देश का पहला 1950 मेगावाट का हाइड्रो प्रोजेक्ट बनकर लगभग तैयार, दिसंबर में होगा शुरू

हाइड्रो प्रोजेक्ट
  • कुल 11,500 करोड़ रुपए की लागत से बनाया गया
    भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मप्र में देश का पहला हाइड्रो पावर स्टेशन शुरू होने जा रहा है। इससे रात के समय करीब 1950 मेगावाट बिजली पैदा होगी। इसे कुल 11,500 करोड़ रुपए की लागत से बनाया गया है। यह एशिया का तीसरा ऐसा प्रोजेक्ट है, जिसे दिन के समय सौर ऊर्जा से पंपों को चलाकर 31 मीटर टापू पर बने विशाल इंटरवेल (तालाब) में पानी भरा जाएगा, इसके बाद रात के समय हाइड्रो टरबाइन पर पानी छोडक़र इसे चलाया जाएगा। इससे उत्पादित बिजली काफी महंगी लगभग 10 रुपए प्रति यूनिट के आसपास बेची जा सकती है। इससे सरकार को काफी लाभ होगा। देश के इस पहले हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट को लेकर गांधी सागर में पहली बार 18 नवंबर को विशेष कैबिनेट की बैठक होने जा रही है। इस बैठक में हाइड्रो पावर से जुड़े कई निर्णय लिए जाएंगे।  इसमें मुख्यमंत्री डॉ. यादव हाइड्रो प्रोजेक्ट के साथ ही साथ अन्य मुद्दों पर मंत्रियों को ब्रीफिंग में जानकारी देंगे। इस बैठक को लेकर गांधी सागर में बड़े पैमाने पर तैयारियां की जा रही हैं। दरअसल, हाल में ही देशव्यापी बिजली संकट शुरू हुआ था। इस दौरान कई राज्यों ने पीक ऑवर में करीब 30 रुपए यूनिट तक बिजली सरप्लस वाले राज्यों से खरीदी। ऐसे में यह प्रोजेक्ट देश में पहला ऐसा प्रोजेक्ट होगा, जो मील का पत्थर साबित होगा। बता दें कि ऊंचे पहाड़ी पर बने इनटेल में 66 एमसीएम पानी इकट्ठा करने की क्षमता है। जबकि अपर रिजरवायर का घेरा करीब 6 किमी का है। इस प्रोजेक्ट का 80 फीसदी कार्य पूरा हो चुका है। इसके ऊपरी जलाशय में 6.8 क्यूबिक मीटर पानी इकट्ठा होता है। वहां से पानी छोड़ने पर रात के समय जब बिजली की सबसे अधिक जरूरत होती है तो एक साथ सभी 9 टरबाइन पूरी क्षमता के साथ बिजली का उत्पादन करते हैं।
    काफी सस्ती बिजली का उत्पादन होगा
    आज भी हाइडल प्रोजेक्ट की बिजली सबसे सस्ती मानी जाती है। सौर ऊर्जा की बिजली मेंटेनेंस खर्च व अन्य उपकरणों की वजह से अपेक्षाकृत पन बिजली से महंगी होती है। ऐसे में यह प्रोजेक्ट काफी सस्ती बिजली पैदा कर सकेगा। गांधी सागर हाइड्रो प्रोजेक्ट की खासियत यह है कि इसमें पहाड़ी के नीचे से कुल 9 टरबाइन को एक दूसरे के नीचे स्थापित किया गया है। पानी को जैसे ही नीचे की तरफ छोड़ा जाता है तो बारी-बारी से वह नीचे की तरफ लगे टरबाइन को घुमाता है। इससे बिजली का उत्पादन शुरू हो जाता है।

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