- वित्तीय प्रबंधन पर कैग ने उठाए सवाल

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) द्वारा वर्ष 2024-25 के राज्य वित्त पर विधानसभा में पेश रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि प्रदेश की आय तो बढ़ी है, लेकिन आय के मुकाबले केंद्र से मिलने वाले करों पर निर्भरता भी लगातार बढ़ी है। दूसरी ओर राजस्व व्यय, राजकोषीय सहायता और पूंजीगत व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि लगभग 22 हजार करोड़ रुपए के उपयोगिता प्रमाण-पत्र लंबित हैं और सरकारी धन निजी जमा खातों में वर्षों से पड़ा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2015-16 से 2024-25 के बीच राज्य की राजस्व प्राप्तियां बढ़ी हैं। हालांकि इस दौरान राज्य की अपनी कर एवं गैर-कर आय की तुलना में केंद्र से मिलने वाले करों का योगदान अधिक तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2020-21 में संघीय करों का हिस्सा 32 प्रतिशत था, जो 2024-25 में बढक़र 40 प्रतिशत हो गया। इसके विपरीत राज्य के अपने संसाधनों से प्राप्त आय लगभग स्थिर बनी रही। इसी तरह राजस्व व्यय भी लगातार बढ़ा है। वर्ष 2015-16 में 36.54 प्रतिशत सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के बराबर रहने वाला राजस्व व्यय वर्ष 2024-25 में बढक़र 42.69 प्रतिशत तक पहुंच गया। राशि के रूप में यह व्यय 36,464 करोड़ रुपए से बढक़र 1,06,268 करोड़ रुपए हो गया। रिपोर्ट के अनुसार राजस्व व्यय की वृद्धि दर राज्य की आर्थिक वृद्धि के अनुरूप रही, लेकिन इसके कारण व्यय का दायरा भी लगातार विस्तृत हुआ है।
3.32 प्रतिशत रहा सकल घरेलू उत्पाद घाटा
वर्ष 2024-25 में राज्य का राजकोषीय घाटा सकल राज्य घरेलू उत्पाद का 3.32 प्रतिशत रहा, जो वित्तीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम में निर्धारित 3.60 प्रतिशत की सीमा के भीतर है। केंद्र सरकार ने राज्य के लिए 61,939.87 करोड़ रुपए तक उधार लेने की सीमा तय की थी, जबकि राज्य ने 56,568.12 करोड़ रुपए का ही ऋण लिया।
सब्सिडी में बढ़ोत्तरी, पूंजीगत व्यय भी बढ़ा
रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2024-25 के दौरान राजकोषीय सहायता (सब्सिडी) में पिछले वर्ष की तुलना में 23,320 करोड़ रुपए यानी 114.49 प्रतिशत की वृद्धि हुई। सबसे अधिक वृद्धि ऊर्जा क्षेत्र, किसान कल्याण एवं कृषि विकास, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों से जुड़े विभागों में दर्ज की गई। इसी तरह पूंजीगत व्यय भी पिछले दस वर्षों में 19,993 करोड़ रुपए से बढक़र 70,585 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। हालांकि कैग ने यह भी कहा है कि ऋण प्राप्तियों की तुलना में पूंजीगत व्यय का अनुपात 79 प्रतिशत रहा, जिससे संकेत मिलता है कि उधार ली गई पूरी राशि का उपयोग परिसंपत्तियों के निर्माण में नहीं हो सका।
एक नजर में कैग रिपोर्ट
– केंद्र से मिलने वाले करों पर राज्य की निर्भरता बढ़ी।
– राजस्व व्यय 36,464 करोड़ रुपए से बढक़र 1,06,268 करोड़ रुपए हो गया।
– सब्सिडी में 23,320 करोड़ रुपए यानी (114.49%) की वृद्धि हुई है।
– पूंजीगत व्यय 70,585 करोड़ रुपए तक पहुंचा है।
– 22,049 करोड़ के उपयोगिता प्रमाण-पत्र लंबित।
– 679 निजी जमा खातों में 4,812 करोड़ रुपए निष्क्रिय या अप्रयुक्त राशि के रूप में पड़े हैं।
– राजकोषीय घाटा 3.32 प्रतिशत है जो निर्धारित सीमा के भीतर माना गया है।
