
- बानाची एस्टेट की बिक्री अंतिम चरण में, मूल्यांकन पूरा
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। केरल के वायनाड जिले के सुल्तान बाथरी स्थित मध्य प्रदेश की बानाची एस्टेट को बेचने की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। मध्य प्रदेश सरकार के वित्त विभाग ने एस्टेट की जमीन का विस्तृत मूल्यांकन पूरा कर लिया है और बिक्री के संबंध में औपचारिक प्रस्ताव केरल सरकार को भेज दिया है। प्रस्ताव में कलेक्टर गाइडलाइन के आधार पर निर्धारित कीमत पर बानाची एस्टेट को केरल सरकार को बेचने की बात कही गई है। अब गेंद केरल सरकार के पाले में है। मध्य प्रदेश सरकार से प्रस्ताव मिलने के बाद केरल सरकार अपने स्तर पर बानाची एस्टेट का भौतिक सत्यापन और जमीन का मूल्यांकन करा रही है। वहां से जमीन खरीदने पर सहमति मिलने के बाद मध्य प्रदेश में कैबिनेट की अंतिम स्वीकृति ली जाएगी। इसके बाद बिक्री की शेष औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। सब कुछ तय प्रक्रिया के अनुसार हुआ तो 224.31 हेक्टेयर में फैली यह संपत्ति जल्द ही मध्य प्रदेश सरकार के स्वामित्व से निकलकर केरल सरकार के अधीन आ सकती है। बानाची एस्टेट का कुल क्षेत्रफल करीब 224.31 हेक्टेयर है। इसका स्वामित्व मध्य प्रदेश की प्रोविडेंट इन्वेस्टमेंट कंपनी के पास है। यह कंपनी ऐतिहासिक रूप से ग्वालियर के सिंधिया राजघराने से जुड़ी रही थी। आजादी के बाद और राज्यों के पुनर्गठन के दौरान कंपनी का स्वामित्व मध्य प्रदेश सरकार के पास आ गया। इसी के साथ केरल में स्थित बानाची एस्टेट भी मध्य प्रदेश सरकार की संपत्ति बन गई। यह संपत्ति लंबे समय से राज्य सरकार के लिए एक ऐसी परिसंपत्ति बनी हुई है, जिससे नियमित राजस्व प्राप्त नहीं हो रहा है। इसके उलट एस्टेट की जमीन पर समय-समय पर अतिक्रमण और कब्जे की शिकायतें सामने आती रही हैं। सरकार का मानना है कि ऐसी विवादित संपत्ति को अपने स्वामित्व में बनाए रखने से राज्य को व्यावहारिक आर्थिक लाभ नहीं मिल रहा है। इसी वजह से इसे बेचने का रास्ता चुना गया है।
मार्च में कैबिनेट ने दी थी बिक्री को मंजूरी
बानाची एस्टेट की बिक्री को लेकर मध्य प्रदेश सरकार पहले ही नीतिगत निर्णय ले चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मार्च 2026 में हुई कैबिनेट बैठक में एस्टेट को बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। इसके बाद वित्त विभाग ने जमीन का मूल्यांकन और बिक्री की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। सूत्रों के अनुसार कैबिनेट में जब इस संपत्ति को बेचने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई थी, तब पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने सवाल उठाया था कि इस परिसंपत्ति को बेचने की जरूरत क्यों है और इससे राज्य को क्या हासिल होगा। इस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया था कि एस्टेट की जमीन पर लगातार अतिक्रमण हो रहा है और मध्य प्रदेश को इससे कोई नियमित आय भी नहीं मिल रही है। ऐसे में संपत्ति को अपने पास बनाए रखने का व्यावहारिक लाभ नहीं है।
