वन माफिया के निशाने पर मध्यप्रदेश के जंगल

  • 5 साल में 2.58 लाख वन अपराध; 83 प्रतिशत मामले सिर्फ अवैध कटाई के

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
 हर साल करोड़ों पौधे लगाने के सरकारी दावों के बावजूद मध्यप्रदेश के जंगल लगातार वन माफिया के निशाने पर हैं। वन विभाग के पिछले पांच वर्षों (2021 से 2025 के अंतरिम आंकड़ों) के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में 2 लाख 58 हजार 507 वन अपराध दर्ज किए गए, जिनमें 2 लाख 14 हजार 266 मामले अवैध कटाई के हैं। यानी प्रदेश में दर्ज होने वाले हर 10 वन अपराधों में से लगभग 8 मामले (करीब 83 प्रतिशत) पेड़ों की अवैध कटाई से जुड़े हैं।
ये आंकड़े संकेत देते हैं कि वन विभाग की कार्रवाई के बावजूद प्रदेश के विशाल वन क्षेत्र में सक्रिय वन माफियाओं पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा है। सागौन समेत बहुमूल्य वन संपदा की तस्करी आज भी जंगलों के लिए सबसे बड़ा खतरा बनी हुई है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार प्रदेश का विशाल वन क्षेत्र, सागौन और अन्य बहुमूल्य प्रजातियों की उपलब्धता तथा दूरस्थ वन क्षेत्रों में सीमित निगरानी का फायदा उठाकर वन माफिया लगातार सक्रिय हैं। विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है, लेकिन अवैध कटाई अब भी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
हर साल हजारों मामले, लेकिन नहीं थम रही कटाई
वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार प्रदेश के वन क्षेत्र में हर साल हजारों मामले दर्ज किए जाते हैं, लेकिन विडंबना यह है कि अवैध कटाई थम नहीं रही है। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2021 में 58.108 वन अपराध दर्ज हुए, जिनमें 45,591 मामले अवैध कटाई के थे। वर्ष 2022 में कल 52.904 मामलों में से 42.667. वर्ष 2023 में 50,180 में से 43,864 और वर्ष 2024 में 50,711 मामलों में से 43,532 प्रकरण अवैध कटाई के दर्ज किए गए। वर्ष 2025 के अंतरिम आंकड़ों में भी कुल 46,604 वन अपराधों में 38,612 मामले अवैध कटाई के सामने आए हैं। स्पष्ट है कि कुल वन अपराधों में कुछ कमी आई है, लेकिन अवैध कटाई का अनुपात लगभग जस का तस बना हुआ है।
अवैध परिवहन, अतिक्रमण और उत्खनन भी चिंता का विषय
पिछले पांच वर्षों में वन अपराधों की अन्य प्रमुख श्रेणियां भी सामने आई हैं। यानी वन क्षेत्र में वन संपदा का अवैध परिवहन, वन क्षेत्र में अतिक्रमण और उत्खनन भी चिंता का विषय बना हुआ है। प्रदेश में अवैध परिवहन के1,956 मामले, अतिक्रमण के 8,686 मामले और अवैध उत्खनन के13,999 मामले दर्ज किए गए हैं। हालांकि इनकी संख्या अवैध कटाई की तुलना में काफी कम है, लेकिन ये भी वन संरक्षण के लिए गंभीर चुनौती बने हुए हैं।
वनकर्मियों पर बढ़ते हमले, सुरक्षा पर सवाल
वन माफियाओं का दुस्साहस लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में ही वन विभाग के अमले पर 100 से अधिक हमले दर्ज किए जा चुके हैं। हाल के महीनों में खंडवा, राजगढ़ और भोपाल में वनकर्मियों पर हमले की घटनाओं ने विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इसी कारण वन विभाग ने वनकर्मियों की सुरक्षा के लिए विशेष सशस्त्र बल (एसएएफ) की स्थायी तैनाती की मांग शासन से की है।
अपराध घटे, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती बरकरार
वन विभाग का दावा है कि वर्ष 2021 की तुलना में कुल वन अपराधों में लगभग 20 प्रतिशत की कमी आई है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अवैध कटाई पर प्रभावी नियंत्रण, आधुनिक निगरानी व्यवस्था, सख्त कार्रवाई और वनकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक प्रदेश के जंगलों पर मंडराता खतरा कम नहीं होगा। प्रदेश में करोड़ों पौधारोपण के बावजूद यदि सबसे अधिक अपराध पेड़ों की अवैध कटाई से जुड़े हैं, तो यह वन संरक्षण की रणनीति और निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

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