एक नवंबर से मप्र के कर्मचारियों को मिल सकती है… 2 प्रतिशत डीए की सौगात

  • केंद्र सरकार ने महंगाई भत्ता 63 प्रतिशत किया, मप्र में अब भी 58 प्रतिशत
  • गौरव चौहान
डीए की सौगात

केंद्र सरकार के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता (डीए) बढकऱ 63 प्रतिशत होने के बाद मध्य प्रदेश के कर्मचारियों और पेंशनर्स की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं। केंद्र और राज्य के कर्मचारियों के डीए में अब पांच प्रतिशत का अंतर हो गया है। केंद्रीय कर्मचारियों को जहां 63 प्रतिशत डीए मिल रहा है, वहीं मध्य प्रदेश सरकार के कर्मचारी अभी 58 प्रतिशत पर हैं। लंबे समय से महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी की मांग कर रहे प्रदेश के कर्मचारी संगठनों ने अब केंद्र की दर और तारीख से डीए-डीआर देने की मांग तेज कर दी है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, मध्य प्रदेश स्थापना दिवस एक नवंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी की घोषणा कर सकते हैं। हालांकि, फिलहाल दो प्रतिशत वृद्धि की संभावना जताई जा रही है। यदि इतनी बढ़ोतरी होती है तो राज्य कर्मचारियों का डीए 58 से बढकऱ 60 प्रतिशत हो जाएगा। इसके बावजूद केंद्र और राज्य के बीच तीन प्रतिशत का अंतर बना रहेगा। फिलहाल सरकार की ओर से इस संबंध में आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
छह महीने में केंद्र ने दूसरी बार बढ़ाया डीए
केंद्र सरकार ने दिवाली से पहले केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए महंगाई भत्ता और महंगाई राहत (डीआर) में तीन प्रतिशत वृद्धि को मंजूरी दी है। इससे केंद्रीय कर्मचारियों का डीए 60 से बढकऱ 63 प्रतिशत हो गया है। बढ़ी हुई दर एक जुलाई 2026 से प्रभावी होगी। इससे पहले अप्रैल में दो प्रतिशत की वृद्धि की गई थी। इसके मुकाबले मध्य प्रदेश सरकार ने दो मार्च को होली से पहले कर्मचारियों के डीए और पेंशनर्स की महंगाई राहत में तीन प्रतिशत बढ़ोतरी की थी। इसके बाद प्रदेश के कर्मचारियों का डीए 58 प्रतिशत हो गया था। केंद्र की नई वृद्धि के बाद दोनों के बीच पांच प्रतिशत का अंतर बन गया है।
दो प्रतिशत बढ़ा तो भी तीन प्रतिशत पीछे रहेगा प्रदेश
राज्य सरकार यदि स्थापना दिवस पर डीए में दो प्रतिशत वृद्धि करती है तो कर्मचारियों को कुछ राहत जरूर मिलेगी, लेकिन केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर महंगाई भत्ता पाने के लिए उन्हें अभी और इंतजार करना पड़ेगा। सूत्रों के अनुसार, दो प्रतिशत डीए बढ़ाने से राज्य सरकार के खजाने पर सालाना करीब एक हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ सकता है। प्रदेश के कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि राज्य सरकार केंद्र के बराबर महंगाई भत्ता दे और इसे उसी तारीख से लागू करे, जिस तारीख से केंद्र में बढ़ोतरी प्रभावी होती है। उनका तर्क है कि महंगाई का असर सभी कर्मचारियों पर पड़ता है, इसलिए डीए की दर और भुगतान की तारीख में अंतर नहीं होना चाहिए।
12 लाख कर्मचारियों-पेंशनर्स के लिए पांच प्रतिशत वृद्धि की मांग
तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रदेश महासचिव उमाशंकर तिवारी ने कहा कि मध्य प्रदेश के कर्मचारी और पेंशनर्स लंबे समय से महंगाई भत्ता और महंगाई राहत के मामले में पीछे चल रहे हैं। केंद्र सरकार की ताजा वृद्धि के बाद यह अंतर पांच प्रतिशत हो गया है। उन्होंने मांग की कि प्रदेश के करीब 12 लाख कर्मचारियों और पेंशनर्स को पांच प्रतिशत डीए और डीआर का लाभ दिया जाए। साथ ही भुगतान केंद्रीय दर और प्रभावी तारीख के अनुरूप किया जाए, ताकि कर्मचारियों को बकाया राशि के लिए इंतजार न करना पड़े।
चार नवंबर को सतपुड़ा भवन के सामने प्रदर्शन
महंगाई भत्ते में वृद्धि की मांग को लेकर कर्मचारी संगठन पहले भी राजधानी में प्रदर्शन कर चुके हैं। अब मप्र अधिकारी-कर्मचारी पेंशनर्स संयुक्त मोर्चा चार नवंबर को भोपाल में सतपुड़ा भवन के सामने प्रदर्शन करेगा। मोर्चा महंगाई भत्ते के साथ कर्मचारियों और पेंशनर्स की अन्य मांगों को भी उठाएगा। मप्र राज्य कर्मचारी कल्याण समिति के अध्यक्ष रमेशचंद्र शर्मा भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर डीए बढ़ाने की मांग से अवगत करा चुके हैं। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सरकार को महंगाई भत्ते के मामले में जल्द निर्णय लेना चाहिए, ताकि कर्मचारियों को राहत मिल सके।
पेंशनर्स को भी पांच प्रतिशत महंगाई राहत का इंतजार
पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने भी प्रदेश के पेंशनर्स को पांच प्रतिशत अतिरिक्त महंगाई राहत देने के आदेश जल्द जारी करने की मांग की है। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष आमोद सक्सेना ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर एक जनवरी 2026 से दो प्रतिशत और एक जुलाई 2026 से तीन प्रतिशत महंगाई राहत देने की मांग की है। एसोसिएशन के संरक्षक गणेश दत्त जोशी ने बकाया एरियर्स का भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की। पेंशनर्स का कहना है कि महंगाई राहत की दर और प्रभावी तारीख में अंतर के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। अब कर्मचारियों और पेंशनर्स की निगाहें एक नवंबर को स्थापना दिवस के कार्यक्रम पर टिकी हैं। यदि सरकार डीए वृद्धि की घोषणा करती है तो यह स्पष्ट होगा कि राहत कितनी मिलेगी और उसे किस तारीख से लागू किया जाएगा। फिलहाल पांच प्रतिशत के अंतर को पाटने की मांग ने राज्य सरकार पर निर्णय लेने का दबाव बढ़ा दिया है।

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