
- प्राथमिकता वाले कामों में देरी पर सीएम नाराज
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अधिकारियों के साथ बात करते हुए उस वक्त नाराज हो गए, जब उन्होंने ए प्लस नोटशीट पर लंबे समय बाद क्रियान्वयन नहीं होने की जानकारी मिली। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि हर नोटशीट पर ए प्लस नहीं लिखा जाता और वे जो भी घोषणाएं करते हैं, उस पर पहले संबंधित विभाग से चर्चा कर लेते हैं। इसके बाद भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। मुख्यमंत्री मंत्रालय में लंबित कार्यों को लेकर अधिकारियों के साथ समीक्षा कर रहे थे। सीएम लंबित घोषणाओं और ए प्लस नोटशीट की पूरी जानकारी लेकर समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जब किसी नोटशीट पर ए प्लस लिखा जाता है, तो उसका मतलब यह होता है कि तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की जानी है। ए प्लस का मतलब ए प्लस होता है, अब जिसे हटाना है, हटाओ या नहीं हटाओ, लेकिन ऐसे प्रकरणों का तत्काल निराकरण होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों की ओर देखते हुए कहा कि जब ए प्लस मामलों की ही अनदेखी हो रही है, तो बाकी मामलों का क्या होगा।
उन्होंने कहा कि वे कम से कम इस तरह की लापरवाही तो चर्दाश्त नहीं करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि उनकी कई घोषणाओं को महीनों बाद भी क्रियान्वित नहीं किया गया। जब भी इस संबंध में जानकारी ली जाती है या फाइलें देखते है कि कार्यवाही प्रचलन में है, पढऩे को मिलता है। सीएम ने अधिकारियों से कहा कि वे उन्हें केवल तीन दिन का समय दे रहे हैं। इस दौरान घोषणाओं के क्रियान्वयन की समय-सीमा और कार्ययोजना उनके सचिवालय तक पहुंच जानी चाहिए।
इन विभागों के मामले सबसे ज्यादा लंबित
समीक्षा बैठक के दौरान ए प्लस अनुमोदित सबसे ज्यादा मामले नगरीय विकास, स्कूल शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग के बताए गए हैं। इनके अलावा गृह विभाग में भी कई मामलों पर क्रियान्वयन के लिए पहल नहीं हो सकी है। इन सभी लंबित मामलों के निराकरण के लिए सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए।
अफसरों की दलील को नहीं माना
कुछ अधिकारियों ने सीएम से कहा कि उनके द्वारा जो स्थानांतरण को लेकर ए प्लस नोटशीट भेजी गई है, वह अब तक लंबित इसलिए हैकि संबंधित विभाग में कोई पद रिक्त नहीं हैं। ऐसे में तत्काल आदेश जारी करने पर वेतन और पदस्थापना संबंधी परेशानी आ सकती हैं, इसलिए मामले को लंबित रखा जाता है, जैसे ही पद खाली होती है, ए प्लस रिकमंड आदेश जारी कर दिए जाते हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि वे इस तर्क से सहमत नहीं है, आप अधिकारी हैं और आपका एवं विभाग का दायित्व है कि व्यवस्था बनाना। वे इस पर कुछ भी नहीं सुनेंगे। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि तबादलों वाले प्रकरण निपटाने के लिए अधिकारियों को कुछ घंटे देते हुए कहा कि 3 जुलाई की तारीख में ही आदेश निकाल दिए जाए।
औपचारिक न हो लोकार्पण
मुख्यमंत्री ने बैठक में वचुअल जुडे स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह और विभागीय अधिकारियों से कहा है किप्रदेश के सभी नवनिर्मित सांदीपनि विद्यालयों का लोकार्पण औपचारिक कार्यक्रम न होकर शिक्षा, संस्कृति और जनभागीदारी का सामाजिक उत्सव बने। जिन सांदीपनि विद्यालयों का लोकार्पण पहले ही हो चुका है, वहाँ प्रवेशोत्सव उत्साहपूर्वक आयोजित किया जाए, जिससे अधिक से अधिक विद्यार्थियों का विद्यालयों से जुड़ाव बढ़े। सीएम ने कहा कि जिलों के प्रभारी मंत्री एवं अन्य जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में इनका लोकार्पण कराया जाये। गुरु पूर्णिमा (29 जुलाई) के दिन हर जिले के एक सांदीपनि विद्यालय में प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में गुरु पूर्णिमा उत्सव मनाया जाये। इसमें विज्ञान प्रदर्शनी आयोजन, गुरुजनों का सम्मान, विद्यार्थियों एवं शिक्षकों द्वारा किए गए नवाचारों की जानकारी प्रदाय, विद्यार्थियों द्वारा डिजिटल एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का प्रदर्शन सहित स्कूल के मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान जैसे आयोजन किये जायें।
