
-युवाओं को साधने निकली भाजपा में युवा नेतृत्व पर ही पेच
गौरव चौहान/भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। कांग्रेस के छात्र और युवा अभियानों की बढ़ती सक्रियता ने प्रदेश भाजपा संगठन को भी नई रणनीति बनाने के लिए मजबूर कर दिया है। पार्टी अब जेन-जी और कॉलेजों के युवाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है, लेकिन इस मुहिम के सामने सबसे बड़ी चुनौती एक ऐसे युवा चेहरे की तलाश है, जो छात्रों को केवल संगठन से जोडऩे के बजाय उन्हें पार्टी की विचारधारा से भी प्रभावित कर सके। दिलचस्प यह है कि युवाओं को जोडऩे की तैयारी कर रही भाजपा अपने संगठन में ही युवा नेतृत्व को लेकर अब तक किसी एक नाम पर सहमति नहीं बना पाई है।
पार्टी ने इसके लिए लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ अभियान को माध्यम बनाने की तैयारी की है। इसके जरिए युवाओं और विद्यार्थियों के बीच कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें पार्टी की विचारधारा से जोडऩे की योजना है। दिल्ली में जेन-जी आंदोलन और राहुल गांधी के छात्रों की गूंज कार्यक्रम में युवाओं की भागीदारी को देखते हुए भाजपा इसे राजनीतिक चुनौती के रूप में देख रही है। संगठन चाहता है कि अभियान के लिए ऐसा चेहरा सामने आए, जिसकी अपनी पहचान हो और जिसके नाम पर युवा स्वत: कार्यक्रमों से जुड़ें।
नेताओं ने सुझाए नाम, लेकिन नहीं बनी सहमति
युवा चेहरे की तलाश को लेकर पिछले दिनों भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के बीच चर्चा भी हुई। इसमें कुछ विधायक वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए। बैठक में कुछ नामों के सुझाव आए, लेकिन वरिष्ठ नेताओं के बीच किसी एक नाम पर सहमति नहीं बन सकी। नेताओं का मानना है कि केवल संगठनात्मक पद या राजनीतिक पहचान के आधार पर युवाओं को आकर्षित नहीं किया जा सकता। इसके लिए ऐसा चेहरा चाहिए, जिसकी बातों और व्यक्तित्व का जेन-जी पर प्रभाव हो।
अटकी संगठन की रफ्तार
युवाओं को जोडऩे की रणनीति के बीच भाजपा की दूसरी परेशानी संगठनात्मक नियुक्तियां हैं। प्रदेश से लेकर जिला और मंडल स्तर तक कई पद लंबे समय से खाली हैं। पार्टी के नए प्रदेश प्रभारी बिप्लब कुमार देव ने अपने पहले भोपाल दौरे में 30 अक्टूबर तक नियुक्तियां पूरी करने का लक्ष्य दिया था, लेकिन तय समयसीमा के बाद भी स्थिति में खास बदलाव नहीं आया। सूत्रों के मुताबिक, नियुक्तियों में देरी की बड़ी वजह स्थानीय नेताओं के बीच तालमेल की कमी और अपने समर्थकों को पद दिलाने की कोशिशें हैं। वरिष्ठ नेताओं, कुछ मंत्रियों और सांसदों के बीच भी कई नियुक्तियों को लेकर एक राय नहीं बन पा रही है। युवा मोर्चा की स्थिति भी चुनौतीपूर्ण है। प्रदेश के 13 जिलों में अब तक अध्यक्षों की नियुक्ति नहीं हो सकी है। वहीं, कुछ जिलों में विवादित कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दिए जाने के बाद विरोध के स्वर भी उठ रहे हैं।
दीपावली बाद संगठन की बड़ी बैठक पर नजर
इन लंबित मामलों को सुलझाने के लिए दीपावली के बाद भोपाल में संगठन की बड़ी बैठक प्रस्तावित है। इसमें प्रदेश, जिला और मंडल स्तर पर रिक्त पदों के साथ मोर्चा-प्रकोष्ठों की नियुक्तियों पर विचार होगा। इसके बाद कोर ग्रुप की बैठक में अंतिम निर्णय लिए जाने की संभावना है।
निगम-मंडलों में भी राजनीतिक नियुक्तियों की तैयारी
संगठनात्मक नियुक्तियों के साथ निगम, मंडल, प्राधिकरण और आयोगों में खाली पदों को भरने का मुद्दा भी बैठक के एजेंडे में रहेगा। माना जा रहा है कि संगठन की सहमति के बाद राज्य सरकार राजनीतिक नियुक्तियों की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी। इसके लिए संभावित नामों की सूची नए सिरे से तैयार किए जाने की चर्चा है। कुल मिलाकर भाजपा के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ कांग्रेस के युवा अभियानों का राजनीतिक जवाब देने के लिए जेन-जी में लोकप्रिय चेहरा चाहिए, तो दूसरी तरफ संगठन के भीतर पदों को लेकर चल रही खींचतान खत्म करनी है। युवाओं को जोडऩे की मुहिम कितनी आगे बढ़ेगी, यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि पार्टी पहले अपने भीतर सहमति का चेहरा तलाश पाती है या नहीं।
