आबकारी अफसर सीख रहे हथियार चलाना

आबकारी अफसर
  • आपदा से निपटने के गुर….

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। आए दिन होने वाले माफिया और तस्करों के हमलों से निपटने के लिए आबकारी और यन विभाग के अमले को अब न केवल आत्मरक्षा, बल्कि हथियार चलाने से लेकर युद्ध की रणनीति तक की ट्रेनिंग दी जा रही है। आबकारी अफसरों का कामकाज अब कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन्हें पुलिस की तर्ज पर कॉम्बैट फोर्स के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसकी शुरुआत हो भी गई है। हाल ही में चयनित किए गए 45 नवनियुक्त आबकारी अधिकारियों को पहली बार इस तरह की ट्रेनिंग के लिए सागर में 90 दिवसीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वहीं वन विभाग ने भी अपने अमले को पुलिस ट्रेनिंग सेंटर्स में प्रशिक्षित करने के लिए ब्लूप्रिंट तैयार किया है, हालांकि इसे सरकार की मंजूरी मिलनी बाकी है।
साइबर अपराध, ई-फाइलिंग और सीपीआर की भी मिलेगी जानकारी
आबकारी अफसरों को नौकरी में शामिल होने से पहले इस प्रशिक्षण के दौरान फिजिकल ट्रेनिंग के 47 पीरियड में शामिल होना पड़ेगा। इन्हें बुनियादी प्रशिक्षण के साथ आबकारी अधिनियम 1915, एनडीपीएस एक्ट, एमपी बीयर एवं शराब अधिनियम, विदेशी शराब भंडारण, टेंडर प्रक्रिया, बिक्री और आबकारी शुल्क से जुड़े विषय भी पढ़ाए जाएंगे। विभाग का मानना है कि इस नए प्रशिक्षण मॉडल से आबकारी अधिकारी अवैध शराब कारोबार और उससे जुड़े अपराधों पर अधिक प्रभावी कार्रवाई कर सकेंगे। इस ट्रेनिंग में आपात स्थिति में जान बचाने के लिए सीपीआर देने की भी ट्रेनिंग मिलेगी।
स्पेशल कोर्स में हथियार ही ट्रेनिंग चलाना
आबकारी विभाग के नवनियुक्त अधिकारियों के लिए डिजाइन किया गया यह 90 दिनों का कोर्स बेहद चुनौतीपूर्ण है। प्रशिक्षण के दौरान इन अधिकारियों को एसएलआर, राइफल, पिस्टल और आधुनिक ग्लॉक रिवॉल्वर जैसे हथियारों को चलाने का अभ्यास कराया जाएगा। इस प्रशिक्षण में हर दिन इन अफसरों को किलोमीटर की दौड़, 12 किलोमीटर की चाल और क्रोकोडाइल और डग वॉक जैसे कठिन शारीरिक अभ्यास भी कराए जाएंगे। इस ट्रेनिंग का मकसद अवैध शराब माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई के दौरान अधिकारियों को निडर और सदाम बनाना है। आबकारी अधिकारियों को 120 क्लासरूम सत्रों में आबकारी अधिनियम, एनडीपीएस एक्ट और साइबर अपराधों की शिक्षा दी जाएगी, वहीं गीता पाठ और ध्यान के सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। इन अफसरों को एफएसएल सागर और जिला अदालतों के जरिए केस की बारीकियां भी समझाई जाएंगी।
वन विभाग भी ट्रेनिंग दिलाने की तैयारी में
इस बीच, जंगलों में लकड़ी माफिया और अवैध शिकारियों के बढ़ते हौसलों को देखते हुए वन मुख्यालय ने भी अपने मैदानी अमले को पुलिस की तरह प्रोफेशनल ट्रेनिंग दिलाने की तैयारी की है। वन मुख्यालय में इसका प्रस्ताव तैयार हो रहा है, जिसमें वन रक्षकों और रेंजर्स को भी पुलिस ट्रेनिंग सेंटर्स से कमांडो और हथियार चलाने की ट्रेनिंग दिलाई जाएगी। विभाग इस प्रस्ताव को जल्द ही मंजूरी के लिए वल्लभ भवन भेजने की तैयारी कर रहा है। गौरतलब है कि वन विभाग के स्टाफ को आए दिन माफिया और तस्करों के साथ ही शिकारियों का भी सामना करना पड़ता है। इस ट्रेनिंग के बाद उनकी अपराधियों से निपटने की क्षमता में इजाफा होगा।

Related Articles