
- दतिया उपचुनाव बना सियासी प्रतिष्ठा का रण
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। दतिया विधानसभा उपचुनाव अब केवल एक सीट का चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि यह मध्यप्रदेश की राजनीति का सबसे अहम मुकाबला बनता जा रहा है। एक तरफ कांग्रेस इस चुनाव के जरिए अपने संगठन में एकजुटता का संदेश देने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर भाजपा इसे पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक वापसी का अवसर मान रही है। यही वजह है कि दोनों दलों ने इस उपचुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है।
आज कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी दतिया पहुंचकर कार्यकर्ताओं की बैठक करेंगे। लंबे समय से दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक मतभेद और संगठनात्मक खींचतान की चर्चाओं के बीच उनका एक मंच पर आना राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दतिया में होने वाली बैठक का उद्देश्य केवल संभावित उम्मीदवार पर राय लेना नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं के बीच यह संदेश देना भी है कि कांग्रेस नेतृत्व उपचुनाव को लेकर पूरी तरह एकजुट है। पार्टी सूत्रों के अनुसार कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेकर उम्मीदवार का अंतिम चयन किया जाएगा ताकि टिकट घोषणा के बाद किसी प्रकार की नाराजगी या विरोध की स्थिति न बने। कांग्रेस के सामने सबसे बड़ा सवाल उम्मीदवार चयन का है। पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने और छह वर्ष तक चुनाव लडऩे के अयोग्य घोषित किए जाने के बाद अब उनके पुत्र अंकित भारती का नाम सबसे प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा है।
पार्टी के भीतर यह आकलन किया जा रहा है कि राजेंद्र भारती के खिलाफ वर्षों पुराने मामले में हुई कार्रवाई के बाद क्षेत्र में सहानुभूति का माहौल बन सकता है। यदि कार्यकर्ताओं का समर्थन मिला तो कांग्रेस इस सहानुभूति को चुनावी लाभ में बदलने की कोशिश कर सकती है। दूसरी ओर भाजपा से कांग्रेस में आए अवधेश नायक भी मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में उनका टिकट घोषित होने के बाद कार्यकर्ताओं के विरोध के चलते पार्टी को अंतिम समय में प्रत्याशी बदलना पड़ा था। अब बदले राजनीतिक हालात में नायक समर्थक भी अपनी दावेदारी मजबूत बता रहे हैं।
भाजपा के लिए वापसी का मौका
दूसरी ओर भाजपा इस उपचुनाव को पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक वापसी के अवसर के रूप में देख रही है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार राजेंद्र भारती से हारने के बाद नरोत्तम मिश्रा सक्रिय राजनीति में अपेक्षाकृत शांत दिखाई दिए थे। लेकिन राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद बने हालात ने उनके लिए फिर से चुनावी मैदान में उतरने का रास्ता खोल दिया है। पार्टी के भीतर उन्हें सबसे मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा है और उन्होंने पिछले कुछ महीनों से दतिया में संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच लगातार सक्रियता बढ़ा दी है। भाजपा नेताओं का मानना है कि 2023 की हार का प्रमुख कारण स्थानीय स्तर पर नाराजगी और भीतरघात था। इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए नरोत्तम मिश्रा इस बार रूठे कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों और प्रभावशाली वर्गों के बीच लगातार संपर्क अभियान चला रहे हैं। पार्टी रणनीतिकारों का विश्वास है कि यदि संगठन पूरी ताकत से चुनाव लड़ेगा तो पिछली हार की भरपाई संभव है
