मप्र में सडक़ हादसों में डेढ़ साल में 25,869 मौतें

  • विधानसभा में सरकार ने पेश किए चौंकाने वाले आंकड़े…

गौरव चौहान
मध्यप्रदेश में सडक़ सुरक्षा की तस्वीर लगातार चिंताजनक होती जा रही है। विधानसभा में सरकार द्वारा पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2025 से 7 जुलाई 2026 तक प्रदेश में 90,138 सडक़ दुर्घटनाएं दर्ज हुईं। यानी औसतन हर दिन 474 सडक़ हादसे हुए। इन दुर्घटनाओं में 25,869 लोगों की जान गई, जबकि 95,843 लोग घायल हुए। विधानसभा में यह जानकारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भाजपा विधायक आशीष शर्मा के सवाल के लिखित जवाब में दी।
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि सडक़ हादसों की संख्या के साथ-साथ मौतों का आंकड़ा भी तेजी से बढ़ा है। डेढ़ वर्ष के भीतर हुई लगभग 26 हजार मौतें सडक़ सुरक्षा व्यवस्था, यातायात नियमों के पालन और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
इंदौर में सबसे ज्यादा हादसे, भिंड में सबसे अधिक मौतें
सरकार के अनुसार इस अवधि में इंदौर प्रदेश का सबसे अधिक सडक़ दुर्घटनाओं वाला जिला रहा। यहां 5,404 हादसे हुए, जिनमें 4,443 लोग घायल और 441 लोगों की मौत हुई। राजधानी भोपाल दूसरे स्थान पर रही, जहां 4,984 सडक़ दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इन हादसों में 3,336 लोग घायल हुए और 316 लोगों की जान गई। सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा भिंड जिले का रहा, जहां केवल 1,169 सडक़ हादसों में ही 1,287 लोगों की मौत दर्ज की गई। यह आंकड़ा संकेत देता है कि जिले में दुर्घटनाएं अपेक्षाकृत कम होने के बावजूद उनकी गंभीरता अधिक रही।
राहवीर योजना में अब तक सिर्फ 49 लोगों को सम्मान
सडक़ दुर्घटना में घायल व्यक्ति को गोल्डन ऑवर के भीतर अस्पताल पहुंचाने वालों को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र सरकार के सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 21 अप्रैल 2025 से राहवीर योजना लागू की है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस योजना के तहत घायल की मदद करने वाले व्यक्ति को 25 हजार रुपये और प्रशस्ति पत्र दिया जाता है। योजना लागू होने के बाद अब तक प्रदेश में केवल 49 राहवीरों को सम्मानित किया गया है। इन्हें कुल 12.25 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए तो सडक़ दुर्घटनाओं में मृत्यु दर कम करने में मदद मिल सकती है।
तीन महीने में पेट्रोल-डीजल से 3,604 करोड़ का टैक्स
विधानसभा में कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे के प्रश्न के उत्तर में उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने बताया कि राज्य सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर कोई नया कर नहीं बढ़ाया है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में पेट्रोल पर 29 प्रतिशत वैट, 1.50 रुपये प्रति लीटर अतिरिक्त कर और 1 प्रतिशत  उपकर लिया जाता है।
डीजल पर 19 प्रतिशत वैट, 2.50 रुपये प्रति लीटर अतिरिक्त कर और 1 प्रतिशत उपकर लागू है। इन करों से 1 अप्रैल से 30 जून 2026 के बीच केवल तीन महीनों में राज्य सरकार को 3,604.45 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।
प्रदेश की 85 जेलों में क्षमता से ज्यादा कैदी
विधानसभा में एक अन्य प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 11 केंद्रीय जेल, 41 जिला जेल, 73 उपजेल और 8 खुली जेलें संचालित हैं। इन सभी जेलों की कुल आवास क्षमता 31,444 बंदियों की है। इसके बावजूद प्रदेश की 85 जेलों में क्षमता से अधिक कैदी निरुद्ध हैं। जेलों में बढ़ती भीड़ सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और बंदियों के पुनर्वास जैसी व्यवस्थाओं के लिए चुनौती बनती जा रही है।
विधानसभा में सामने आई तीन बड़ी तस्वीरें
विधानसभा में दिए गए सरकारी आंकड़ों ने प्रदेश की तीन महत्वपूर्ण चुनौतियों को एक साथ उजागर किया है। पहली, सडक़ दुर्घटनाओं में लगातार बढ़ रही मौतें और घायल होने वालों की संख्या। दूसरी, ईंधन पर करों से सरकार को मिलने वाला बड़ा राजस्व। और तीसरी, जेलों में क्षमता से अधिक बंदियों का बढ़ता दबाव। सडक़ सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सडक़ इंजीनियरिंग, यातायात प्रवर्तन, हेलमेट-सीट बेल्ट के पालन और त्वरित चिकित्सा सहायता पर प्रभावी ढंग से काम नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में यह स्थिति और गंभीर हो सकती है। वहीं जेलों में बढ़ती भीड़ यह संकेत देती है कि आधारभूत ढांचे के विस्तार और न्यायिक प्रक्रियाओं में तेजी लाने की भी आवश्यकता है।

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