
- ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल को सौंपी जाएगी चार माह पुराने प्रकरणों की जांच
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर जैसे बड़े शहरों समेत पूरे प्रदेश में रोजाना नाबालिग बच्चियां लापता हो रही हैं। बच्चियों के तेजी से लापता होने ने पुलिस मुख्यालय के अफसरों की पेशानी पर बल डाल दिए हैं। पीएचक्यू ने इसे गंभीरता से लिया है। पुलिस ऐसे मामलों में मानव तस्करी की आशंका भी जता रही है। हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बच्चियों की बरामदगी के बाद ही स्पष्ट होगा कि मानव तस्करी का मामला है या फिर कुछ और। फिर भी 4 माह पुराने ऐसे मामले जिसमें पुलिस ने गुमशुदगी या अपहरण का प्रकरण दर्ज किया है और बच्चियां अभी तक नहीं मिली है। ऐसे मामलों को एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल को सौंपा जाएगा। सभी महिला थाने को एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल घोषित गया है। महिला थाना प्रभारी इस तरह के मामलों की विवेचना करेगी। वहीं बच्चियों की बरामदगी का जिम्मा भी उन्हीं पर है। बरामदगी के बाद मानव तस्करी का खुलासा होने के बाद आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। एक रिपोर्ट के मुताबिक विगत 4 साल में एमपी में 47 हजार बच्चियां गायब हुई हैं।
अधिकांश मामलों में पुलिस ने बच्चियों को बरामद भी कर लिया। कई ऐसे मामले भी सामने आए जिसमें किडनेपिंग के केस में पाकिस्तान और नेपाल बार्डर के नजदीक तक दबिश देकर पुलिस बच्चियों को बरामद कर लाई। पुलिस मुख्यालय की महिला सुरक्षा शाखा द्वारा पिछले साल मुस्कान विशेष अभियान 1 नवम्बर से 30 नवम्बर तक पूरे प्रदेश में संचालित किया गया। अभियान के अंतर्गत माह नवंबर में 1 हजार 903 लापता बालिकाओं को सकुशल बरामद किया गया था। पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में मानव तस्करी के मामलों का ग्राफ काफी कम है, फिर भी पुलिस इस तरह के अपराधों को लेकर गंभीर है। गुमशुदगी के मामलों में मानव तस्करी की आशंका होने पर पुलिस प्राथमिकता से ऐसे मामलों का इन्वेस्टीगेशन कर रही है।
देह व्यापार समेत कार्य श्रेणी
मानव तस्कर निरोधी इकाई यानी महिला थाना के पास मानव तस्करी से जुड़े अपराधों, महिलाओं और बच्चों को यौन शोषण, जबरन श्रम या अवैध गोद लेने के लिए बेचे जाने वाले संगठित गिरोहों के खुलासे की जिम्मेदारी है। पूर्व में जिलों में जब पृथक रूप से यह यूनिट ग्रामीण और संवेदनशील क्षेत्रों में काम कर रही थी उस दौरान मानव तस्करी के खतरों और कानूनी प्रावधानों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए कार्यशालाएं और अभियान आयोजित किए। इसके अलावा अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय के माध्यम से यह इकाई गैर-सरकारी संगठनों और पडोसी राज्यों की पुलिस के साथ मिलकर भी काम कर रही है ताकि अंतरराज्यीय तस्करी के रैकेट पर भी कार्रवाई की जा सके। हालांकि मानव तस्करी के मामलों का खुलासा अधिकतर पीडि़त के रेस्क्यू होने के बाद पता चलता है। मानव तस्करी के अपराध में बच्चियों को देह व्यापार समेत अन्य कामों के लिए बेचना शामिल है। इसके अलावा नाबालिग को भीख मंगवाने और अवैध रूप से श्रम कार्यों में संलिप्त कर भी मानव तस्करी की श्रेणी में है।
इनका कहना है
प्रदेश के सभी महिला थानों को एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल की जिम्मेदारी सौंपी गई है। 4 माह पुराने प्रकरण जिसमें बच्चियों की गुमशुदगी दर्ज हैं और उनका कोई सुराग नहीं लगा। इस तरह के मामलों की जांच महिला थाना पुलिस करेगी। बच्चियों की बरामदगी के बाद ही स्पष्ट होगा कि मानव तस्करी का मामला है या फिर नाबालिग किसी दूसरे कारणों से गायब हुई है।
बीना सिंह, सहायक पुलिस महानिरीक्षक, महिला सुरक्षा शाखा, पीएचक्यू
