अब स्टेट हाईवे होंगे… गोवंश मुक्त!

  • सडक़ किनारे बनेंगी गोशालाएं, हर 5 किमी पर शेड-चबूतरे
  • गौरव चौहान
गोवंश मुक्त

मध्य प्रदेश में सडक़ों पर घूमते और बैठते गोवंश के कारण होने वाली दुर्घटनाओं पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। मध्य प्रदेश सडक़ विकास निगम ने गोवंश प्रबंधन के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार कर ली है, जिसे शासन की मंजूरी मिलते ही लागू किया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत स्टेट हाईवे के किनारे गोवंश के लिए टीन शेड वाली गोशालाएं, चबूतरे और रेस्क्यू व्यवस्था विकसित की जाएगी। खास बात यह है कि सडक़ बनाने वाली एजेंसी को ही इन व्यवस्थाओं का निर्माण और संचालन सुनिश्चित करना होगा।
सरकार का मानना है कि यदि गोवंश को सडक़ से हटाकर सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराया जाए तो सडक़ दुर्घटनाओं में कमी आने के साथ पशुओं की भी जान बचाई जा सकेगी। प्रदेश में विशेषकर बारिश के मौसम में सडक़ें आसपास की जमीन की तुलना में जल्दी सूख जाती हैं। इसी कारण बड़ी संख्या में गोवंश सडक़ पर बैठ जाते हैं। तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आने से हर साल बड़ी संख्या में पशुओं और वाहन सवारों की मौत या गंभीर चोट की घटनाएं सामने आती हैं। इसी समस्या के स्थायी समाधान के लिए एमपीआरडीसी ने नई कार्ययोजना तैयार की है।
एसओपी में क्या-क्या
नई एसओपी के तहत स्टेट हाईवे पर कई नई व्यवस्थाएं प्रस्तावित हैं, जिनमें हर पांच किलोमीटर पर गोशाला बनाना। इसके तहत स्टेट हाईवे के किनारे टीन शेड वाले बाड़े बनाए जाएंगे। जिसमें बेसहारा गोवंश को यहां रखा जाएगा। वहीं सडक़ किनारे गोवंश के बैठने के लिए अलग चबूतरे तैयार किए जाएंगे। उद्देश्य यह है कि पशु सडक़ की बजाय इन स्थानों पर बैठें। प्रत्येक क्षेत्र में बड़ा रेस्क्यू वाहन रहेगा। जिसमें सडक़ पर मिले गोवंश को पकडकऱ सुरक्षित गोशाला तक पहुंचाया जाएगा। सडक़ बनाने वाली कंपनी ही गोशाला और अन्य व्यवस्थाएं विकसित करेगी। स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय कर बेसहारा पशुओं का प्रबंधन करेगी। भविष्य में बनने वाली नई सडक़ों के टेंडर में इन व्यवस्थाओं को अनिवार्य शर्त बनाया जाएगा। यदि प्रस्तावित एसओपी को मंजूरी मिलती है तो मध्य प्रदेश में पहली बार सडक़ निर्माण परियोजनाओं के साथ गोवंश प्रबंधन को भी संस्थागत रूप से जोड़ा जाएगा। इससे सडक़ सुरक्षा, पशु संरक्षण और हाईवे प्रबंधन—तीनों क्षेत्रों में एक साथ सुधार की उम्मीद की जा रही है।
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद बनी योजना
गोवंश से जुड़ी दुर्घटनाओं का मुद्दा कई बार विधानसभा में उठ चुका है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने सडक़ सुरक्षा और गोवंश संरक्षण को लेकर चिंता जताई थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को इस संबंध में स्थायी व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद एमपीआरडीसी ने एसओपी तैयार की। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय सहित कई मंत्रियों और विधायकों ने भी सडक़ों पर गोवंश की सुरक्षा के लिए अलग व्यवस्था विकसित करने का सुझाव दिया था।
सबसे बड़ी चुनौती नेशनल हाईवे
हालांकि सबसे अधिक दुर्घटनाएं राष्ट्रीय राजमार्गों पर होती हैं। एनएचएआई के अनुसार टोल प्लाजा पर काऊ कैचिंग व्हीकल उपलब्ध हैं। जिला प्रशासन के साथ संयुक्त रेस्क्यू दल काम कर रहा है। लगभग 60 किलोमीटर के दायरे में वाहन दिन में दो और रात में दो बार गश्त करते हैं। सडक़ पर मिले गोवंश को पकडकऱ नजदीकी गोशाला में छोड़ा जाता है। रायसेन, नर्मदापुरम, गुना सहित कई जिलों में गोवंश की गर्दन और सींगों पर रेडियम स्ट्रिप या रिफ्लेक्टिव सामग्री लगाई जा रही है, ताकि रात में वाहन चालक दूर से ही पशुओं को देख सकें और समय रहते वाहन की गति कम कर सकें।
नई व्यवस्था कितनी कारगर होगी?
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल गोशाला बना देना पर्याप्त नहीं होगा। सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि बेसहारा गोवंश को नियमित रूप से वहां पहुंचाया जाए। गोशालाओं में चारा, पानी और देखभाल की पर्याप्त व्यवस्था हो। स्थानीय निकाय, पशुपालन विभाग और सडक़ निर्माण एजेंसियां समन्वय से काम करें। निर्माण के बाद भी रखरखाव के लिए स्पष्ट जिम्मेदारी तय हो। यदि इन पहलुओं पर प्रभावी अमल हुआ तो दुर्घटनाओं में कमी आने के साथ गोवंश संरक्षण को भी मजबूती मिल सकती है। एमपीआरडीसी के प्रबंध संचालक भरत यादव के अनुसार, नगरीय विकास एवं आवास विभाग की अपनी एसओपी पहले से लागू है। अब स्टेट हाईवे के लिए अलग एसओपी तैयार की गई है। शुरुआती चरण में कुछ नई सडक़ों पर प्रयोग के तौर पर गोशालाएं बनाई जाएंगी। इनके परिणामों का मूल्यांकन करने के बाद आगे इसे व्यापक स्तर पर लागू करने पर निर्णय लिया जाएगा।

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