
- दो-सालों में 30 सरकारी स्कूलों में प्रवेश लेने नहीं-आए विद्यार्थी
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। नीति आयोग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में पिछले एक दशक के दौरान प्राथमिक स्कूली नामांकन में देश की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। राज्य का प्राइमरी ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो 109.3 त्न से घटकर महज 76.3 त्न रह गया है। जिले में सरकारी स्कूलों से बच्चों के लगातार दूर होने का सिलसिला जारी है।
इसी साल अप्रैल में शून्य नामांकन के कारण 23 सरकारी स्कूलों पर अस्थाई ताला लगाया जा चुका है। इसके बाद अब नए शिक्षा सत्र में जिले के 7 और सरकारी प्राथमिक स्कूल ऐसे सामने आए हैं, जहां अब तक कक्षा-1 में एक भी विद्यार्थी ने प्रवेश नहीं लिया है। हैरानी की बात ये है कि जिन स्कूलों में बच्चे नहीं हैं या जहां एक भी नया प्रवेश नहीं हुआ है, वहां अब भी शिक्षक पदस्थ हैं। दूसरी तरफ शिक्षा विभाग के अधिकारी गांव-गांव जाकर अप्रवेशी बच्चों को खोज रहे हैं और चौपाल लगाकर नामांकन बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार ब्यावरा, खिलचीपुर, नरसिंहगढ़ और जीरापुर विकासखंड के 7 स्कूलों में कक्षा-1 का नामांकन शून्य है। विभाग इन स्कूलों को बचाने के लिए विशेष अभियान चला रहा है। हाल ही में सरेड़ी गांव में आयोजित चौपाल में 8 अप्रवेशी बच्चों की पहचान भी की गई है, जिन्हें नए सत्र में स्कूलों से जोडऩे की तैयारी की जा रही है।
सरकारी स्कूलों की स्थिति
23 सरकारी स्कूल अप्रैल-2026 में शून्य नामांकन के कारण बंद किए जा चुके हैं। 7 और सरकारी प्राथमिक स्कूलों में इस साल कक्षा-1 में अब तक एक भी प्रवेश नहीं हुआ है। यानी दो साल में 30 सरकारी स्कूल शून्य नामांकन के संकट से प्रभावित हुए हैं। बंद किए गए 23 स्कूलों में राजगढ़ और नरसिंहगढ़ के 7-7 स्कूल शामिल हैं। बंद हो चुके प्राथमिक शाला कलाली में भी 2 शिक्षक पदस्थ बताए जा रहे हैं।
एमपी में 10 साल में 33 लाख से ज्यादा बच्चों ने छोड़ा प्राइमरी स्कूल
मध्य प्रदेश में प्राथमिक शिक्षा को लेकर एक बेहद चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। नीति आयोग द्वारा जारी वर्ष 2024-25 के ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश पिछले एक दशक में प्राथमिक स्कूली बच्चों के दाखिले के मामले में देश के सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले राज्यों की सूची में शामिल हो गया है। आंकड़े बताते हैं कि एक दशक पहले मध्य प्रदेश का प्राइमरी स्कूल एनरोलमेंट रेशियो करीब 109.3 त्न हुआ करता था, जो अब लगभग 30 फीसदी गिरकर महज 76.3 त्न पर सिमट गया है। देश के किसी भी बड़े राज्य में यह गिरावट सबसे बड़ी और चौंकाने वाली है।
बच्चे नहीं, फिर भी पदस्थ हैं 15 शिक्षक
कमलियाखेड़ी प्राथमिक शाला में देवचंद दांगी, अविचल भारती पदस्थ हैं। खिलचीपुर के भेरवांखेड़ी-दूंदाखेड़ी में कैलाश दांगी, अनिल शर्मा, मल्हारपुरा में बृजमोहन मालवीय, शिवचरण राठौर पदस्थ हैं। नरसिंहगढ़ के बंजारी स्कूल में दिनेश भिलाला, प्रमोद उपाध्याय तथा पाड़ल्याखेड़ी में सूरज यादव पदस्थ हैं। जीरापुर के टपरियाहेड़ी स्कूल में भी दो शिक्षक पदस्थ हैं, जबकि फतेहपुर प्राथमिक शाला में नारायणसिंह चौहान, पवन भावसार हैं। सारंगपुर विकासखंड के प्राथमिक शाला कलाली पहले ही टैंपोरेरी क्लोज हो चुका है, लेकिन यहां अब भी नारायण भिलाला, ऐश्वर्या तिवारी पदस्थ बताए गए हैं।
