राष्ट्रीय मुख्य प्र.वक्ता पद को लेकर एनसीपी के विवाद में अजीत पवार की विरासत केंद्र में

अजीत पवार

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव व प्रमुख राष्ट्रीय प्रवक्ता बृजमोहन श्रीवास्तव, ने सुनेत्रा पवार द्वारा उमेश पाटिल को नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) का राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता नियुक्त करने को पार्टी संविधान के खिलाफ बताया है । श्रीवास्तव ने कहा कि यह नियुक्ति पार्टी के संविधान और 30 नवंबर 2023 को कर्जत में आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन में पारित  प्रस्तावों के खिलाफ है जिसमें में 30 नबम्बर 2028 तक के लिये निर्वाचन हुआ था । श्रीवास्तव ने कहा, राष्ट्रीय अधिवेशन में एजेंडा आइटम नंबर 10 के तहत, स्वर्गीय अजीत पवार जी के प्रस्ताव पर, राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता के रूप में मुझे सर्वसम्मति से चुना गया था । वहीं पार्टी की संवैधानिक प्रक्रिया के अन्तर्गत नामांकन के जरिए किसी निर्वाचित पदाधिकारी को हटाया या बदला नहीं जा सकता। उन्होंने आगे बताया कि उसी अधिवेशन में एजेंडा आइटम नंबर 17 के तहत पारित प्रस्ताव के अनुसार, किसी भी बैठक के लिए स्पीड पोस्ट के माध्यम से 90 दिन पहले नोटिस देना तथा राष्ट्रीय समिति में किसी भी बदलाव के लिए राष्ट्रीय आम सभा  का प्रस्ताव पारित होना जरूरी है। इस संवैधानिक आवश्यकताओं का पालन न किए जाने के कारण, प्रमुख राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद पर उमेश पाटिल की कथित नियुक्ति असंवैधानिक होने के कारण शून्य है। श्रीवास्तव ने पार्टी के राष्ट्रीय सचिव द्वारा सुनेत्रा पवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में चुनाव की वैधता पर उठाए गए सवाल का भी जिक्र करते हुए कहा कि भारत निर्वाचन आयोग ने 27 जुलाई 2026 के अपने पत्र के माध्यम से 26 फरवरी 2026 को किए गए निर्वाचन व संशोधनों से संबंधित आवश्यक प्रस्तावों, कार्यवाही के विवरण और हस्ताक्षरकर्ताओं की जानकारी मांगी थी, जो आज तक चुनाव आयोग को नहीं भेजी गई है। फलस्वरूप निर्वाचन आयोग के पत्र से भी स्पष्ट है कि 26 फरवरी 2026 को राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्वाचन को मान्य नहीं किया गया है। इसलिए, सुनेत्रा पवार द्वारा की गई नियुक्ति नियमानुसार नहीं है क्योंकि निर्वाचित पदाधिकारियों को अपात्र पदाधिकारी द्वारा हटाया नहीं जा सकता है ।
निर्णयों को अनदेखा किया गया
सुनेत्रा पवार से अपील करते हुए उन्होंने कहा स्वर्गीय अजीत दादा पवार की आकस्मिक मृत्यु को अभी एक साल भी नहीं हुआ है ऐसे में आपके द्वारा उनके निर्णयों को अनदेखा करने से दादा के समर्थकों में निराशा और आक्रोश पैदा हो रहा है। दादा की पत्नी होने के नाते सभी की अपेक्षा है कि आप उनकी विरासत बनाये रखेंगी क्योंकि उनके निर्णयों का सम्मान करने का अर्थ है—उनके नेतृत्व में लिए गए लोकतांत्रिक निर्णयों का सम्मान करना तथा दादा के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करना ।

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