बढ़ी सुविधाएं…तीन साल बाद पीएमश्री और नए कॉलेजों को मिले सहायक प्राध्यापक

सहायक प्राध्यापक
  • केमिस्ट्री के 154 सहायक प्राध्यापक पदस्थ, भोपाल को मिले पांच

    भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। पीएमश्री का दर्जा मिलने के बाद आट्र्स व कॉमर्स कॉलेजों में तीन साल से बिना प्रोफेसर्स के ही चल रहे विज्ञान संकार्यों की ओर शासन का ध्यान चला गया है। लंबे इंतजार के बाद पीएमश्री कॉलेजों में रसायन शास्त्र केमिस्ट्री के सहायक प्राध्यापकों की पदस्थापना की गई है। नव चयनित 154 सहायक प्राध्यापकों को पहली पदस्थापना में पीएमश्री के अलावा ऐसे कॉलेजों को विभाग ने तवज्जो दी है, जो बीते सालों में मुख्यमंत्री की घोषणा पर शुरू किए गए हैं। केमिस्टी के पांच सहायक प्राध्यापक भोपाल के कालेजों को मिले हैं। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा 2022 में हुई भर्ती परीक्षा के आधार पर केमिस्ट्री के 154 सहायक प्राध्यापकों की पदस्थापना कर दी है। पदस्थापना आदेश जारी होने से जहां चार सालों से चक्कर काट रहे इन सहायक प्राध्यापकों को राहत मिली है। वहीं करीब एक सैकड़ा सरकारी कॉलेजों के प्राचार्य के चेहरों से भी तनाव की लकीरें कम हो गई हैं। खासकर नए स्नातक और पीएमश्री कॉलेजों के प्राचार्य काफी दुविधा में थे। राज्य शासन ने कई जिलों में आट्र्स और कॉमर्स कॉलेजों को भी पीएमश्री कॉलेज का दर्जा दे दिया था। इन कॉलेजों में विज्ञान संकाय भी तत्काल खोल दिए गए थे। मगर तीन साल पहले प्रथम वर्ष में प्रवेश लेने वाले छात्र अंतिम वर्ष तक पहुंच गए, लेकिन उन्हें नियमित प्राध्यापक आज तक नहीं मिल सके थे। इनमें भोपाल का हमीदिया कॉलेज भी शामिल है। हमीदिया में भी पीएमश्री बनने के बाद से विज्ञान संकाय के अधिकांश विषय अतिथियों के ही भरोसे चल रहे हैं। ऐसी ही स्थिति पिछले सालों में खोले गए स्नातक कालेजों की भी है।
    भोपाल के इन कालेजों को मिले एपी
    भोपाल के चार कॉलेजों में रसायन शास्त्र के पांच सहायक प्राध्यापक पदस्थ किए गए हैं। इनमें हमीदिया, बैरसिया, और मोती लाल विज्ञान महाविद्यालय एमवीएम में एक-एक नए चयनित सहायक प्राध्यापक पदस्थ किए गए हैं। जबकि गीतांजलि कन्या पीजी महाविद्यालय को दो सहायक प्राध्यापक मिले हैं। केमिस्ट्री के इन 154 नव चयनित सहायक प्राध्यापकों को प्रदेश के 48 जिलों में पदस्थ किया गया है। इनमें भी सबसे ज्यादा 10 सहायक प्राध्यापक धार जिले को मिले हैं तो उज्जैन जिले में 8 सहायक प्राध्यापक भेजे गए हैं। आदिवासी जिलों का भी अच्छा ध्यान रखा गया है। अलीराजपुर, बड़वानी, झाबुआ, डिंडोरी में 6 कॉलेजों में पदस्थापना की गई है। रतलाम को भी खास तवज्जो मिली है तो बैतूल, पांढुर्णा, सिंगरौली, श्योपुर, गुना, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, दमोह, विदिशा, आगर, अशोकनगर, सिवनी, रीवा को एक-एक कालेज में ही सहायक प्राध्यापक मिले हैं।

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