80 करोड़ के घोटाले में सात पर एफआईआर

एफआईआर
  • एसटीसी के पूर्व सीएमडी समेत मुरैना के कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मुरैना के व्यापारिक समूह केएस ऑयल्स लिमिटेड और सरकारी एजेंसी स्टेट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन (एसटीसी) के पूर्व अफसरों की मिलीभगत से लगभग 80 करोड़ की धोखाधड़ी के मामले में सीबीआई की दिल्ली यूनिट ने एक दर्जन आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इनमें एसटीसी के पूर्व अधिकारियों और कोलेटरल मैनेजमेंट एजेंसी के साथ ही केएस समूह के संचालकों के खिलाफ आपराधिक साजिश रचने और ठगी के आरोप लगाए गए हैं। मामला 2010 से 2014 के बीच सरसों के तेल के व्यापार के नाम पर लिए गए कर्ज में हुई हेराफेरी का है। जांच में पता चला कि मुरैना के केएस ऑयल्स लिमिटेड ने केंद्र की एजेंसी एसटीसी से सरसों का तेल खरीदने के लिए कर्ज की सुविधा ली थी। समझौते में केएस ऑयल्स को सप्लायर चुनना था और एसटीसी को उनके नाम पर भुगतान की गारंटी देनी थी। सीबीआई के मुताबिक, केएस ऑयल्स के चेयरमैन रमेश चंद्र गर्ग और निदेशक दावेश अग्रवाल ने अपनी ही दो फर्जी (शेल) कंपनियां बनाई और उन्हें सप्लायर के तौर पर दिखाया। एसटीसी के अधिकारियों ने इन कंपनियों की असलियत जांचे बिना ही उन्हें नियमों से च्यादा का भुगतान जारी कर दिया। हैरान करने वाली बात यह है कि जो पैसा इन कंपनियों को दिया गया, वह घूम-फिरकर वापस केएस ऑयल्स के ही खातों में पहुंच गया।
इनके खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर
एसटीसी के अधिकारी पूर्व सीएमडी एन.के. माथुर, पूर्व निदेशक मनोज कुमार मिश्रा और खलील रहीम, पूर्व सीजीएम बी. वेंकटरम, बी.बी. साहा, समीर कौल और प्रकाश चंद। अन्य आरोपी: केएस ऑयल्स के रमेश चंद्र गर्ग और दावेश अग्रवाल, स्टार एग्री के अमित खंडेलवाल ।
2012 में हुआ था खुलासा, टैंकों में तेल की जगह भरा था पानी
इस घोटाले का खुलासा तब हुआ जब सितंबर 2012 में गुना और मुरैना स्थित गोदामों की जांच की गई। जिन टैंकों में सरसों का तेल होना चाहिए था, उनमें 90 प्रतिशत से च्यादा पानी भरा हुआ मिला। माल की सुरक्षा के लिए तैनात एजेंसी स्टार एग्रीच् ने कागजों पर सब कुछ ठीक होने की झूठी रिपोर्ट दी थी। इसके बावजूद एसटीसी के अधिकारियों ने कंपनी के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की और उन्हें बार-बार समय दिया गया, जिससे एसटीसी को 74.77 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। ब्याज के साथ यह राशि बढक़र 80 करोड़ से अधिक हो गई है। सीबीआई ने सभी आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 120-बी, 420 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) व 13 (1) (ख) के तहत केस दर्ज किया है। मामले की जांच सीबीआई के डीएसपी गौरव सोहम को सौंपी गई है। गौरतलब है कि यह केस छानबीन के लिए सीबीआई को पिछले साल 27 फरवरी को सौंपा गया था, जिसमें प्राथमिक जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद एक्शन लिया गया है।

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