मप्र में गैर-एसएएस का आईएएस कोटा 10 साल से ठप

  • दो साल में 8 राज्यों के 37 गैर-एसएएस अफसर बने आईएएस

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्यप्रदेश में विभिन्न विभागों में कार्यरत उत्कृष्ट सेवा रिकॉर्ड वाले राजपत्रित अधिकारियों के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में जाने का रास्ता करीब एक दशक से बंद है। राज्य में विभागीय पदोन्नति की प्रक्रिया भले ही लंबे इंतजार के बाद फिर शुरू हो गई हो, लेकिन गैर-एसएएस अधिकारियों को आईएएस अवॉर्ड देने की प्रक्रिया 2016 के बाद से आगे नहीं बढ़ी है। स्थिति यह है कि पिछले दो साल में देश के आठ राज्यों ने 37 गैर-एसएएस अधिकारियों को आईएएस अवॉर्ड दिया, जबकि मध्य प्रदेश में इस श्रेणी के पदों का निर्धारण तक नहीं किया गया है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के रिकॉर्ड के मुताबिक गुजरात, झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल समेत आठ राज्यों में बीते दो वर्षों के दौरान गैर-एसएएस अधिकारियों को आईएएस में शामिल करने की प्रक्रिया हुई है। इसके विपरीत मध्यप्रदेश में 2016 के बाद से गैर-एसएएस अधिकारियों के लिए आईएएस अवॉर्ड के पद निर्धारित नहीं किए गए हैं। मध्यप्रदेश में राज्य प्रशासनिक सेवा (एसएएस) के अधिकारियों को आईएएस में पदोन्नति देने के लिए हर साल पदों का निर्धारण किया जाता है। इसके लिए चयन प्रक्रिया भी निर्धारित नियमों के अनुसार आगे बढ़ती है। लेकिन गैर-एसएएस अधिकारियों के लिए निर्धारित हिस्से में पिछले करीब 10 वर्षों से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी है। राजपत्रित अधिकारी संघ के पूर्व अध्यक्ष डीके यादव के मुताबिक वर्ष 2016 में अंतिम बार चार गैर-एसएएस अधिकारियों को आईएएस अवॉर्ड मिला था। इसके बाद इस श्रेणी के अधिकारियों के लिए प्रक्रिया बंद हो गई। उनका आरोप है कि योग्य और अनुभवी अधिकारियों को नियमों के तहत अवसर मिलने के बावजूद उनकी दावेदारी पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उनका कहना है कि गैर-एसएएस अधिकारियों के लिए निर्धारित कोटे को सक्रिय किया जाना चाहिए।
राजपत्रित अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल सीएम से मिलेगा
राजपत्रित अधिकारी संघ के वर्तमान अध्यक्ष संतोष गांधी का कहना है कि इस मामले को लेकर प्रदेशभर के राजपत्रित अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मुलाकात करेगा। संगठन का मानना है कि जिन अधिकारियों ने वर्षों तक विभिन्न विभागों में उत्कृष्ट सेवाएं दी हैं, उन्हें भी आईएएस में जाने का अवसर मिलना चाहिए। उनका कहना है कि जब विभागीय पदोन्नति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है, तो गैर-एसएएस अधिकारियों के आईएएस अवॉर्ड की प्रक्रिया पर भी सरकार को निर्णय लेना चाहिए।
आईएएस के कुल पदों में 25 प्रतिशत पदोन्नति से
केंद्रीय कार्मिक विभाग के नियमों के अनुसार आईएएस के कुल स्वीकृत पदों में से 75 प्रतिशत पद सीधी भर्ती के माध्यम से यूपीएससी द्वारा भरे जाते हैं। शेष 25 प्रतिशत पद राज्य सरकार की सिफारिश पर पदोन्नति के माध्यम से भरे जाते हैं। इन पदोन्नति वाले पदों में 22 प्रतिशत हिस्सा राज्य प्रशासनिक सेवा (एसएएस) के लिए और 3 प्रतिशत हिस्सा गैर-एसएएस अधिकारियों के लिए निर्धारित है। यानी तकनीकी, वित्त, शिक्षा, स्वास्थ्य या अन्य विभागों के योग्य राजपत्रित अधिकारियों के लिए भी आईएएस बनने का रास्ता नियमों में मौजूद है। 

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