दतिया सीट में सिर्फ उपचुनाव नहीं, भाजपा-कांग्रेस की प्रतिष्ठा का सवाल बना

  • भाजपा-कांग्रेस ने अब तक नहीं खोले पत्ते
  • नरोत्तम के बेटे ने खरीदा नामांकन पत्र, राजेंद्र भारती के बयान से कांग्रेस में बढ़ा सस्पेंस
  • गौरव चौहान
भाजपा-कांग्रेस

दतिया विधानसभा सीट उपचुनाव सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की दो सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टियों की प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। चुनाव आयोग ने तैयारियां तेज कर दी हैं तो कांग्रेस और भाजपा भी अपने-अपने प्रत्याशियों के चयन और चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुट गई हैं। चुनावी सरगर्मी के बीच पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के छोटे पुत्र अंशुमान मिश्रा द्वारा नामांकन पत्र खरीदे जाने से भाजपा की रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। वहीं कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती के उस बयान ने, जिसमें उन्होंने अपने परिवार के किसी सदस्य को टिकट न देने की अपील की है, पार्टी के भीतर नया सस्पेंस खड़ा कर दिया है।
निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार 13 जुलाई तक नामांकन दाखिल किए जा सकते हैं। अब तक किसी भी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के अधिकृत उम्मीदवार ने नामांकन दाखिल नहीं किया है। हालांकि विभिन्न दलों और निर्दलीय संभावित उम्मीदवारों सहित कुल 9 लोगों ने नामांकन पत्र खरीदे हैं। कांग्रेस उम्मीदवार चयन के अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के दतिया दौरे के बाद जिला संगठन से रिपोर्ट मंगाई गई है और वरिष्ठ नेताओं से भी राय ली गई है। प्रत्याशियों की दौड़ में राजेंद्र भारती की पत्नी का नाम सबसे आगे चल रहा है, जबकि अवधेश नायक और घनश्याम सिंह भी दावेदारों की सूची में हैं। अगले एक-दो दिन में कांग्रेस प्रत्याशी के नाम का ऐलान कर सकती है। दतिया की चुनावी तस्वीर में जातीय समीकरण भी अहम भूमिका निभाएंगे। इस सीट पर ब्राह्मण, कुशवाहा, यादव और दलित मतदाता निर्णायक माने जाते हैं। वहीं, आजाद समाज पार्टी की एंट्री मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश जरूर कर रही है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यादव वोटों पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का असर बीजेपी को फायदा पहुंचा सकता है।
भाजपा में नरोत्तम मिश्रा की दावेदारी मजबूत
भाजपा ने अभी तक अधिकृत उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है, लेकिन राजनीतिक हलकों में पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है। बुधवार को उनके पुत्र अंशुमान मिश्रा द्वारा नामांकन पत्र खरीदे जाने को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है। सूत्रों का कहना है कि भाजपा केंद्रीय नेतृत्व एक-दो दिन में उम्मीदवार के नाम पर अंतिम निर्णय ले सकता है। पार्टी स्थानीय समीकरणों, संगठनात्मक रिपोर्ट और जीत की संभावनाओं को ध्यान में रखकर फैसला लेने की तैयारी में है। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो यह उपचुनाव दोनों दलों की प्रतिष्ठा से जुड़ चुका है। 2023 में नरोत्तम मिश्रा की हार बीजेपी के लिए बड़ा झटका थी। ऐसे में यदि पार्टी एक बार फिर उन पर दांव लगाती है तो यह उनके राजनीतिक भविष्य की भी बड़ी परीक्षा होगी। पिछले ढाई वर्षों से नरोत्तम मिश्रा लगातार दतिया में सक्रिय हैं और स्थानीय स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
कांग्रेस में भी तस्वीर साफ नहीं
कांग्रेस की ओर से भी अभी तक उम्मीदवार घोषित नहीं किया गया है। इस बीच कांग्रेस नेता अवधेश नायक, रामदीन और हरदास ने संभावित दावेदारी के तहत नामांकन पत्र खरीदे हैं। इससे पहले दामोदर यादव भी नामांकन पत्र खरीद चुके हैं, जिन्हें आजाद समाज पार्टी अपना उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस में टिकट को लेकर कई नामों पर चर्चा चल रही है, लेकिन अंतिम निर्णय पार्टी हाईकमान के स्तर पर होना है।
राजेंद्र भारती ने परिवार को टिकट न देने की अपील की
उपचुनाव का सबसे बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम पूर्व विधायक राजेंद्र भारती का बयान माना जा रहा है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से आग्रह किया है कि उपचुनाव में उनके परिवार के किसी भी सदस्य को टिकट न दिया जाए। उन्होंने कहा कि पार्टी किसी भी योग्य और मजबूत कार्यकर्ता को उम्मीदवार बनाए, वे तन-मन-धन से उसे जिताने के लिए पूरी ताकत लगाएंगे। राजेंद्र भारती के इस बयान ने कांग्रेस की संभावित रणनीति पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले कुछ दिनों से यह चर्चा थी कि कांग्रेस उनकी पत्नी शोभा भारती या पुत्र अनुज भारती को मैदान में उतार सकती है। लेकिन अब स्वयं भारती द्वारा परिवार को टिकट न देने की अपील के बाद समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं।
पटवारी पहले कर चुके हैं पैरवी
दिलचस्प बात यह है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी पहले सार्वजनिक रूप से यह संकेत दे चुके हैं कि पार्टी राजेंद्र भारती के परिवार के किसी सदस्य को उम्मीदवार बना सकती है। ऐसे में भारती के ताजा बयान ने कांग्रेस नेतृत्व के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। नामांकन की अंतिम तिथि में अब केवल कुछ दिन शेष हैं। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस दोनों को जल्द ही अपने पत्ते खोलने होंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उम्मीदवारों की घोषणा के साथ ही दतिया का उपचुनाव पूरी तरह चुनावी मुकाबले में बदल जाएगा और प्रचार अभियान भी तेज हो जाएगा।

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