- दतिया उपचुनाव: ईवीएम में कैद हुई प्रत्याशियों की किस्मत, 8.76 प्रतिशत कम वोटिंग ने बढ़ाई चिंता

गौरव चौहान
दतिया उपचुनाव के लिए गुरुवार को 71.44 प्रतिशत मतदान हुआ, जो वर्ष 2023 के मतदान से लगभग 8.76 फीसदी कम है। कम मतदान ने भाजपा-कांग्रेस के प्रत्याशियों के साथ ही दोनों पार्टियों के रणनीतिकारों की चिंता बढ़ा दी है। साथ ही इस उपचुनाव के कारण प्रदेश के दिग्गज नेताओं की साख भी दांव पर है। यानी नतीजे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की राजनीतिक साख पर भी असर डालेंगे।
मध्य प्रदेश के दतिया में उप चुनाव के त्रिकोणीय मुकाबले के लिए लोगों ने बढ़ चढ़कर मतदान किया। फिर भी मतदान का आंकड़ा 2023 के विधानसभा चुनाव से करीब 9 फीसदी कम रहा। अब दतिया उपचुनाव में वोटिंग के बाद जीत के दावे भी शुरू हो गए है। बंपर मतदान के बाद बीजेपी-कांग्रेस दोनों अपनी अपनी जीत की बात कह रही है, लेकिन किसके दावों में दम है, यह तीन अगस्त को पता चल जाएगा। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि भाजपा बड़े अंतर से चुनाव जीत रही है, जो सरकार की नीतियों और विकास का परिणाम होगी। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि इस बार भाजपा ने जिस तरह से प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग कर चुनाव जीतने का सपना देखा है, उसे मतदाताओं से पूरी तरह से नकार दिया है और कांग्रेस भारी बहुमत के साथ चुनाव जीत कर भाजपा और राज्य सरकार के गलत निर्णयों का जवाब देगी।
प्रतिष्ठा की लड़ाई
दतिया उपचुनाव सिर्फ एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की राजनीति में भाजपा और कांग्रेस की ताकत आजमाने का बड़ा पैमाना माना जा रहा है। इसका परिणाम प्रदेश की राजनीति को कई संदेश देगा। नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद दतिया जिला भाजपा संगठन ने एक साथ इस्तीफा दे दिया था। इसलिए इसे भाजपा के लिए बड़ा उपचुनाव माना जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में भाजपा के लिए इस सीट को जीतना प्रतिष्ठा का विषय बन गया है। यदि भाजपा सीट कांग्रेस से छीनने में सफल रहती है तो इसे सरकार के कामकाज, संगठन की रणनीति और मुख्यमंत्री के नेतृत्व पर जनता की मुहर के रूप में देखा जाएगा। वहीं, भाजपा की फिर हार की स्थिति में विपक्ष को सरकार पर सवाल उठाने का मौका मिलेगा। पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के लिए भी यह चुनाव बेहद अहम माना जा रहा है। दतिया उनकी राजनीतिक कर्मभूमि रही है और वर्षों तक उन्होंने इस क्षेत्र में मजबूत संगठन खड़ा किया। माना जा रहा था कि उपचुनाव में भाजपा उन्हें ही उम्मीदवार बनाएगी। उन्होंने चुनावी तैयारियां भी शुरू कर दी थीं, लेकिन अंतिम समय में पार्टी ने आशुतोष तिवारी को टिकट दे दिया। टिकट बदलने के फैसले के बाद कार्यकर्ताओं में नाराजगी भी सामने आई और विरोध प्रदर्शन भी हुए। बाद में नरोत्तम मिश्रा स्वयं तिवारी के समर्थन में प्रचार में उतरे और घर-घर जाकर भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में मतदान की अपील की। ऐसे में यदि भाजपा जीतती है तो इसे क्षेत्र में उनकी संगठनात्मक पकड़ और प्रभाव कायम रहने के संकेत के रूप में देखा जाएगा। वहीं, हार की स्थिति में टिकट चयन और स्थानीय असंतोष को लेकर सवाल उठ सकते हैं।
पटवारी के लिए अग्नि परीक्षा
दूसरी ओर, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के लिए भी यह उपचुनाव किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस लगातार संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरने की कोशिश कर रही है। यदि कांग्रेस यह सीट बचाने में सफल रहती है तो इसे पटवारी की रणनीति और विपक्ष की सक्रियता की बड़ी सफलता माना जाएगा। वहीं हार कांग्रेस संगठन के लिए बड़ा झटका मानी जाएगी। यह उपचुनाव कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद हो रहे हैं। एक आपराधिक मामले में अदालत द्वारा उन्हें तीन वर्ष की सजा सुनाए जाने के बाद जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई थी। कांग्रेस ने इस बार दतिया राजघराने से जुड़े घनश्याम सिंह को उम्मीदवार बनाया है, जबकि भाजपा ने आशुतोष तिवारी पर दांव लगाया है।
आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू
मतदान के दौरान कांग्रेस ने तीन पोलिंग बूथ को लेकर शिकायत दर्ज कराई, तो भाजपा ने इसे कांग्रेस की हताशा करार दिया। अब सभी की निगाहें 3 अगस्त को होने वाली मतगणना पर लग गई है। मतदान के दौरान कांग्रेस ने सिरोल, जिगना और रामनगर में फर्जी मतदान होने और पुलिस पर पार्टी के एजेंट को साथ ले जाने की शिकायत की। इस पर कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने पोलिंग बूथ पहुंचकर अधिकारियों से बात की। इसी तरह कांग्रेस ने आरोप लगाया कि रामनगर गांव के मतदान केन्द्र से पुलिस पार्टी प्रत्याशी के पोलिंग एजेंट को अपने साथ ले गए। जब कार्यकर्ताओं ने इसका वीडियो बनाया, तो पुलिस ने उन्हें रोका। खबर मिलते ही कांग्रेस नेता संबंधित थाने पहुंचे, जिसके बाद एजेंट को छोड़ दिया गया। उपचुनाव में भाजपा -कांग्रेस सहित 21 प्रत्याशी मैदान में है। इनमें क्षेत्रीय दलों के 9 प्रत्याशी एवं 10 निर्दलीय उम्मीदवार है। मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस प्रत्याशी के बीच माना जा रहा है हालांकि आजाद समाज पार्टी के दामोदर यादव की वजह से चुनाव त्रिकोणीय आंका जा रहा हैं।
