
- जीतू पटवारी बोले- आज राष्ट्रपति से मुलाकात का समय मांगा
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। कांग्रेस की राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किए जाने का पार्टी हर स्तर पर विरोध कर रही है। इस मामले में कांग्रेस ने चुनाव आयोग के रवैये पर सख्त ऐतराज जताया है। मप्र कांग्रेस ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मामले में हस्तक्षेप करने की माग की है।
कांग्रेस विधायक शुक्रवार को नई दिल्ली में राष्ट्रपति से मुलाकात कर न्याय की गुहार लगाएंगे। गुरुवार को अधिकतर कांग्रेस विधायक दिल्ली के लिए रवाना हो गए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा और जनता के मुद्दों को लेकर कांग्रेस पार्टी अपने संघर्ष के अगले चरण में प्रवेश कर रही है। कांग्रेस ने लोकतंत्र बचाओ अभियान तेज कर दिया है। उन्होंने बताया कि मप्र कांग्रेस के सभी विधायक दिल्ली पहुंच रहे हैं। शुक्रवार को राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए समय मांगा गया है और समय मिलने की प्रतीक्षा की जा रही है। पटवारी ने कहा कि शुक्रवार को कांग्रेस मीडिया के समक्ष पूरे घटनाक्रम और अपने पक्ष को विस्तार से रखेगी, जिसके बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश में बढ़ती महंगाई, पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि, युवाओं के भविष्य से जुड़े पेपर लीक जैसे मामलों और किसानों की समस्याओं पर सरकार जवाबदेही से बचने का प्रयास कर रही है।
भाजपा के मामलों में सक्रियता और कांग्रेस के मामले में चुप्पी क्यों?
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन के नामांकन से जुड़े गंभीर मामले में चुनाव आयोग का रवैया बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और पक्षपातपूर्ण है। जब चुनाव आयोग के पास हस्तक्षेप करने और निर्णय लेने के विशेष अधिकार हैं, तो। षि अधिकार हैं, तो फिर कांग्रेस की आपत्ति पर समय रहते फैसला क्यों नहीं लिया गया? आखिर भाजपा के मामलों में सक्रियता और कांग्रेस के मामले में चुप्पी क्यों? इसका उसे जवाब देना चाहिए। यह सवाल केवल एक उम्मीदवार का नहीं, बल्कि देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया और चुनावी निष्पक्षता का है। यदि चुनाव आयोग नियम, कानून और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस की अनदेखी करेगा, तो उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हमने न्याय की उम्मीद में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में ऐसी नजीर पेश करेगा, जो लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया की गरिमा की रक्षा करे। संवैधानिक संस्थाएं किसी राजनीतिक दल की कठपुतली नहीं, बल्कि संविधान की संरक्षक हैं।
