भोपाल में निवेश समिट को देखते हुए बनेगी अलग कार्ययोजना

  • सिंहस्थ और इन्वेस्टर्स समिट से पहले भोपाल-उज्जैन का स्वच्छता मेकओवर

    भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम।  मध्यप्रदेश के भोपाल और उज्जैन में आने वाले बड़े आयोजनों को देखते हुए अब स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन का ढांचा नए सिरे से मजबूत करने की तैयारी है। केंद्र की प्रगति-50 पहल में शामिल इन शहरों को स्वच्छ आदर्श शहर के रूप में विकसित करने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाई जाएगी। खासतौर पर भोपाल में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और उज्जैन में 2028 के सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए स्वच्छता व्यवस्था को आयोजन-केंद्रित बनाने की तैयारी है। प्रगति-50 के तहत देश के 50 शहरों को शहरी स्वच्छता, सैनिटेशन और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में मॉडल के तौर पर विकसित किया जाना है। मध्यप्रदेश से भोपाल और उज्जैन का चयन किया गया है। बैठक में इंदौर को भी इन तीनों शहरों के समग्र विकास से जोड़ते हुए कार्ययोजना पर जोर दिया गया।
    सिंहस्थ-2028 को देखते हुए उज्जैन में स्वच्छता व्यवस्था को सामान्य शहर से अलग आयोजन आधारित मॉडल में विकसित करने की तैयारी है। घाटों, सार्वजनिक शौचालयों, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन और भीड़ के दौरान स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। क्षिप्रा नदी की स्वच्छता और उपयोग किए गए जल के प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान रहेगा। इसके लिए पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप समन्वित योजना तैयार की जाएगी। सिंहस्थ के दौरान जीरो-वेस्ट इवेंट और सर्कुलर सैनिटेशन मैनेजमेंट लागू करने की दिशा में काम होगा।
    भोपाल में निवेशकों के सामने स्वच्छ शहर की तस्वीर
    भोपाल के लिए 2027 में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट को स्वच्छता योजना से जोड़ा गया है। शहर को स्वच्छ, हरित और निवेश-अनुकूल महानगर के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत कचरा संभावित स्थलों को खत्म करने, सार्वजनिक स्थलों के कायाकल्प, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, उपयोग किए गए जल के पुन: उपयोग और सार्वजनिक स्वच्छता पर काम किया जाएगा। शहर के प्रमुख हिस्सों में दृश्य स्वच्छता और सौंदर्यीकरण को भी प्राथमिकता दी जाएगी। नई योजना में केवल कचरा उठाने और उसका निपटारा करने के बजाय उससे आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने पर जोर रहेगा। स्रोत पर कचरा पृथक्करण, घर-घर संग्रहण, एमआरएफ सेंटर, कम्पोस्टिंग और वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रसंस्करण को मजबूत किया जाएगा। वेस्ट-टू-वेल्थ और सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल के जरिए कचरे के पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग को बढ़ावा देने की योजना है। पीपीपी मॉडल के जरिए निजी क्षेत्र को भी इन परियोजनाओं से जोडऩे की तैयारी है। स्वच्छता क्षेत्र में तकनीकी समाधान और नए कारोबार को बढ़ावा देने के लिए चयनित स्टार्टअप को शुरुआती स्तर पर 20 लाख रुपए तक की वित्तीय सहायता देने की पहल पर काम किया जाएगा। आईआईटी कानपुर के सहयोग से कचरा प्रबंधन, रिसाइक्लिंग, सर्कुलर इकोनॉमी और तकनीकी नवाचार से जुड़े स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने की योजना है। युवाओं को स्वच्छता अभियानों से जोडऩे और उन्हें स्वच्छता लीडर के रूप में विकसित करने पर भी जोर रहेगा।
    मिशन मोड में निगरानी…
    प्रगति-50 के तहत शहरों में सिर्फ नए काम शुरू करने के बजाय उनके परिणामों की निगरानी पर भी जोर रहेगा। समयबद्ध लक्ष्य तय कर कचरा मुक्त और धूल मुक्त शहर की दिशा में काम किया जाएगा। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कहा कि मध्यप्रदेश प्रगति-50 के लिए संकल्पित होकर काम करेगा। उनके मुताबिक इंदौर, भोपाल और उज्जैन की विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर इन शहरों के विकास को गति दी जाएगी। अब प्रगति-50 के तहत सबसे बड़ी चुनौती इन योजनाओं को कागज से जमीन पर उतारने की होगी। भोपाल के सामने निवेशकों के बड़े आयोजन से पहले शहर की स्वच्छता व्यवस्था सुधारने का लक्ष्य है।

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