- कॉलोनाइजर कंपनी के निदेशक समेत पांच पर केस दर्ज

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
राजधानी के रायसेन रोड स्थित पॉश कॉलोनी पटेल नगर में सरकारी जमीन और स्कूल एवं पार्क के लिए रिजर्व प्लॉट्स में फर्जी दस्तावेजों के जरिए हेराफेरी कर करोड़ों के घोटाले का भंडाफोड़ हुआ है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए कॉलोनाइजर कंपनी गंधर्व लैंड एंड फाइनेंस प्रालि के निदेशक समेत 5 आरोपियों के खिलाफ नामजद एवं एक अन्य के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया है। जांच में पता चला है कि हथाईखेड़ा और खजूरी खुर्द के बीच लगभग 90 एकड़ जमीन पर पटेल नगर को बसाया गया था। कॉलोनी के मूल स्वीकृत ले-आउट और नक्शे में स्कूल, पार्क तथा अन्य सार्वजनिक उपयोग के लिए छोड़े गए प्लॉट नगर निगम के कब्जे में थे। 1962 के डायवर्जन आदेश और 1999 में नगर निगम के साथ हुए एग्रीमेंट में भी यह साफ था कि इस जमीन पर हमेशा नगर निगम का ही अधिकार रहेगा।
कॉलोनी का कुआं भी बेचा
इतना ही नहीं, जांच में यह भी खुलासा हुआ कि कॉलोनी में पानी की आपूर्ति के लिए बनाए गए तीन में से एक कुएं को भरकर उस जमीन को भी बेच दिया गया। कंपनी ने इसके अलावा कॉलोनी में सडक़, सीवर, नाली और पार्क जैसी सुविधाएं विकसित नहीं कीं, जिससे यहाँ के रहवासी लंबे समय से परेशान हैं। सरकारी जमीन की अवैध बिक्री की भनक लगते ही नगर निगम भोपाल ने सार्वजनिक सूचना प्रकाशित कर इसकी शिकायत ईओडब्ल्यू में की। छानबीन में मिले पुख्ता सबूतों और तथ्यों के आधार पर जांच एजेंसी ने कंपनी के निदेशक अनुज ग्रोवर, जय प्रताप सिंह यादव, अभिषेक आनंद, मनीष नायक और प्रेमानंद नायक समेत अन्य के खिलाफ बीएनएस की धारा 61(2), 229 (2), 316(5) एवं 318(2) के तहत गुरुवार को एफआईआर दर्ज कर ली है।
ननि ने पहले ही जताई थी आपत्ति
मामले की जानकारी मिलने के बाद नगर निगम भोपाल ने सार्वजनिक सूचना जारी कर इस जमीन की बिक्री पर आपत्ति दर्ज कराई थी। शासन स्तर पर हुई समीक्षा बैठक में भी कॉलोनाइजर के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। जांच में दोनों मामलों को मिलाकर करीब पांच करोड़ रुपये की सरकारी और आरक्षित संपत्ति की अवैध बिक्री के तथ्य सामने आए।
महिला का प्लॉट भी हड़पा
दूसरा मामला एक बुजुर्ग महिला के प्लॉट से जुड़ा है। इस महिला ने वर्ष 1978 में कॉलोनी में प्लॉट नंबर ई-12 की रकम का भुगतान कर दिया था, इसके बावजूद कॉलोनाइजर सडक़ और सीवर का काम अधूरा होने का बहाना बनाकर सालों तक उनकी रजिस्ट्री टालता रहा। जब महिला का परिवार उपभोक्ता आयोग गया, तो कंपनी के खिलाफ ब्याज समेत राशि लौटने का आदेश हुआ। परिवार पैसे के बजाय अपना प्लॉट पाना चाहता था, इसलिए सिविल केस दायर किया। इस दौरान कॉलोनाइजर ने उसी प्लॉट पर दो फर्जी दावेदार खड़े कर झूठा विवाद पैदा किया। इसके बाद, उन्हीं फर्जी दावेदारों के साथ समझौता दिखाकर वह प्लॉट मनीष नायक और प्रेमानंद नायक को 1.10 करोड़ रुपये में बेच दिया गया।
इस तरह हुआ फर्जीवाड़ा
यह कॉलोनी लगभग 50 साल पहले बसाई गई थी। इस कंपनी के पूर्व संचालक के निधन के बाद उनके बेटे अनुज ग्रोवर कंपनी के निदेशक बने और शिकायती मामलों के अनुसार वही इन घोटालों का मास्टरमाइंड है। ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया कि नियमों की पूरी जानकारी होने के बाद भी अनुज ग्रोवर ने स्कूल के लिए आरक्षित 1.212 एकड़ सरकारी जमीन को अपनी निजी संपत्ति बताकर 27 नवंबर 2024 को जय प्रताप सिंह यादव और अभिषेक आनंद को 3.90 करोड़ रुपये में बेच दी। हैरानी की बात यह है कि जिस जमीन पर बच्चों के लिए स्कूल बनना था, अब उस पर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनाने की तैयारी है। पड़ताल के अनुसार फर्जी दस्तावेजों के जरिए कॉलोनाइजर ने इस सरकारी जमीन को बेच दिया।
