
- सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट का लाइसेंस बहाली का आदेश रखा बरकरार, सरकार पर लगा एक लाख रुपये का जुर्माना
- सेहतगंज प्लांट में फिर शुरू होगा शराब उत्पादन
- फर्जी परमिट से शराब परिवहन की जांच के बीच आया फैसला
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। सोम डिस्टिलरीज को बड़ी कानूनी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें कंपनी के आठ शराब लाइसेंस रिन्यू करने के निर्देश दिए गए थे। इससे रायसेन जिले के सेहतगंज स्थित सोम समूह की आठों इकाइयों में शराब उत्पादन दोबारा शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के फैसले के उन हिस्सों को निरस्त कर दिया, जिनमें राज्य सरकार पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था और कंपनी को कथित नुकसान की भरपाई के लिए हर्जाना मांगने की छूट दी गई थी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर सुनवाई करते हुए कहा कि मामले के तथ्यों को देखते हुए हाई कोर्ट के लाइसेंस रिन्यू करने संबंधी आदेश में हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। अदालत ने महाधिवक्ता कार्यालय के कामकाज पर हाई कोर्ट की प्रतिकूल टिप्पणियां भी हटा दीं। इस फैसले से लाइसेंस नवीनीकरण को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में सोम डिस्टिलरीज को राहत मिली है। वहीं, राज्य सरकार को हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिका में आंशिक राहत मिली है।
सरकार ने आठ लाइसेंस रिन्यू करने से किया था इनकार
मामले की शुरुआत फर्जी परमिट के जरिए अवैध रूप से शराब ले जाने से जुड़ी आपराधिक जांच के बाद हुई थी। इस प्रकरण के चलते मध्य प्रदेश के आबकारी आयुक्त ने सोम डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड और सोम डिस्टिलरीज एंड ब्रुअरीज लिमिटेड के आठ लाइसेंस निलंबित कर दिए थे। इसके बाद आबकारी आयुक्त ने 18 जून को आदेश जारी कर दोनों कंपनियों के आठ लाइसेंसों के नवीनीकरण के आवेदन खारिज कर दिए। इससे कंपनी की इकाइयों में उत्पादन जारी रखने को लेकर संकट खड़ा हो गया। कंपनी ने इस फैसले को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
हाई कोर्ट ने 15 दिन में लाइसेंस रिन्यू करने को कहा था
कंपनी की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की जबलपुर मुख्य पीठ ने 24 सितंबर को राज्य सरकार को 15 दिनों के भीतर सभी लाइसेंस रिन्यू करने के निर्देश दिए थे। हाई कोर्ट ने सरकार पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। साथ ही, कंपनी को संबंधित अवधि में हुए नुकसान की भरपाई के लिए दावा करने की छूट दी थी। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने महाधिवक्ता कार्यालय के कामकाज पर भी प्रतिकूल टिप्पणियां की थीं। प्रदेश सरकार ने हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को भी दी आंशिक राहत
सुप्रीम कोर्ट ने लाइसेंस रिन्यू करने के निर्देश को बरकरार रखा, लेकिन हाई कोर्ट के आदेश के तीन महत्वपूर्ण हिस्सों में बदलाव किया। अदालत ने राज्य सरकार पर लगाया गया एक लाख रुपये का जुर्माना रद्द कर दिया। इसके अलावा कंपनी को सरकार से हर्जाना मांगने की छूट देने वाला आदेश भी हटा दिया गया। महाधिवक्ता कार्यालय के खिलाफ की गई टिप्पणियों को भी निरस्त कर दिया गया। इस तरह शीर्ष अदालत ने लाइसेंस नवीनीकरण के मामले में कंपनी को मिली राहत कायम रखी, जबकि सरकार के खिलाफ की गई दंडात्मक और प्रतिकूल टिप्पणियों से जुड़े हिस्सों को हटा दिया।
उत्पादन बहाली का रास्ता साफ, जांच का मामला अलग
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सेहतगंज स्थित सोम डिस्टिलरीज की आठों इकाइयों के लाइसेंस रिन्यू होने और उत्पादन दोबारा शुरू होने का रास्ता साफ हुआ है। हालांकि, फर्जी परमिट के जरिए शराब परिवहन से संबंधित आपराधिक जांच का मामला अलग है। लाइसेंस नवीनीकरण के आदेश को बरकरार रखने का अर्थ यह नहीं है कि उस जांच में लगे आरोपों पर भी अंतिम फैसला हो गया है। अब आगे की प्रक्रिया में राज्य के आबकारी विभाग को अदालत के आदेश के अनुरूप लाइसेंस नवीनीकरण की कार्रवाई करनी होगी। इस घटनाक्रम से शराब उद्योग, आबकारी प्रशासन और लाइसेंस संबंधी नियामकीय कार्रवाई पर भी नजर रहेगी।
