- सीएम की मंजूरी, वित्त की सहमति, दफ्तर भी तैयार… फिर क्यों नहीं बना बोर्ड 9,662 पदों की भर्ती फिर ईएसबी के भरोसे

गौरव चौहान
भोपाल। मध्यप्रदेश में पुलिस भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी, तेज और स्वतंत्र बनाने के लिए घोषित पुलिस भर्ती बोर्ड करीब एक साल बाद भी अस्तित्व में नहीं आ सका है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सार्वजनिक घोषणा, वित्त विभाग से 95 पदों की मंजूरी और नए कार्यालय की तैयारी के बावजूद बोर्ड की फाइल मंत्रालय के गलियारों में घूम रही है। नतीजा यह है कि सरकार को एक बार फिर पुलिस भर्ती की जिम्मेदारी कर्मचारी चयन मंडल को सौंपनी पड़ी है। सरकार ने हाल ही में पुलिस विभाग में 9,662 पदों पर भर्ती को मंजूरी दी है। इनमें आरक्षक, आरक्षक चालक, एएसआई, सूबेदार और सब इंस्पेक्टर के पद शामिल हैं। इन पदों के लिए जल्द ही ईएसबी अधिसूचना जारी करेगा, जिसमें आवेदन प्रक्रिया, आयु सीमा, परीक्षा पैटर्न और शैक्षणिक योग्यता की जानकारी होगी।
सीएम की घोषणा, लेकिन अमल नहीं
करीब 11 महीने पहले पुलिस पदक अलंकरण समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वतंत्र पुलिस भर्ती बोर्ड के गठन की घोषणा करते हुए कहा था कि भविष्य में पुलिस विभाग के लगभग 21 हजार रिक्त पदों पर भर्ती इसी बोर्ड के माध्यम से होगी। घोषणा के बाद पुलिस मुख्यालय ने विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर गृह विभाग को भेज दिया। लेकिन इसके बाद फाइल वित्त, विधि-विधायी और सामान्य प्रशासन विभागों के बीच घूमती रही। विभागों की आपत्तियों के जवाब भी पीएचक्यू ने करीब चार महीने पहले भेज दिए। वित्त विभाग ने बोर्ड के लिए 95 नए पदों को मंजूरी भी दे दी, लेकिन अंतिम स्तर पर प्रस्ताव कैबिनेट की स्वीकृति नहीं पा सका। परिणामस्वरूप बोर्ड का गठन आज भी अधूरा है।
मुख्यमंत्री ने भी पूछा- देरी क्यों
सूत्रों के अनुसार हाल ही में पुलिस मुख्यालय में हुई उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने स्वयं अधिकारियों से पूछा कि पुलिस भर्ती बोर्ड के गठन में आखिर बाधा कहां है। अधिकारियों के पास इसका स्पष्ट उत्तर नहीं था। इसके बावजूद सिंहस्थ-2028 और कानून-व्यवस्था की भविष्य की जरूरतों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने रिक्त पदों पर तत्काल भर्ती के निर्देश दिए, लेकिन बोर्ड न होने के कारण प्रक्रिया फिर ईएसबी को सौंपनी पड़ी।
ईएसबी पहले भी रहा विवादों में
सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर ईएसबी पहले से विवादों का सामना करता रहा है। आरक्षक भर्ती परीक्षा-2023 के दौरान आधार ऑथेंटिकेशन के जरिए फर्जी अभ्यर्थियों का मामला सामने आया था। इस प्रकरण में 33 एफआईआर दर्ज हुईं और कई आरोपियों की गिरफ्तारी भी हुई। ऐसे में उम्मीद की जा रही थी कि पुलिस विभाग अपनी भर्ती प्रक्रिया के लिए अलग और विशेषज्ञ एजेंसी तैयार करेगा, जिससे विवादों की संभावना कम होगी और भर्ती प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बन सकेगी। लेकिन बोर्ड का गठन लंबित रहने से सरकार को पुरानी व्यवस्था पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है।
सिर्फ पुलिस नहीं, सभी यूनिफॉर्म सेवाओं की भर्ती का था लक्ष्य
प्रस्तावित पुलिस भर्ती बोर्ड केवल पुलिस विभाग तक सीमित नहीं था। इसके माध्यम से जेल, वन विभाग, परिवहन, आबकारी, होमगार्ड और अन्य यूनिफॉर्म सेवाओं की भर्ती भी एक ही मंच से कराने की योजना थी। इससे विभागवार अलग-अलग परीक्षाओं की आवश्यकता कम होती और भर्ती प्रक्रिया में तेजी आती।
पहले था पुलिस भर्ती बोर्ड
मध्यप्रदेश में करीब तीन दशक पहले तक पुलिस का अपना भर्ती बोर्ड था। बाद में भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठने के बाद यह जिम्मेदारी व्यापमं को सौंप दी गई, जिसका वर्तमान स्वरूप कर्मचारी चयन मंडल है। अब जबकि ईएसबी पर दर्जनों विभागों की भर्ती परीक्षाओं का भारी दबाव है, पुलिस विभाग फिर अलग भर्ती बोर्ड चाहता है।
दूसरे राज्यों का मॉडल, फिर भी देरी
तमिलनाडु, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में पुलिस भर्ती बोर्ड वर्षों से प्रभावी ढंग से कार्य कर रहे हैं। मध्यप्रदेश सरकार ने भी इन्हीं राज्यों के मॉडल का अध्ययन कर प्रस्ताव तैयार किया था। इतना ही नहीं, श्यामला हिल्स क्षेत्र में बोर्ड के लिए नया कार्यालय भी तैयार किया जा रहा है। इसके बावजूद प्रशासनिक मंजूरी का इंतजार खत्म नहीं हो रहा।
क्या है देरी की वजह
सूत्रों के मुताबिक फाइल अब अंतिम प्रशासनिक और कैबिनेट स्तर की मंजूरी का इंतजार कर रही है। विभागीय समन्वय, संरचना, सेवा नियम और वित्तीय प्रावधानों से जुड़े मुद्दों पर सहमति बनने में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है। जब तक अंतिम स्वीकृति नहीं मिलती, तब तक पुलिस भर्ती की जिम्मेदारी ईएसबी के पास ही रहेगी।पुलिस भर्ती बोर्ड का गठन केवल एक नई संस्था बनाना नहीं, बल्कि भर्ती व्यवस्था में संरचनात्मक सुधार का प्रयास है। बढ़ती पुलिस जरूरतों, सिंहस्थ-2028 जैसी बड़ी व्यवस्थाओं और पारदर्शी भर्ती की अपेक्षाओं के बीच बोर्ड का गठन लगातार टलना प्रशासनिक निर्णय प्रक्रिया की धीमी गति को उजागर करता है। अब देखना होगा कि सरकार इस बहुप्रतीक्षित बोर्ड को कब तक वास्तविक रूप दे पाती है, या फिर आने वाली भर्तियां भी ईएसबी के माध्यम से ही होती रहेंगी।
मुख्य बिंदु
11 महीने पहले मुख्यमंत्री ने पुलिस भर्ती बोर्ड की घोषणा की थी।
21 हजार रिक्त पदों की भर्ती बोर्ड से कराने का लक्ष्य रखा गया था।
वित्त विभाग ने 95 पदों की मंजूरी दे दी, लेकिन कैबिनेट से अंतिम स्वीकृति नहीं मिली।
सरकार ने 9,662 पदों पर भर्ती की मंजूरी दी, लेकिन परीक्षा फिर ईएसबी कराएगा।
ईएसबी पर पहले आरक्षक भर्ती परीक्षा-2023 में गड़बड़ी के आरोप लग चुके हैं।
प्रस्तावित बोर्ड से पुलिस के साथ जेल, वन, आबकारी, परिवहन और होमगार्ड जैसी यूनिफॉर्म सेवाओं की भर्ती भी कराई जानी थी।
