
- पीथमपुर में 272 करोड़ की नई यूनिट का भूमि-पूजन, सीएम बोले-
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने धार जिले के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में लियुगोंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की 272 करोड़ रुपये की नई विनिर्माण इकाई का भूमि-पूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पीथमपुर प्रदेश की औद्योगिक ताकत का प्रमुख केंद्र बन चुका है और यहां लगातार हो रहा निवेश मध्य प्रदेश को देश के बड़े औद्योगिक राज्यों की कतार में खड़ा कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार उद्योगों के लिए बेहतर माहौल तैयार कर रही है। इसका उद्देश्य निवेश बढ़ाना, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करना और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया और मेक फॉर द वल्र्ड के विजन को आगे बढ़ाने में यह नई यूनिट महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि पीथमपुर की औद्योगिक बेल्ट प्रदेश के विकास का ग्रोथ इंजन बन चुकी है। यहां स्थापित होने वाले नए उद्योग स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के साथ प्रदेश में आधुनिक विनिर्माण को भी बढ़ावा देंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार केवल निवेश समझौतों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारने का काम भी कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस वर्ष की शुरुआत से अब तक मध्य प्रदेश को 76,862 करोड़ रुपये से अधिक के नए निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिनसे करीब 82 हजार लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। उन्होंने कहा कि राजधानी में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के बाद प्रदेश में निवेश की गति लगातार बढ़ी है और कई बड़े उद्योग अपनी परियोजनाएं शुरू कर चुके हैं। उन्होंने पिछले कुछ दिनों में शुरू हुई औद्योगिक परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, 6 जुलाई को भोपाल के सतगढ़ी में 150 करोड़ रुपये के स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क का भूमि-पूजन हुआ। 5 जुलाई को शिवपुरी में 2,500 करोड़ रुपये की डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की आधारशिला रखी गई।
इसका लाभ युवाओं और किसानों को मिलेगा
उन्होंने कहा कि प्रदेश में उद्योग, कृषि और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में लगातार काम हो रहा है और इसका लाभ आने वाले वर्षों में प्रदेश के युवाओं और किसानों को मिलेगा। कार्यक्रम में कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि लियुगोंग इंडिया वर्ष 2009 से पीथमपुर में कार्यरत है। नई यूनिट शुरू होने के बाद कंपनी की निर्माण क्षमता 3,250 मशीनों से बढक़र 7,500 मशीन प्रतिवर्ष हो जाएगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा और मध्य प्रदेश निर्माण उपकरणों के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरेगा।
