
-तीन महीने से मंत्री की मंजूरी का इंतजार, प्रशासनिक ढांचा तैयार होने के बावजूद शुरू नहीं हो पा रही नियुक्तियां
-भोपाल और उज्जैन-इंदौर के बाद ग्वालियर-जबलपुर में भी बननी है अथॉरिटी
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश में बड़े शहरों को महानगरीय क्षेत्र के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत ही प्रशासनिक अड़चन में उलझ गई है। भोपाल और उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया अधिसूचित होने के बाद अब इनके लिए अलग विकास प्राधिकरण गठित करने की तैयारी है, लेकिन प्राधिकरण का प्रशासनिक ढांचा मंजूर नहीं होने से आगे की प्रक्रिया अटक गई है। इसका सीधा असर करीब 300 पदों पर होने वाली नियुक्तियों पर पड़ रहा है।
नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी के लिए पूरा प्रशासनिक सेटअप तैयार कर लिया है। इसे च्महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण के लिए पदों की संरचनाज् नाम दिया गया है। प्रस्ताव जुलाई में ही नगरीय विकास एवं आवास मंत्री के पास भेजा जा चुका है, लेकिन अब तक मंजूरी नहीं मिली है। मंत्री स्तर से स्वीकृति मिलने के बाद प्रस्ताव वरिष्ठ सचिव समिति और फिर कैबिनेट में जाएगा। यानी प्राधिकरण के गठन से लेकर नियुक्तियों तक अभी कई प्रशासनिक पड़ाव बाकी हैं।
एक मॉडल, कई महानगरों में लागू होगा ढांचा
विभाग ने प्राधिकरण के लिए जो सेटअप तैयार किया है, उसे आदर्श मॉडल के रूप में विकसित किया गया है। भविष्य में प्रदेश के दूसरे महानगरों में भी इसी प्रशासनिक संरचना को लागू किया जाएगा। प्रस्तावित ढांचे में आयुक्त सर्वोच्च पद होगा। इस पर सचिव स्तर के आईएएस अधिकारी की नियुक्ति का प्रावधान है। प्राधिकरण में करीब 300 पद रखे गए हैं। जरूरत के हिसाब से इन पर सीधी भर्ती, प्रतिनियुक्ति, पदोन्नति और आउटसोर्सिंग के जरिए नियुक्तियां की जाएंगी। प्रशासनिक, वित्त एवं लेखा, तकनीकी और नियोजन जैसी महत्वपूर्ण शाखाएं भी बनाई जाएंगी। इनका उद्देश्य महानगरीय क्षेत्रों में विकास योजनाओं को एकीकृत तरीके से लागू करना है।
छह जिलों के 5270 गांव भोपाल रीजन में
भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया में भोपाल, सीहोर, विदिशा, रायसेन, राजगढ़ और नर्मदापुरम जिलों के 5270 गांव शामिल किए गए हैं। इसका कुल क्षेत्रफल 15,095 वर्ग किलोमीटर निर्धारित किया गया है। वहीं उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया का क्षेत्रफल करीब 16 हजार वर्ग किलोमीटर है। इसमें इंदौर, उज्जैन, देवास, धार, शाजापुर और रतलाम जिलों की 38 तहसीलों के 2781 गांव शामिल हैं। दोनों महानगरीय क्षेत्रों का दायरा अधिसूचित होने के बाद अब इनके लिए नियोजन और विकास की संस्थागत व्यवस्था खड़ी करने की जरूरत है।
ग्वालियर-जबलपुर की तैयारी भी शुरू
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल और इंदौर के साथ ग्वालियर और जबलपुर को भी मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने की घोषणा की है। इन दोनों शहरों के लिए भी शुरुआती तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। सरकार का उद्देश्य बड़े शहरी क्षेत्रों में नगर निगम, नगर पालिका और अन्य स्थानीय निकायों के बीच समन्वय स्थापित कर क्षेत्रीय स्तर पर विकास योजनाएं लागू करना है। गौरतलब है कि 20 मई 2025 को कैबिनेट ने एमपी मेट्रोपॉलिटन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट-2025 को मंजूरी दी थी। विधानसभा के मानसून सत्र में 5 अगस्त को विधेयक पारित हुआ। इसके बाद भोपाल और उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया अधिसूचित किए गए। अब कानून को जमीन पर उतारने के लिए जिस प्रशासनिक तंत्र की जरूरत है, उसकी मंजूरी ही लंबित है। ऐसे में महानगरों के सुनियोजित विकास की अगली कड़ी फिलहाल फाइलों में अटकी हुई है।
