
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। महाकाल मंदिर, ओंकारेश्वर और प्रदेश के अन्य बड़े धार्मिक स्थलों पर लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए मध्यप्रदेश सरकार अब प्रोफेशनल टेंपल मैनेजमेंट की दिशा में कदम बढ़ाने जा रही है। प्रदेश में पहली बार एमबीए पाठ्यक्रम के तहत टेंपल मैनेजमेंट कोर्स शुरू किया जाएगा। इसकी शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय से होगी। सरकार का मानना है कि धार्मिक पर्यटन के लगातार बढ़ते दायरे के बीच अब मंदिरों और बड़े धार्मिक स्थलों की व्यवस्थाओं के लिए प्रशिक्षित मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स की जरूरत महसूस की जा रही है।
सामान्य दिनों में भी उमड़ रही श्रद्धालुओं की भारी भीड़
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि पहले जहां सावन, शिवरात्रि और विशेष पर्वों पर ही भारी भीड़ दिखाई देती थी, वहीं अब सप्ताहांत और अवकाश के दिनों में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों में पहुंच रहे हैं। उज्जैन में सामान्य दिनों में भी एक लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। महाकाल मंदिर, ओंकारेश्वर, ओरछा सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर भी लगातार भीड़ बढ़ रही है। ऐसे में भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था, पार्किंग, सफाई और श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित बनाए रखना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। प्रस्तावित टेंपल मैनेजमेंट कोर्स में आधुनिक मैनेजमेंट सिस्टम पर विशेष फोकस रहेगा। छात्रों को भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, पार्किंग सिस्टम, सफाई व्यवस्था, श्रद्धालुओं की आवाजाही और आपदा प्रबंधन जैसे विषय पढ़ाए जाएंगे। इसके साथ ही मंदिरों में चढऩे वाले फूल-माला, नारियल और अन्य पूजन सामग्री के उपयोग तथा डिस्पोजल की वैज्ञानिक व्यवस्था का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। धार्मिक स्थलों की आंतरिक व्यवस्थाओं को अधिक तकनीकी और व्यवस्थित बनाने पर विशेष ध्यान रहेगा।
चर्च, मस्जिद और बड़े आयोजनों के प्रबंधन में भी लाभप्रद
मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कोर्स केवल मंदिरों तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि मैनेजमेंट के सिद्धांत हर जगह समान रूप से लागू होते हैं। इस कोर्स से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले छात्र चर्च, मस्जिद और अन्य धार्मिक या भीड़भाड़ वाले स्थलों पर भी व्यवस्थाएं संभाल सकेंगे। सरकार पहले इसे उज्जैन में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू करेंगी। इसके बाद छात्रों की रुचि और परिणामों के आधार पर इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय समेत अन्य विश्वविद्यालयों में भी इसे शुरू करने पर विचार किया जाएगा। सरकार का मानना है कि आने वाले समय में धार्मिक पर्यटन और बड़े धार्मिक आयोजनों में प्रशिक्षित मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स की मांग तेजी से बढ़ेगी। इससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे। प्रशिक्षित लोगों के आने से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और धार्मिक स्थलों की व्यवस्थाएं अधिक संवेदनशील, व्यवस्थित और प्रोफेशनल तरीके से संचालित की जा सकेंगी।
