
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश ने निवेश के अधिकतम प्रस्तावों को जमीन पर उतारने और निवेशकों को आने वाली परेशानियों को खत्म करने के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट बनाने का फैसला लिया है। सरकार आगामी जनवरी में इसे ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) 2027 में लाने की तैयारी कर रही है, जो भोपाल में आयोजित होगी। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट के जरिए उद्योगों को मिलने वाली तमाम मंजूरियों और कानूनी औपचारिकताओं को अब बेहद आसान बनाने की योजना है। इस नए कानून का मकसद निवेशकों को ऐसा माहौल देना है, जहां उन्हें काम शुरू करने के लिए फाइलें लेकर सरकारी अफसरों और दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। इसके साथ ही इस एक्ट में यह प्रावधान होंगे कि समय-सीमा के भीतर ही मंजूरी देने की गारंटी भी निवेशकों को मिलेगी।कोल गैसीफिकेशन पॉलिसीइसके साथ ही केंद्र सरकार की तर्ज पर मध्य प्रदेश अपनी कोल गैसीफिकेशन पॉलिसी भी तैयार कर रहा है। इससे कोयले के इस्तेमाल को पर्यावरण के के अनुकूल बनाया जाएगा, जिससे एलएनजी, यूरिया और अमोनिया जैसे रसायनों के आयात पर निर्भरता कम होगी। साथ ही, स्थानीय उत्पादों को ग्लोबल स्तर पर पहुंचाने के लिए वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट और जीआई टैग वाली पॉलिसी को भी नया रूप दिया जा रहा है। इससे सरकार को उम्मीद है कि हर जिले का कम से कम एक उत्पाद बाजार में अपनी धाक जमा सकेगा। पिछले साल भोपाल में हुई समिट में 18 नई नीतियां लागू करने के बाद सरकार इस बार भी कई सेक्टर-स्पेसिफिक पॉलिसी जीआईएस में लाएगी। फिलहाल, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए अलग-अलग सेक्टर के एक्सपर्ट से भी राय ली जा रही है।छोटे व मध्यम उद्योगों को राहतमप्र औद्योगिक विकास निगम (एमपीआईडीसी) के मुताबिक इस प्रस्तावित कानून के तहत छोटे और मध्यम उद्योगों (व्हाइट और ऑरेंज कैटेगरी) को बड़ी राहत मिलेगी। ये उद्योग अब सेल्फ-डिक्लेरेशन यानी खुद घोषणापत्र देकर अपनी शुरुआती औपचारिकताएं पूरी कर सकेंगे, जिससे काम जल्द शुरू हो सकेगा। हालांकि, च्यादा प्रदूषण फैलाने वाली रेड कैटेगरी की इंडस्ट्रीज के लिए जांच-पड़ताल और सरकारी मंजूरी का नियम पहले की तरह बना रहेगा, ताकि पर्यावरण से कोई समझौता न हो। जीआईएस के दौरान सरकार औद्योगिक क्षेत्रों के कर्मचारियों और मजदूरों की आवासीय समस्याओं को सुलझाने के लिए एक खास हाउसिंग पॉलिसी भी लाएगी। इसके तहत हर औद्योगिक क्षेत्र में कर्मचारियों के रहने के लिए जमीन अलग से तय की जाएगी, ताकि उन्हें वर्कप्लेस के नजदीक ही बेहतर आवास के साथ स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाएं मिल सकें। हाल ही में भोपाल के श्यामा प्रसाद मुखर्जी इंडस्ट्रियल एरिया सतगढ़ी से इसकी शुरुआत भी हो गई है।असम और पंजाब में आ चुका एक्टपंजाब और चंडीगढ़ में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट से मिलता-जुलता राइट टू बिजनेस एक्ट, 2020 लागू किया जा चुका है। वहां इसके जरिए नए निवेशकों के प्रस्तावों को समय-सीमा के भीतर डिजिटल मंजूरी मिलती है। इसे हाल ही में चंडीगढ़ में भी लागू किया गया है। इसके अलावा असम सरकार ने भी ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और एमएसएमई यूनिट्स की स्थापना के लिए फैसिलिटेशन बिल को मंजूरी दी है। असम में बिना पूर्व सरकारी अनुमति के शुरुआती काम किया जा सकता है। प्रदेश सरकार नए एक्ट को लागू करने के लिए अन्य राज्यों की उद्योग नीतियों का भी अध्ययन कर रही है।
