- मर्तव्यनिष्ठा से गढ़ी अलग पहचान

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्य प्रदेश कैडर के वर्ष 1991 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अशोक बर्णवाल प्रदेश के उन चुनिंदा अफसरों में गिने जाते हैं, जिन्होंने अपनी कार्यशैली, निर्णय क्षमता और प्रशासनिक दक्षता के बल पर लंबा और प्रभावशाली सफर तय किया है।
उन्हें अब प्रदेश का कार्यवाहक मुख्य सचिव बनाया गया है। वे अभी तक लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के अपर मुख्य सचिव के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे थे। ये उन दुर्लभ अफसरों में शुमार किये जाते हैं, जिन्हें अलग-अलग दलों के दो मुख्यमंत्रियों ने अपने मुख्यमंत्री सचिवालय का प्रमुख सचिव बनाया। दरअसल ये मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में उनके सचिवालय में प्रमुख सचिव थे। इसके बाद कांग्रेस के मुख्यमंत्री कमलनाथ की सरकार बनने पर भी ये उसी पद पर बने रहे। यह उनके समन्वय की क्षमता का प्रतीक है। वर्ष 2018 में प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद भी उनकी प्रशासनिक क्षमता पर सभी सरकारों ने भरोसा कायम रखा। उन्हें राज्य के दीर्घकालिक विकास के रोडमैप विजन-2025 के समन्वय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके अलावा मुख्यमंत्री कार्यालय, विधानसभा संबंधी कार्य, मंत्रिमंडलीय समन्वय तथा मुख्यमंत्री द्वारा सौंपे गए विशेष दायित्वों का सफल संचालन भी उन्होंने किया। बता दें कि माइनिंग इंजीनियरिंग में प्रथम श्रेणी से स्नातक अशोक बर्णवाल ने अपने प्रशासनिक जीवन में शुरुआत से ही निष्पक्षता और जवाबदेही को प्राथमिकता दी। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कई बार सख्त कार्रवाईयां की। इसकी वजह से उनकी छवि प्रशासनिक गलियारे में सराही गई। इसी का परिणाम रहा कि उन्हें हर पार्टी की सरकार ने पसंद कर अहम जिम्मेदारी दी। इस निर्णय ने उन्हें एक निर्भीक और निष्पक्ष प्रशासक के रूप में पहचान दिलाई। गुना, देवास और शहडोल के जिला कलेक्टर के रूप में उन्होंने प्रशासनिक सुधार, जनहित और सुशासन पर विशेष जोर दिया। वर्ष 2004 में उन्हें मुख्यमंत्री सचिवालय में अतिरिक्त सचिव के रूप में नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने अपनी कार्यकुशलता से अलग पहचान बनाई। इसके बाद उन्होंने राजीव गांधी वाटरशेड मिशन के मिशन समन्वयक, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में अतिरिक्त सचिव तथा संस्थागत वित्त विभाग में सचिव जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली।
ई–गवर्नेंस को किया लागू
करीब ढाई वर्ष की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के बाद राज्य लौटने पर उन्हें राज्य शिक्षा मिशन का आयुक्त और मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) का प्रबंध संचालक बनाया गया। वर्ष 2012-13 में उन्होंने प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थान से ई-गवर्नेंस इन एडमिनिस्ट्रेशन का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया। राज्य में ई-गवर्नेंस को प्रभावी रूप से लागू करने में उनके योगदान को उल्लेखनीय माना जाता है।
कई सुधार किए लागू…
वर्ष 2013 में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रधान सचिव के रूप में उन्होंने कई ऐसे सुधार लागू किए, जिनके मॉडल को अन्य राज्यों ने भी अपनाया। अगस्त 2016 में उन्हें मुख्यमंत्री सचिवालय का प्रधान सचिव नियुक्त किया गया। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री सचिवालय के साथ खाद्य एवं उद्यानिकी विभाग की जिम्मेदारियां भी संभालीं। अशोक बरनवाल का जन्म 27 जनवरी, 1967 को हुआ था।
