
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अनुरक्षण (मेंटेनेंस) के नाम पर हुए करीब 149 करोड़ रुपए के घोटाले की जांच रिपोर्ट सामने आने के बावजूद उसे विधानसभा और संबंधित मंत्री के स्तर पर समय रहते प्रस्तुत नहीं किया गया। मामला विधानसभा के बजट सत्र में उठने के बाद स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह के निर्देश पर तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट जून के अंतिम सप्ताह में शासन को सौंप दी थी, लेकिन विधानसभा सत्र से पहले तैयार हुई यह रिपोर्ट न तो सदन के सामने रखी गई और न ही मंत्री तक पहुंचाई गई। अब रिपोर्ट के आधार पर लोक शिक्षण संचालनालय ने कार्रवाई शुरू की है। संचालनालय ने जांच में मुख्य रूप से जिम्मेदार पाए गए वित्त अधिकारी राजेश मौर्य, उप संचालक पीके सिंह बघेल और तृतीय वर्ग कर्मचारी योगेश रावत को नोटिस जारी किए हैं। इसके अलावा करीब 40 विकासखंड वित्त अधिकारियों से भी जवाब मांगा गया है। यह मामला पहली बार मैहर जिले के रामनगर विकासखंड में सामने आया था। वहां स्कूलों की मरम्मत और छोटे निर्माण कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए जाने के बावजूद मौके पर काम नहीं मिलने के बाद गड़बड़ी की आशंका सामने आई। प्रारंभिक जांच में मामला सीमित क्षेत्र का लगा, लेकिन आगे की जांच में इसके कई जिलों और 60 से अधिक विकास खंडों तक फैले होने की बात सामने आई।
विधानसभा में उठा मामला, मंत्री ने दिए थे जांच के निर्देश
सरकारी स्कूलों के अनुरक्षण के लिए जारी राशि में गड़बड़ी का मामला बजट सत्र के दौरान विधानसभा में उठा था। इसके बाद स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने मामले की जांच कराने के निर्देश दिए। शासन स्तर से राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान की अपर परियोजना संचालक नंदा भलावे की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की गई। समिति में संयुक्त संचालक मनीष वर्मा और संयुक्त संचालक आलोक खरे को भी शामिल किया गया था। समिति ने उपलब्ध दस्तावेजों, भुगतान प्रक्रिया और संबंधित मामलों की जांच के बाद जून के अंतिम सप्ताह में अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी। यहीं से मामला और गंभीर हो गया। रिपोर्ट विधानसभा सत्र से पहले तैयार हो चुकी थी, लेकिन इसे सदन में प्रस्तुत नहीं किया गया। इतना ही नहीं, रिपोर्ट मंत्री के संज्ञान में भी समय पर नहीं लाई गई। रिपोर्ट मिलने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने इसे लोक शिक्षण संचालनालय को भेजा और अब संचालनालय ने दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की है।
मैहर में 4.37 करोड़ की गड़बड़ी से खुला मामला
घोटाले की पहली बड़ी परत मैहर जिले के रामनगर विकासखंड में खुली थी। यहां हाईस्कूल और हायर सेकंडरी स्कूलों में भवन मरम्मत, पार्किंग शेड, साइकिल स्टैंड सहित अन्य लघु निर्माण कार्यों के लिए करीब 4.37 करोड़ रुपए की राशि जारी की गई थी। कलेक्टर रानी बाटड के आदेश पर गठित जांच समिति ने जब स्कूलों का मौके पर निरीक्षण किया तो कई गंभीर गड़बडिय़ां सामने आईं।
मंजूरी के अगले दिन शुरू हुई सप्लाई
मामले में राशि जारी करने और सामग्री की आपूर्ति के बीच की टाइमिंग भी सवालों के घेरे में है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 17 दिसंबर 2025 को मंजूरी मिली और अगले ही दिन 18 दिसंबर से जिलों में सप्लाई शुरू हो गई। इसके बाद 30 दिसंबर से पहले ही काम पूरा दिखा दिया गया। इतनी कम अवधि में स्कूलों में निर्माण और अनुरक्षण कार्य पूरा होने का दावा जांच के दौरान संदेह का कारण बना। आरोप है कि संबंधित प्रक्रिया में भोपाल की वाणी इंफ्रास्ट्रक्चर एंड मटेरियल सप्लायर, सतना की महाकाल ट्रेडर्स और मैहर की रुद्र एंटरप्राइजेज जैसी फर्मों के खातों में राशि पहुंचाई गई।
