एनालॉग पनीर: असली नकली की पहचान मुश्किल

  • पैक्ड उत्पादों की लेबलिंग और होटल-रेस्टोरेंट में इस्तेमाल पर उठे सवाल

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्यप्रदेश में गैर-दुग्ध यानी एनालॉग उत्पादों पर प्रतिबंध के बाद खाद्य बाजार में नई चुनौती खड़ी हो गई है। खाद्य सुरक्षा आयुक्त ने एनालॉग या गैर-दुग्ध उत्पादों के निर्माण, प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर रोक लगा दी है, लेकिन उपभोक्ताओं के सामने अब भी सबसे बड़ा सवाल यही है कि बाजार में बिक रहे पनीर और मावे में असली और नकली की पहचान कैसे हो। खासकर पैक्ड उत्पादों पर स्पष्ट लेबलिंग और होटल-रेस्टोरेंट में इस्तेमाल होने वाले पनीर-मावे की पहचान को लेकर स्थिति साफ नहीं है। आदेश के मुताबिक फ्रोजन डेजर्ट, प्रोसेस्ड चीज और मिक्स्ड फैट स्प्रेड जैसे मानकीकृत उत्पादों को छूट दी गई है। बाकी उन उत्पादों पर प्रतिबंध है, जिनमें दूध के बजाय वनस्पति वसा, वनस्पति तेल या अन्य गैर-दुग्ध अवयवों का इस्तेमाल किया गया है। यह प्रतिबंध फिलहाल एक साल के लिए है। एफएसएसएआई द्वारा विस्तृत और अंतिम नियामकीय मानक तय किए जाने तथा उपभोक्ताओं को विक्रय स्थल पर उत्पाद की स्पष्ट पहचान उपलब्ध कराने की व्यवस्था होने तक यह प्रतिबंध जारी रहेगा।
प्रतिबंध के अगले ही दिन खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई का असर बाजार में दिखाई दिया। ग्वालियर में जांच के लिए निकली टीमों को कई डेयरियों में एनालॉग पनीर नहीं मिला। विभाग ने अलग-अलग डेयरियों से करीब 300 किलो खुला पनीर सैंपल के रूप में लिया है। जानकारी के मुताबिक ग्वालियर में प्रतिबंध से पहले रोजाना औसतन करीब तीन हजार किलो एनालॉग पनीर की खपत होने का अनुमान था। असली दूध से तैयार पनीर की तुलना में सस्ता होने के कारण होटल, रेस्टोरेंट और फास्ट फूड कारोबार में इसका इस्तेमाल होने की बात सामने आई है। ग्वालियर के अलावा राजस्थान के धौलपुर, भिंड और मुरैना से भी इसकी खेप आने की जानकारी दी गई है।
होटल-रेस्टोरेंट में इस्तेमाल होने वाले पनीर पर भी सवाल
सबसे बड़ी चुनौती खुले बाजार के साथ होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग कारोबार में इस्तेमाल होने वाले पनीर और मावे को लेकर है। उपभोक्ता को यह जानकारी आसानी से उपलब्ध नहीं होती कि उसके भोजन में इस्तेमाल किया गया पनीर वास्तविक दुग्ध उत्पाद है या गैर-दुग्ध अवयवों से तैयार किया गया है। ऐसे में केवल निर्माण और बिक्री पर प्रतिबंध लगाने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। उत्पाद की पहचान, लेबलिंग और निगरानी की प्रभावी व्यवस्था भी जरूरी होगी। मौजूदा स्थिति में उपभोक्ता के सामने यह सवाल बना हुआ है कि दुकान से खरीदा गया पैक्ड या खुला पनीर वास्तव में किस श्रेणी का है।
घर पर ऐसे पहचान सकते हैं पनीर
खाद्य विभाग की ओर से बताए गए घरेलू तरीकों के अनुसार एनालॉग पनीर की बनावट सामान्य पनीर से अलग हो सकती है। यह आसानी से टूटता या पिघलता नहीं है और चबाने पर रबर या च्युइंग गम जैसा खिंचाव महसूस हो सकता है। इसमें ताजे दूध जैसी प्राकृतिक महक भी नहीं होती। इसके विपरीत असली पनीर को हाथ से मसलने पर वह अपेक्षाकृत आसानी से चुरा हो जाता है।
प्रदेशभर में कार्रवाई, लाखों का माल जब्त
प्रतिबंध के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने अलग-अलग जिलों में कार्रवाई तेज की है। सीहोर के पचामा स्थित रूद्रांश डेयरी इंडस्ट्री से 204 किलो एनालॉग पनीर जब्त किया गया। इसकी कीमत करीब 40,800 रुपये बताई गई। नर्मदापुरम में सात दिन में करीब 7.07 लाख रुपये कीमत का 1406 लीटर संदिग्ध घी जब्त किया गया। 23 नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए। रतलाम में मथुरी रोड स्थित राज मिल्क प्रोडक्ट से मिलावट की आशंका में 25-25 किलो की 24 टोकरियां जब्त की गईं।बुरहानपुर में अलग-अलग डेयरियों से 150 किलो मावा और 33 किलो घी जब्त किया गया, जिसकी कीमत करीब 48,100 रुपये बताई गई। धार में गुजरात से बस के जरिए लाया गया 30 किलो पनीर जब्त किया गया। जबलपुर में मिलावट की आशंका में 215 किलो घी और 25 किलो पनीर जब्त किया गया। उज्जैन में डेयरी से 71 किलो पनीर और एक दुकान से 876 लीटर घी जब्त किया गया। झाबुआ में 17 लीटर घी जब्त किया गया, जबकि पनीर के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए।
प्रतिबंध के साथ निगरानी भी बड़ी चुनौती
प्रदेश में एनालॉग उत्पादों पर रोक के बाद अब खाद्य सुरक्षा विभाग के सामने केवल जब्ती और सैंपलिंग की चुनौती नहीं है। बाजार में उपलब्ध उत्पादों की श्रेणी, उनकी पहचान और बिक्री की निगरानी भी जरूरी होगी। खासतौर पर ऐसे उत्पाद जो खुले में बिकते हैं या होटल-रेस्टोरेंट में तैयार भोजन का हिस्सा बन जाते हैं, उनकी वास्तविक गुणवत्ता उपभोक्ता खुद आसानी से नहीं जान सकता। इस स्थिति में कागजों पर प्रतिबंध और बाजार में उसकी वास्तविक निगरानी के बीच की दूरी सबसे बड़ा सवाल बन गई है। जब तक उत्पाद की स्पष्ट पहचान, लेबलिंग और नियमित जांच की व्यवस्था मजबूत नहीं होती, तब तक उपभोक्ता के लिए असली और एनालॉग पनीर-मावे के बीच अंतर करना मुश्किल बना रहेगा।

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