
- चिप स्कैन करते ही सामने आएगी वाहन और मालिक की पूरी जानकारी
- दो साल बाद फिर घर पहुंचेगा ड्राइविंग लाइसेंस और आरसी
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। करीब दो वर्षों से ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन पंजीयन (आरसी) की हार्ड कॉपी का इंतजार कर रहे लाखों वाहन मालिकों के लिए राहत की खबर है। मध्यप्रदेश परिवहन विभाग अब फिर से ड्राइविंग लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन कार्ड की हार्ड कॉपी जारी करने की तैयारी में है। इस बार सामान्य स्मार्ट कार्ड की जगह अत्याधुनिक एनएफसी (नियर फील्ड कम्युनिकेशन) तकनीक वाले हाईटेक कार्ड दिए जाएंगे, जिनमें डिजिटल चिप लगी होगी और जिनकी जानकारी समय-समय पर अपडेट भी की जा सकेगी। परिवहन आयुक्त कार्यालय ने स्मार्ट कार्ड तैयार कर उन्हें वाहन मालिकों के घर तक पहुंचाने के लिए नई एजेंसी के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। कंपनी का चयन होते ही सबसे पहले उन लोगों को कार्ड भेजे जाएंगे, जिन्होंने ऑनलाइन शुल्क जमा कर दिया था लेकिन अब तक उन्हें लाइसेंस या आरसी की हार्ड कॉपी नहीं मिली।
नए एनएफसी कार्ड परिवहन व्यवस्था को अधिक डिजिटल और सुरक्षित बनाएंगे। इन कार्डों में लगी चिप को विशेष रीडर से स्कैन करते ही वाहन और उसके मालिक से जुड़ी पूरी जानकारी स्क्रीन पर उपलब्ध हो जाएगी। इसमें वाहन मालिक का नाम, पता, ब्लड ग्रुप, वाहन का पंजीयन विवरण, निर्माण वर्ष, खरीद वर्ष, टैक्स की स्थिति और अन्य आवश्यक जानकारियां शामिल होंगी। इससे फर्जी दस्तावेजों पर रोक लगाने के साथ सड़क पर वाहन जांच भी तेज और पारदर्शी हो सकेगी। परंपरागत स्मार्ट कार्ड के विपरीत एनएफसी कार्ड रीड-राइट तकनीक पर आधारित होंगे। यानी आवश्यकता पडऩे पर कार्ड में दर्ज जानकारी को अपडेट भी किया जा सकेगा। भविष्य में पता बदलने, अन्य तकनीकी संशोधन या डिजिटल सेवाओं को जोडऩे में यह तकनीक उपयोगी साबित होगी।
दो साल से शुल्क लिया, लेकिन कार्ड नहीं मिले
परिवहन विभाग ने 3 अक्टूबर 2024 को अधिसूचना जारी कर ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन पंजीयन प्रमाण-पत्र की हार्ड कॉपी देना बंद कर दिया था। इसके बावजूद दोनों दस्तावेजों के लिए 200-200 रुपये का शुल्क लगातार लिया जाता रहा। इस फैसले के बाद लाखों वाहन मालिकों ने शुल्क तो जमा किया, लेकिन उन्हें न तो कार्ड मिले और न ही उनके घर दस्तावेज पहुंचे। अब विभाग उन सभी लंबित मामलों का भी निराकरण करेगा। अब वाहन मालिकों को फिर से घर बैठे आरसी और ड्राइविंग लाइसेंस मिलेंगे। एनएफसी चिप के जरिए दस्तावेजों का सत्यापन कुछ सेकंड में होगा। पुलिस जांच अधिक तेज, सटीक और पारदर्शी बनेगी। फर्जी आरसी और लाइसेंस पर प्रभावी रोक लगेगी। भविष्य में कार्ड में जानकारी अपडेट करना आसान होगा। परिवहन विभाग का मानना है कि हाईटेक एनएफसी कार्ड लागू होने से दस्तावेजों का डिजिटलीकरण और सड़क सुरक्षा व्यवस्था दोनों को मजबूती मिलेगी, जबकि लंबे समय से कार्ड का इंतजार कर रहे लाखों वाहन मालिकों को भी राहत मिलेगी।
हर साल सरकार को मिलते हैं 44 करोड़ रुपये
मध्यप्रदेश में हर वर्ष औसतन 16 लाख नए वाहनों का पंजीयन होता है। प्रत्येक वाहन पर रजिस्ट्रेशन कार्ड के लिए 200 रुपये के हिसाब से सरकार को करीब 32 करोड़ रुपये प्राप्त होते हैं। इसी तरह हर साल लगभग 6 लाख स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए जाते हैं, जिनसे 200 रुपये प्रति कार्ड के हिसाब से करीब 12 करोड़ रुपये शुल्क मिलता है। इस प्रकार दोनों मदों से सरकार को हर वर्ष लगभग 44 करोड़ रुपये की आय होती है।
