
प्रदेश समेत देशभर में एक जुलाई 2024 से तीन नए आपराधिक कानून लागू किए गए थे। इससे पहले अपराध के जो मामले भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत पंजीबद्ध किए जाते थे, वे अब भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत दर्ज किए जा रहे हैं। उम्मीद की जा रही थी कि नए कानून में साक्ष्य संकलन को अधिक प्रभावी बनाए जाने से सजा की दर बढ़ेगी, लेकिन पहली बार सामने आई रिपोर्ट में इसके विपरीत स्थिति सामने आई है। सत्र न्यायालयों ने वर्ष 2025 में जिन प्रकरणों में न्यायालयों से निपटारा हुआ, उनमें सजा की दर मात्र 17 प्रतिशत रही, जबकि भारतीय दंड संहिता के तहत दर्ज मामलों में इसी अवधि में न्यायालयों से निपटे मामलों में सजा की दर 25 प्रतिशत रही। उल्लेखनीय है कि नए कानूनों के तहत संबंधित विभागों का सबसे अधिक जोर त्वरित न्याय और सजा की दर बढ़ाने पर है। भारतीय न्याय संहिता में डिजिटल साक्ष्य को भी मान्यता दी गई है।
