
- डीपीआई सख्त: स्कूल नहीं लौटे तो रुकेगा वेतन, खत्म होगी अटैचमेंट व्यवस्था
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी के बीच एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। प्रदेश के करीब 12 हजार सरकारी शिक्षक अपने मूल स्कूलों में पढ़ाने के बजाय वर्षों से मंत्रालय, विभागीय मुख्यालयों, कलेक्ट्रेट, पंचायत, राज्य शिक्षा केंद्र और अन्य सरकारी कार्यालयों में प्रतिनियुक्ति (अटैचमेंट) पर कार्यरत हैं। इनमें कई ऐसे शिक्षक भी शामिल हैं, जिन्होंने पिछले 15 से 17 वर्षों से स्कूल में पढ़ाने का काम नहीं किया है।
सरकारी स्कूलों में लगातार सामने आ रही शिक्षक कमी की बड़ी वजह इन्हीं लंबे समय से चल रहे अटैचमेंट को माना जा रहा है। अब इस व्यवस्था पर लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने सख्त रुख अपनाते हुए ऐसे शिक्षकों का वेतन रोकने और उन्हें मूल पदस्थापना वाले स्कूलों में वापस भेजने की कार्रवाई शुरू कर दी है। लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त अभिषेक सिंह ने विभागीय समीक्षा बैठक में साफ निर्देश दिए कि जो शिक्षक अपने मूल विद्यालयों में सेवाएं देने के बजाय अन्य कार्यालयों में कार्यरत हैं, उनका वेतन तत्काल प्रभाव से रोक दिया जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि शिक्षा विभाग का उद्देश्य बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। यदि शिक्षक स्कूलों की जगह कार्यालयों में बैठेंगे तो विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होना स्वाभाविक है। इसलिए अब लंबे समय से चली आ रही अटैचमेंट व्यवस्था की व्यापक समीक्षा कर इसे समाप्त करने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी।
17 साल से कार्यालयों में जमे कई शिक्षक
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार कई शिक्षक ऐसे हैं जो डेढ़ दशक से भी अधिक समय से विभिन्न कार्यालयों में अटैच हैं। कुछ शिक्षक मंत्रालय, एसडीएम कार्यालय, जिला शिक्षा कार्यालय, राज्य शिक्षा केंद्र, बीईओ कार्यालय, बीएसी, डाइट, पंचायत और निर्वाचन संबंधी कार्यों में लगातार लगे हुए हैं। राजधानी भोपाल में ही एक दर्जन से अधिक शिक्षक वर्षों से मंत्रालय और विभिन्न प्रशासनिक कार्यालयों में कार्यरत बताए जा रहे हैं।
14% शिक्षक ऑनलाइन व्यवस्था से बाहर
भोपाल जिले में स्थिति और भी चिंताजनक पाई गई है। जिले में लगभग 4,300 शिक्षक एवं कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें करीब 200 कार्यालयीन कर्मचारी शामिल हैं। समीक्षा में सामने आया कि लगभग 620 शिक्षक ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली में नियमित रूप से दर्ज ही नहीं हो रहे हैं। यानी करीब 14 प्रतिशत शिक्षक ई-अटेंडेंस व्यवस्था से बाहर हैं। अब इनके रिकॉर्ड का सत्यापन कर कार्रवाई की जाएगी।
10 जिलों में ई-अटेंडेंस लागू करने में लापरवाही
डीपीआई की समीक्षा में यह भी सामने आया कि प्रदेश के लगभग 10 जिलों में शासन के निर्देशों के बावजूद नियमित ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं की जा रही है। इन जिलों में सीधी, रायसेन, पन्ना, छतरपुर, सागर और शहडोल सहित अन्य जिले शामिल हैं। आयुक्त ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) से 24 घंटे के भीतर ऐसे शिक्षकों की सूची और पूरी जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
क्या होंगे कार्रवाई के प्रमुख बिंदु
स्कूल छोड़कर दूसरे विभागों में कार्यरत शिक्षकों का वेतन रोका जाएगा। सभी अटैच शिक्षकों को मूल पदस्थापना वाले विद्यालयों में वापस भेजा जाएगा। वेतन भुगतान से पहले ई-अटेंडेंस का सत्यापन अनिवार्य होगा। ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं करने वाले शिक्षकों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। 24 घंटे में सभी जिलों से पूरी रिपोर्ट मांगी गई है। अटैचमेंट व्यवस्था की व्यापक समीक्षा कर अनावश्यक प्रतिनियुक्तियां समाप्त की जाएंगी। सरकार का मानना है कि प्रदेश में नई शिक्षक भर्ती के साथ-साथ उपलब्ध शिक्षकों का सही उपयोग भी उतना ही जरूरी है। वर्षों से कार्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की स्कूलों में वापसी से हजारों विद्यार्थियों को नियमित शिक्षक मिल सकेंगे और सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
ई-अटेंडेंस नहीं तो वेतन भी नहीं
बैठक में यह भी सामने आया कि बड़ी संख्या में शिक्षक ऑनलाइन उपस्थिति भी दर्ज नहीं कर रहे हैं। इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए आयुक्त ने निर्देश दिए कि अब प्रत्येक शिक्षक के वेतन भुगतान से पहले उसकी ई-अटेंडेंस का सत्यापन अनिवार्य होगा। प्राचार्यों और संकुल प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि बिना ऑनलाइन उपस्थिति सत्यापित किए किसी भी शिक्षक का वेतन बिल तैयार न किया जाए। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।
स्कूलों में बढ़ी शिक्षकों की कमी
प्रदेशभर में करीब 12 हजार शिक्षकों के स्कूलों से बाहर रहने का सीधा असर सरकारी विद्यालयों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। कई स्कूलों में एक या दो शिक्षक ही पूरे विद्यालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जबकि कहीं विषय विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हैं। इससे विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई और परीक्षा परिणाम भी प्रभावित हो रहे हैं। शिक्षा विभाग का मानना है कि यदि प्रतिनियुक्त शिक्षक वापस स्कूलों में लौटते हैं तो बिना नई भर्ती के भी बड़ी संख्या में विद्यालयों में शिक्षक उपलब्ध हो जाएंगे।
