
- रोकी गई निगम-मंडलों की सूची
गौरव चौहान/भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। देश भाजपा ने ओरछा में कार्यसमिति की बैठक का तो एलान कर दिया, लेकिन अब तक कार्यसमिति का गठन नहीं हो सका है। इसके लिए नेतृत्व ने हर जिले से एक महिला सहित तीन नाम मांगे थे। जानकारों की मानें तो जिला संगठन इन तीन नामों पर सहमति नहीं बना पा रहा है। गौरतलब है कि मई माह में ओरछा में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व वाली पहली कार्यसमिति की बैठक होनी है। इससे पहले प्रदेश कार्यसमिति की घोषणा होनी है। नेतृत्व ने हर जिले से 3 कार्यकर्ताओं को कार्यसमिति में शामिल करने की गाइडलाइन तय की है। इसमें एक महिला, एक विशेष आमंत्रित सदस्य भी होंगे।
यह संख्या छोटे और बड़े जिलों के अनुसार घट बढ़ सकती है। यानि कि पांढुर्ना, मैहर और मऊगंज, निवाड़ी जैसे छोटे जिलों में दो कार्यकर्ताओं को कार्यसमिति में लिया जा सकता है, जबकि संभागीय मुख्यालय वाले बड़े नगरों जैसे भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, इंदौर और रीवा से 3 से 5 सदस्य कार्यसमिति में लिए जा सकते हैं। पार्टी से जुड़े जानकारों की मानें तो नेतृत्व ने सभी जिला संगठनों से कार्यसमिति के लिए संभावित 3 नामों का पैनल भेजने को कहा था। इन सभी को मई के मौजूदा सप्ताह में ही नाम भोपाल भेजने थे, लेकिन कई जिले अब तक नाम नहीं भेज पाए हैं। कहा जा रहा है कि जिलों में वहां के संगठन किसी 3 नामों पर सहमति नहीं बना पा रहे हैं। वहां के पार्टी विधायक, मंत्री, वरिष्ठ नेता और प्रदेश में पदाधिकारी अपने अपने समर्थकों को कार्यसमिति के जरिए उपकृत करना चाहते हैं, जिससे आम सहमति नहीं बन पा रही है। इस चयन में नए और पुराने नेताओं, क्षेत्रीय समीकरण और सामाजिक संतुलन को साधने की कोशिश भी नेतृत्व को परेशानी में डाले हुए है। जानकारों की मानें तो इस बार प्रदेश नेतृत्व पिछली कार्यसमिति की तुलना में इस बार सदस्यों की संख्या सीमित होगी। हर जिले से 3 सदस्यों के हिसाब से 162 से भी कम संख्या रखने की तैयारी की जा रही है। इसके अलावा विशेष आमंत्रित सदस्यों की संख्या भी अधिकतम 30 प्रतिशत यानि कि 32 सदस्य तक सीमित रख सकती है।
सीएम तीन दिन रहेंगे व्यस्त
इधर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी पिछले दो दिनों से मध्यप्रदेश से बाहर प्रवास पर हैं। सीएम शनिवार को पश्चिम बंगला के कोलकाता के प्रवास पर रहेंगे, जहां सीएम भाजपा की गठित हो रही नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे। उधर तीन राज्यों में भाजपा की सरकार के गठन की प्रक्रिया की वजह से पार्टी का केन्द्रीय नेतृत्व व्यस्त है। ऐसे में निगम मंडलों की शेष नियुक्तियों पर कुछ दिनों के लिए विराम लग सकता है। सीएम का पश्चिम बंगाल की नई सरकार का 9 मई को होने वाले संभावित शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होना लगभग तय है। इसी तरह संगठन के दूसरे वरिष्ठ नेता भी दूसरे कारणों से व्यस्त बताए जा रहे हैं, जिसकी वजह से संगठनात्मक नियुक्तियों में भी देरी हो रही है।
विधायक-सांसद भी नेतृत्व से खुश नहीं
पार्टी के कुछ विधायक भी इस बात को लेकर प्रदेश नेतृत्व से खुश नहीं हैं कि उनके क्षेत्र के प्राधिकरणों की नियुक्ति में उनसे चर्चा नहीं की। कुछ विधायक प्राधिकरण से लेकर निगम मंडलों में भी अपने समर्थकों के लिए काफी दिनों से सक्रिय रहे है और उनके द्वारा कई बार प्रदेश संगठन से लेकर मुख्यमंत्री तक से सिफारिश की गई है। लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। पार्टी के सांसदों की भी कुछ ऐसी ही नाराजगी है। ऐसे में विधायक और सांसद चाहते है कि प्रदेश कार्यसमिति में उनके समर्थकों को ज्यादा से ज्यादा स्थान दिया जाए। सूत्रों की मानें तो सरकार के एक मंत्री भी इस बात को लेकर नाराज थे, कि उनकी सहमति के बिना राज्य महिला आयोग में एक महिला नेत्री को सदस्य बनाया जा रहा था। गौरतलब है कि सरकार ने जब राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष व सदस्यों के नाम पर सहमति बनाई थी, तब उसमें ग्वालियर की पूर्व मेयर समीक्षा गुप्ता का भी नाम था। लेकिन उस पर ग्वालियर से आने वाले एक मंत्री ने एतराज जता दिया, जिससे पूरी सूची जारी होने से रोक दी गई। उसके बाद अध्यक्ष रेखा यादव व सदस्य के तौर पर पूर्व विधायक साधना स्थापक के नाम की अधिसूचना जारी हो गई, लेकिन समीक्षा गुप्ता के नाम का अब तक एलान नहीं किया गया है।
