार अब अगले ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट में बड़े निवेश लक्ष्य के साथ उतरने की तैयारी कर रही है, लेकिन इससे पहले पिछली जीआईएस में आए निवेश प्रस्तावों के क्रियान्वयन का आंकड़ा सामने रखा जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक जीआईएस-2025 में मिले निवेश प्रस्तावों और रीजनल कॉन्क्लेव व इंटरएक्टिव सेशन के प्रस्तावों में से करीब 10 लाख करोड़ रुपए के निवेश धरातल पर आ चुके हैं। इसे कुल प्रस्तावों का लगभग 33 प्रतिशत बताया जा रहा है। अब जनवरी में भोपाल के कोलार रोड स्थित सतगढ़ी औद्योगिक पार्क परिसर में प्रस्तावित जीआईएस के लिए 50 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए देश के प्रमुख औद्योगिक शहरों के अलावा विदेशों में भी निवेशक सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे।
    निवेश के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी जोर
    नई जीआईएस के लिए राजधानी में तैयारियां शुरू हो गई हैं। आयोजन स्थल तक पहुंच को बेहतर बनाने के लिए एयरपोर्ट से सतगढ़ी तक सडक़ों के सुधार और चौड़ीकरण की योजना है। सतगढ़ी में दो हजार से अधिक वाहनों की पार्किंग और तीन हेलीपैड बनाए जाने की तैयारी है।
    सरकार के लिए समिट सिर्फ निवेशकों को बुलाने तक सीमित नहीं रहेगा। राजधानी और आसपास के पर्यटन स्थलों को भी आयोजन की तैयारियों का हिस्सा बनाया जा रहा है। प्रमुख चौराहों, सार्वजनिक स्थलों, उद्यानों और शहर के प्रवेश द्वारों के सौंदर्यीकरण के साथ सांची, भीमबेटका और भोजपुर जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच मार्गों के रेस्टोरेशन और सौंदर्यीकरण की योजना है। इन सभी कार्यों पर करीब 200 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। अलग-अलग विभागों को इन कार्यों की जिम्मेदारी दी जाएगी।
    2025 में सबसे ज्यादा प्रस्ताव औद्योगिक नीति विभाग के हिस्से में
    जीआईएस-2025 में मिले निवेश प्रस्तावों में सबसे बड़ा हिस्सा औद्योगिक नीति एवं निवेश संवर्धन विभाग से जुड़े प्रस्तावों का रहा। विभाग के अनुसार इस क्षेत्र में 8.61 लाख करोड़ रुपए के प्रस्ताव मिले थे। इसके बाद नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 5.72 लाख करोड़ और खनन एवं खनिज संसाधन में 3.22 लाख करोड़ रुपए के प्रस्ताव बताए गए हैं। नगरीय विकास एवं आवास क्षेत्र में 1.97 लाख करोड़, ऊर्जा में 1.47 लाख करोड़ और लोक निर्माण विभाग से जुड़े क्षेत्रों में 1.30 लाख करोड़ रुपए के प्रस्ताव दर्ज किए गए। पर्यटन क्षेत्र में 68 हजार करोड़, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में 64 हजार करोड़ और तकनीकी शिक्षा व कौशल विकास में 43 हजार करोड़ रुपए के प्रस्ताव बताए गए हैं।
    सात क्षेत्रों पर रहेगा फोकस
    नई जीआईएस की थीम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सप्तधारा’ विजन के आधार पर तय की गई है। इसमें मैन्युफैक्चरिंग पावर, एग्रीकल्चर एवं फूड पावर, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन, गति शक्ति, डिफेंस पावर, ग्रीन एंड ब्लू इकोनॉमी और सॉफ्ट पावर को प्रमुख क्षेत्र बनाया गया है। मुख्य सचिव से लेकर उद्योग विभाग, एमपीआईडीसी और स्थानीय प्रशासन स्तर पर बैठकों का दौर शुरू हो गया है। पीएम कार्यालय से जनवरी की तारीख मिलने के बाद तैयारियों में तेजी आने की उम्मीद है।
    पुराने प्रस्तावों की जमीन पर स्थिति बनी रहेगी अहम
    सरकार की ओर से 33 प्रतिशत निवेश के धरातल पर आने का दावा ऐसे समय किया जा रहा है, जब आगामी समिट के लिए लक्ष्य पिछली बार से काफी बड़ा रखा गया है। अधिकारियों के मुताबिक कुछ निवेश प्रस्तावों में जमीन आवंटन हो चुका है, जबकि कुछ मामलों में निवेशकों के साथ एग्रीमेंट किया जा चुका है। ऐसे में जनवरी की जीआईएस में 50 लाख करोड़ रुपए के नए प्रस्ताव जुटाने के साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि पिछली समिट में घोषित निवेश में से कितने प्रोजेक्ट वास्तव में उत्पादन, निर्माण या संचालन की स्थिति तक पहुंचते हैं।

Related Articles