
- कर्नल कुरैशी मामला…
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। अब बहुत हो चुका, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को यह टिप्पणी की जब उसने मध्य प्रदेश सरकार से कहा कि वह अपने जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह के कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियों पर कार्रवाई करने के लिए अनुमति देने का निर्णय ले। यह टिप्पणियां आपरेशन सिंदूर के बाद की गई थीं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जायमाल्य बागची की पीठ ने शाह के आपत्तिजनक बयान को सबसे दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया, जब राज्य की ओर से पेश हुए सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मंत्री ने दुर्भाग्यपूर्ण टिप्पणियां कीं और जल्दी ही माफी मांगी। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा, जो उन्होंने कहा, वह निश्चित रूप से दुर्भाग्यपूर्ण था और उनके पास पछतावे की भी कोई भावना नहीं है। पीठ ने शाह और राज्य की ओर से आगे की दलीलें सुनने से इन्कार कर दिया और चार सप्ताह के भीतर अपने 19 जनवरी के निर्देश का पालन करने के लिए कहा, जिसमें मप्र सरकार को अनुमति देने के संबंध में उचित निर्णय लेने के लिए कहा गया था।
आगे यह संभावना
पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता अजय मिश्रा का कहना है कि अभियोजन की स्वीकृति देने या न देने के संबंध में निर्णय राज्य सरकार को लेना है। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बाद नहीं लगता है कि सरकार इसे अधिक समय तक लंबित रखेगी। चूंकि, मामला मंत्री से जुड़ा है इसलिए इस पर निर्णय मुख्यमंत्री के स्तर से होगा। अभियोजन की स्वीकृति मिलने के बाद न्यायालय में केस चलेगा। जहां तक मंत्री पद से हटाने या त्यागपत्र देने की बात है तो यह पूरा मामला नैतिकता का है और सरकार के विवेक पर निर्भर करेगा कि वह क्या कदम उठाती है। इसके लिए कोई स्पष्ट प्रविधान नहीं है।
