- एक ही व्यक्ति की चार फर्मों ने जीईएम पर लगाई बोली

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
प्रदेश के सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग में 10.99 करोड़ रुपये की कंप्यूटर, प्रिंटर और यूपीएस खरीदी में हैरान करने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) भोपाल ने इस मामले में शिवम यादव और विनय रायकवार की शिकायतों की जांच के बाद मास्टरमाइंड रणधीर कुमार पटेल के साथ उसकी ही बनाई हुई चार फर्मों के संचालकों और अन्य के खिलाफ बीएनएस की धारा 61(2), 318(4), 336 (3) और 340(2) के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है। छानबीन में साफ हुआ है कि रणधीर ने ही हेमलता पटेल, अशोक कुमार सिंह और देवेन्द्र सिंह के नाम पर तीन अलग-अलग फर्म बनाई थीं और उसी के जरिए टेंडर हासिल किया था। जांच में खुलासा हुआ कि सरकारी खरीदी उके लिए बनाए गए जेम पोर्टल पर टेंडर हासिल करने के लिए साईबाबा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, शांति ट्रेडर्स, एचटीएम इंडिया और सूरज इंटरप्राइजेज के बीच ऑनलाइन मुकाबला था। ये चारों फर्म असल में अलग-अलग व्यक्तियों की नहीं, बल्कि एक ही शख्स रणधीर कुमार पटेल के इशारे पर चल रही थीं। जीएसटी रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि मेसर्स शांति ट्रेडर्स और साईबाबा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम का मोबाइल नंबर एक ही है। यही नहीं, मोबाइल कंपनी के दस्तावेजों में इस नंबर पर आरोपी रणधीर कुमार पटेल का ही नाम और पहचान पत्र दर्ज मिला। घोटाले की गंभीरता और शातिरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एचटीएम इंडिया की ईमेल आईडी भी साईबाबा फर्म के नाम वाली निकली। इतना ही नहीं, एचटीएम इंडिया ने जीएसटी में अपना दफ्तर भोपाल में जिस पते पर बताया था, वह असल में साईबाबा का ही था। ये सभी फर्मे अन्य टेंडरों में भी लगातार एक साथ बोली (बिड) लगाती थीं, जहां इनके रेट हमेशा एक-दूसरे के बेहद करीब होते थे और बारी-बारी से ठेका इन्हीं में से किसी को मिल जाता था।
पुराने माल की कर दी सप्लाई
विभाग की जांच कमेटी ने जब खरीदे गए कंप्यूटरों को फिजिकली खोलकर देखा, तो चौंकाने वाला सच सामने आया। तय शर्तों के विपरीत कंप्यूटरों में अलग रैम मिली और एसर ब्रांड की जगह किसी लोकल कंपनी की एसएसडी हार्ड डिस्क लगी पाई गई। कमेटी ने तभी साईबाबा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश कर दी थी। इसके अलावा जिन कंप्यूटरों को नया बताकर सप्लाई किया गया था, वे टेंडर प्रक्रिया से दो महीने पहले ही एक्टिवेट हो चुके थे। इस तरह फर्म ने पुराना और इस्तेमाल हो चुका माल नए के दाम पर विभाग को थमा दिया। इसके अलावा यूपीएस की खरीद में भी गोलमाल किया गया। जेम पोर्टल पर जो यूपीएस 3,754 रुपये में उपलब्ध था, विभाग से उसके एवज में प्रति यूनिट 11,247 रुपये वसूले गए।
कंपनियों ने खोली घोटाले की पोल
सामान बनाने वाली मूल कंपनियों ने भी इस फर्जीवाड़े की पोल खोल दी। बेस्ट पावर इक्विपमेंट्स ने बताया कि उसने इसी टेंडर के लिए चारों फर्मों को एक ही सामान के अलग-अलग प्राधिकार पत्र जारी किए थे, जबकि एसर इंडिया ने तीन फर्मों को अधिकृत किया था। यानी जो फर्म एक-दूसरे की प्रतिद्वंद्वी बनकर टेंडर के लिए मुकाबला कर रही थीं, वे एक ही कंपनी का सामान बेचने के लिए अंदरखाने पूरी तरह एकजुट थीं। इसके अलावा सूरज इंटरप्राइजेज ने जेम पोर्टल पर एसर कंपनी के एक खास मॉडल का अधिकृत डीलर होने का दावा किया, जबकि कंपनी ने इससे इनकार कर दिया।
अपने ही टेंडर में दूसरी फर्म से शिकायत
जांच में यह भी सामने आया कि शांति ट्रेडर्स ने 15 अक्तूबर 2024 को इसी टेंडर के संबंध में विभाग को अपने लेटरहेड पर पत्र दिया था। ईओडब्ल्यू ने इसे जांच में महत्वपूर्ण तथ्य माना है। जांच एजेंसी के मुताबिक इससे संकेत मिलता है कि एक ही समूह से जुड़ी दूसरी फर्म ने खुद को अलग बोलीदाता के तौर पर पेश किया।
