सोफिया का नाम नहीं लिया, माफी भी मांग चुके

  • शाह को अभियोजन से बचाने सरकार का सुप्रीम कोर्ट में जवाब तैयार

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह की विवादित टिप्पणी के मामले में मध्य प्रदेश सरकार अब सुप्रीम कोर्ट में अपना कानूनी पक्ष रखने की तैयारी में है। मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी नहीं देने के मोहन कैबिनेट के फैसले को राज्यपाल मंगू भाई पटेल की मंजूरी मिल चुकी है। इसके बाद गृह विभाग सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए जाने वाले जवाब को अंतिम रूप देने में जुट गया है।
सरकार के प्रस्तावित जवाब में मुख्य जोर इस बात पर रहेगा कि विवादित टिप्पणी के बाद मंत्री ने माफी मांगी, उन्होंने कर्नल सोफिया कुरैशी का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया था और किसी व्यक्ति का अपमान करने की मंशा भी नहीं थी। सरकार यह भी तर्क देगी कि बयान से सांप्रदायिक तनाव पैदा करने या सामाजिक सौहार्द बिगाडऩे का उद्देश्य साबित नहीं होता।
सरकार के जवाब में प्रमुख आधार
सूत्रों के मुताबिक सरकार की ओर से तैयार किए जा रहे जवाब में कई परिस्थितियों को मुकदमा चलाने की मंजूरी पर निर्णय का आधार बताया जा रहा है। मंत्री विजय शाह ने कथित टिप्पणी में कर्नल सोफिया कुरैशी का नाम सीधे नहीं लिया। विवाद के बाद शाह ने कई बार माफी मांगी। किसी व्यक्ति के अपमान की मंशा उनके बयान से स्पष्ट नहीं होती। सरकार का तर्क है कि बयान का उद्देश्य सांप्रदायिक तनाव पैदा करना या सामाजिक सौहार्द बिगाडऩा नहीं था। सरकार यह भी बताएगी कि मंत्री के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराने के लिए कोई व्यक्ति सामने नहीं आया। सरकार का मानना है कि इन परिस्थितियों को अभियोजन की मंजूरी पर निर्णय लेते समय ध्यान में रखा जाना जरूरी है।
कैबिनेट के बाद राज्यपाल की मंजूरी
मोहन कैबिनेट ने 25 अगस्त को विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी नहीं देने का फैसला किया था। इसके बाद प्रस्ताव राज्यपाल मंगू भाई पटेल को भेजा गया। सोमवार देर रात राज्यपाल के भोपाल लौटने के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ी और उन्होंने कैबिनेट की सिफारिश को मंजूरी दे दी। मंगलवार शाम लोक भवन से संबंधित फाइल मप्र शासन को वापस भेजे जाने के बाद गृह विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में पेश होने वाले जवाब को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज कर दी है। बताया जा रहा है कि जवाब को कानूनी विशेषज्ञों के साथ मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव कार्यालय के स्तर पर भी देखा जाएगा। मंजूरी के बाद इसे सुप्रीम कोर्ट में औपचारिक रूप से दाखिल किया जाएगा।
हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
विवाद की शुरुआत 11 मई 2025 को महू के रायकुंडा गांव में आयोजित हलमा कार्यक्रम के दौरान विजय शाह की टिप्पणी से हुई थी। ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में दिए गए उनके बयान को लेकर विवाद खड़ा हुआ। इसके बाद 14 मई 2025 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। अगले दिन शाह ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। 19 मई को सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी जांच के आदेश दिए। बाद में 1 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को मुकदमा चलाने की मंजूरी पर निर्णय लेने को कहा। इसके बाद 7 फरवरी को विजय शाह ने माफी मांगी। अब 25 अगस्त के कैबिनेट निर्णय और राज्यपाल की मंजूरी के आधार पर राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखने जा रही है। पूरे मामले में अब सबसे अहम पड़ाव सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार का जवाब होगा। सरकार यह स्पष्ट करने की कोशिश करेगी कि मंत्री के बयान, बाद की माफी और कथित आपराधिक मंशा के अभाव को देखते हुए उनके खिलाफ अभियोजन की मंजूरी क्यों नहीं दी गई। दूसरी ओर, इस मामले में पहले से हुई न्यायिक कार्यवाही को देखते हुए सरकार के तर्क और उसके कानूनी आधार पर सुप्रीम कोर्ट का रुख महत्वपूर्ण रहेगा।  

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