अफसर समय पर लंबित योजनाओं की नहीं दे पाए जानकारी

  • 2031 तक योजनाएं चलानी हैं, लेकिन विभागों ने नहीं भेजी पूरी रिपोर्ट

    भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम।  मध्यप्रदेश में 2031 तक जारी रखी जाने वाली कई महत्वपूर्ण योजनाओं को लेकर विभागीय स्तर पर तैयारी की धीमी रफ्तार अब वित्तीय प्रबंधन के लिए चुनौती बन रही है। वित्त विभाग ने योजनाओं की मौजूदा स्थिति, उपयोगिता, लाभार्थियों की संख्या और अगले पांच वर्षों में जरूरी बजट का आकलन कर रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन तय समयसीमा 30 सितंबर तक संबंधित विभाग पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं करा सके। अब वित्त विभाग ने विभागों को रिपोर्ट तैयार करने के लिए 31 दिसंबर तक का अतिरिक्त समय दिया है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही योजनाओं को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने के लिए बजट और कैबिनेट प्रस्ताव की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
    वित्त विभाग की प्रक्रिया के तहत संबंधित विभागों को यह बताना है कि उनकी योजनाओं का अब तक कितना क्रियान्वयन हुआ है और कितने लोगों को इसका लाभ मिला। साथ ही यह भी स्पष्ट करना होगा कि योजना से अपेक्षित परिणाम क्यों नहीं मिले और आगे इसे जारी रखने की आवश्यकता क्या है। विभागों को योजनाओं की उपयोगिता के साथ उनकी वित्तीय जरूरत का भी आकलन करना है। इसी आधार पर वित्त विभाग अगले पांच वर्षों के संभावित खर्च और बजट की जरूरत का परीक्षण करेगा। इसके बाद योजनाओं को 31 मार्च 2031 तक जारी रखने के लिए कैबिनेट के सामने प्रस्ताव लाया जाएगा। मंजूरी मिलने पर ही इनके लिए आगामी वर्षों का बजट सुनिश्चित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
    कई बड़ी योजनाएं रिपोर्ट के इंतजार में
    जानकारी के मुताबिक पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) से जुड़ी राज्य पूरक योजनाएं और ग्रामीण आजीविका मिशन इस प्रक्रिया में शामिल हैं। कृषि विभाग की मुख्यमंत्री कृषक मित्र योजना और फसल विस्तार कार्यक्रम का भी मूल्यांकन किया जाना है। स्वास्थ्य विभाग की मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के वित्त पोषित कार्यक्रम और कुछ जिला अस्पतालों के उन्नयन से जुड़े काम भी इसमें शामिल बताए जा रहे हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग की पोषण आहार योजनाओं तथा एकीकृत बाल विकास सेवाओं की अनुपूरक योजनाओं की जानकारी भी वित्त विभाग को भेजी जानी है। लोक निर्माण विभाग के राज्य सडक़ विकास कार्यक्रम, सेतु निर्माण और भवनों के रखरखाव से जुड़े कार्यों का भी वित्तीय आकलन किया जाना है।
    देरी का असर अगले बजट पर पड़ सकता है
    वित्त विभाग से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक योजनाओं को जारी रखने के लिए केवल उनकी वर्तमान स्थिति बताना पर्याप्त नहीं है। विभागों को अगले पांच वर्षों में संभावित खर्च और योजना से होने वाले लाभ का भी आकलन करना होगा। यदि यह प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं होती है तो योजनाओं के लिए आवश्यक बजट निर्धारण में दिक्कत आ सकती है। इसका असर आगामी बजट के साथ-साथ सरकार के पांच वर्षीय वित्तीय अनुमानों पर भी पड़ सकता है।
    नीति आयोग के दिशा-निर्देशों के आधार पर हो रहा मूल्यांकन
    वित्त विभाग के मुताबिक योजनाओं की निरंतरता और बजट आवंटन के लिए नीति आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार उनकी उपयोगिता और परिणामों का आकलन किया जाना जरूरी है। इसी आधार पर विभागों से योजनावार जानकारी मांगी गई है। उपमुख्यमंत्री एवं वित्त विभाग के मंत्री जगदीश देवड़ा के मुताबिक वित्तीय अनुशासन के लिए सभी विभागों को योजनाओं की निरंतरता से जुड़ी आवश्यक जानकारी देना अनिवार्य है। अब 31 दिसंबर तक विभागों को अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। इसके बाद वित्त विभाग यह तय करेगा कि किन योजनाओं को अगले पांच वर्षों के लिए जारी रखने की जरूरत है और उनके लिए कितने बजट की आवश्यकता होगी।

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